
#पालकोट #जनआंदोलन : फर्जी केस का आरोप लगाते हुए हजारों ग्रामीण सड़कों पर उतरे, शांतिपूर्ण बंद का व्यापक असर दिखा।
खूंटी जिले के बहुचर्चित पहाड़ा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड में नागवंशी राजपरिवार के राजकुमार लाल देवब्रत नाथ शाहदेव की गिरफ्तारी के विरोध में रविवार को पालकोट प्रखंड पूरी तरह बंद रहा। नवयुवक संघ पालकोट के नेतृत्व में हजारों ग्रामीण बैनर-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राजकुमार को फर्जी तरीके से मामले में फंसाया गया है। बंद का असर बाजार, यातायात और सामान्य जनजीवन पर साफ दिखाई दिया।
- पालकोट प्रखंड में नवयुवक संघ के नेतृत्व में स्वैच्छिक बंद।
- लाल देवब्रत नाथ शाहदेव की रिहाई की मांग को लेकर हजारों ग्रामीण सड़कों पर।
- खूंटी पुलिस पर फर्जी तरीके से फंसाने का गंभीर आरोप।
- बाजार, दुकानें और यातायात पूरी तरह ठप।
- निर्दोष युवकों को भी मामले में फंसाने का आरोप।
- बंद शांतिपूर्ण, लेकिन प्रभावशाली रहा।
खूंटी जिले के पहाड़ा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड को लेकर रविवार को पालकोट प्रखंड में अभूतपूर्व जनाक्रोश देखने को मिला। नवयुवक संघ पालकोट के आह्वान पर पूरे प्रखंड क्षेत्र में स्वैच्छिक बंद रखा गया। सुबह से ही विभिन्न पंचायतों, गांवों और टोले-मोहल्लों से हजारों ग्रामीण हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर मुख्य सड़कों पर उतर आए। लोगों ने नारेबाजी करते हुए विरोध मार्च निकाला और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया।
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जनसमूह की संख्या और नाराजगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभावनाओं से जुड़ चुका है। बंद के कारण पालकोट प्रखंड की दुकानें, बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप रही।
फर्जी केस में फंसाने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खूंटी पुलिस द्वारा नागवंशी राजपरिवार के राजकुमार लाल देवब्रत नाथ शाहदेव को भू-माफिया, अपराधी और हत्यारे के रूप में पेश किया जा रहा है, जो वास्तविकता से बिल्कुल परे है। ग्रामीणों का कहना है कि इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना ठोस साक्ष्य के एक सम्मानित और जनसेवक व्यक्ति को बदनाम करना समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जिस जमीन विवाद के आधार पर राजकुमार को इस मामले से जोड़ा जा रहा है, उसका उनसे कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसके बावजूद उनका नाम इस गंभीर मामले में जोड़ दिया गया, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
जांच की निष्पक्षता पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि मृतक सोमा मुंडा के गांव के कई लोगों को भी पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया है। इससे पूरे मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।
निर्दोष युवकों को फंसाने का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस हत्याकांड में कुछ निर्दोष युवकों को भी फर्जी तरीके से फंसाया गया है। इसी क्रम में राजकुमार लाल देवब्रत नाथ शाहदेव का नाम जोड़ दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि सामाजिक तनाव को भी बढ़ाने वाली है।
लोगों का कहना है कि इसी कारण पालकोट प्रखंड में आक्रोश व्याप्त है और आमजन को सड़क पर उतरकर विरोध करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
45 हजार एकड़ भूमि दान करने वाले परिवार का हवाला
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि नागवंशी राजपरिवार ने क्षेत्र के विकास और जनकल्याण के लिए लगभग 45 हजार एकड़ भूमि दान की है। ऐसे में उस परिवार का कोई भी सदस्य हत्या जैसे जघन्य और अमानवीय अपराध में शामिल हो सकता है, यह कल्पना से परे है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार हमेशा से आदिवासी-मूलवासी समाज के हितों के लिए खड़ा रहा है और समाज सेवा में इसकी भूमिका ऐतिहासिक रही है।
जनता के सच्चे सेवक बताए गए राजकुमार
पालकोट प्रखंड के विभिन्न इलाकों से आए ग्रामीणों ने राजकुमार लाल देवब्रत नाथ शाहदेव को जनता का सच्चा सेवक बताया। ग्रामीणों का कहना था कि शिक्षा, स्वास्थ्य, जमीन विवाद या सामाजिक समस्याओं के समाधान में उन्होंने हमेशा लोगों की मदद की है। किसी भी व्यक्ति ने जब भी उनसे संपर्क किया, उन्होंने सहयोग करने में कभी पीछे कदम नहीं रखा।
ग्रामीणों के अनुसार यही कारण है कि आज हजारों लोग उनके समर्थन में सड़कों पर उतरे हैं और यह मांग कर रहे हैं कि एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमे में न फंसाया जाए।
पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन के रवैये को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि यदि जांच सही दिशा में होगी, तो निर्दोष लोगों को न्याय मिलेगा और दोषियों की पहचान भी स्पष्ट होगी।
शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली बंद
हालांकि पूरे दिन पालकोट प्रखंड में बंद का व्यापक असर रहा, लेकिन कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने भी अनुशासन बनाए रखा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी।
न्यूज़ देखो: न्याय की मांग बनाम प्रशासन की परीक्षा
पालकोट प्रखंड में उमड़ा यह जनसैलाब बताता है कि मामला अब केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। हजारों ग्रामीणों का सड़कों पर उतरना प्रशासन के लिए एक गंभीर संकेत है। अब यह जरूरी हो गया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो। प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि जनता का विश्वास कायम रहेगा या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जनभावनाओं को समझना अब जरूरी
जब किसी मामले में आम जनता बड़ी संख्या में सड़क पर उतरती है, तो यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि न्याय की पुकार होती है। लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हर जांच निष्पक्ष और तथ्य आधारित हो। अब समय है कि प्रशासन जनभावनाओं को समझे और सच्चाई तक पहुंचने के लिए ठोस कदम उठाए।




