#रायडीह #मानदेय_विवाद : दो माह से लंबित भुगतान पर पंचायत जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ी।
गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधियों को समय पर मानदेय भुगतान नहीं होने से असंतोष का माहौल बन गया है। बताया गया कि जनवरी 2026 में छह माह के मानदेय का आवंटन प्रखंड कार्यालय को प्राप्त हो चुका था, लेकिन दो माह बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। होली जैसे बड़े पर्व से पहले राशि मिलने की उम्मीद लगाए जनप्रतिनिधियों में इस देरी को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
- रायडीह प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत के 13 मुखिया, 14 पंचायत समिति सदस्य और 145 वार्ड सदस्य कार्यरत।
- जनवरी 2026 में छह माह के मानदेय का आवंटन प्रखंड कार्यालय को मिलने की जानकारी।
- दो माह बीतने के बाद भी मानदेय भुगतान नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी।
- होली पर्व से पहले भुगतान की उम्मीद थी, लेकिन राशि नहीं मिलने से उत्साह कम।
- पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रखंड प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था से जुड़े जनप्रतिनिधियों के बीच इन दिनों असंतोष का माहौल देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों के लिए निर्धारित मानदेय राशि का आवंटन जनवरी 2026 में ही प्रखंड कार्यालय को मिल चुका था। इसके बावजूद दो महीने बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। विशेष रूप से होली जैसे बड़े पर्व से पहले मानदेय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे जनप्रतिनिधियों को निराशा का सामना करना पड़ा है, जिससे प्रखंड प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
रायडीह प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधि
रायडीह प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के तहत कुल 13 मुखिया, 14 पंचायत समिति सदस्य और 145 वार्ड सदस्य निर्वाचित होकर अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इन सभी जनप्रतिनिधियों को सरकार की ओर से समय-समय पर निर्धारित मानदेय या प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
यह राशि जनप्रतिनिधियों को उनके दायित्वों के निर्वहन और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रदान की जाती है। आमतौर पर यह भुगतान निर्धारित अवधि के अनुसार किया जाता है, ताकि पंचायत स्तर पर कार्यरत प्रतिनिधियों को आर्थिक सहयोग मिल सके।
हालांकि रायडीह प्रखंड में इस बार भुगतान में देरी होने के कारण जनप्रतिनिधियों में असंतोष की स्थिति बन गई है।
जनवरी में मिला था छह माह का आवंटन
जानकारी के अनुसार जनवरी 2026 में ही छह माह के मानदेय का आवंटन रायडीह प्रखंड कार्यालय को प्राप्त हो चुका था। इस सूचना के बाद प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों में खुशी का माहौल था।
होली जैसे बड़े त्योहार से पहले मानदेय मिलने की उम्मीद के कारण कई जनप्रतिनिधियों ने अपने परिवार और बच्चों के साथ त्योहार की तैयारियों को लेकर योजनाएं भी बनाई थीं। लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आवंटन पहले ही प्राप्त हो चुका था तो भुगतान में इतनी देरी क्यों हुई, यह सवाल अब प्रखंड प्रशासन के सामने खड़ा हो गया है।
पंचायत समिति सदस्य हिमांशु कुमार गुप्ता ने जताई नाराजगी
नवागढ़ पंचायत समिति सदस्य हिमांशु कुमार गुप्ता ने इस मामले में प्रखंड प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि दो महीने पहले ही मानदेय का आवंटन मिल चुका था, इसके बावजूद भुगतान नहीं होना निराशाजनक है।
हिमांशु कुमार गुप्ता ने कहा: “दो माह पूर्व ही जनप्रतिनिधियों के मानदेय का आवंटन प्रखंड कार्यालय को प्राप्त हो चुका है, लेकिन होली जैसे बड़े त्योहार के समय भुगतान नहीं करना प्रखंड प्रशासन की नकारात्मक कार्यशैली को दर्शाता है। जनप्रतिनिधि खुशी और उम्मीद के साथ इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।”
उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में निराशा और नाराजगी दोनों बढ़ी है।
मुखिया मार्था एक्का ने कहा— त्योहार फीका पड़ गया
जरजट्टा पंचायत की मुखिया मार्था एक्का ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समय पर भुगतान नहीं होने से जनप्रतिनिधियों का होली पर्व फीका पड़ गया।
मार्था एक्का ने कहा: “रायडीह प्रखंड के सभी जनप्रतिनिधियों के लिए इस बार होली का त्योहार फीका हो गया। आवंटन मिलने के बावजूद समय पर मानदेय का भुगतान नहीं होना बहुत ही गलत है। सभी लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि त्योहार से पहले राशि मिल जाएगी, लेकिन प्रखंड प्रशासन ने सारी योजना ही बिगाड़ दी।”
उनका कहना है कि इस तरह की देरी से पंचायत प्रतिनिधियों का मनोबल भी प्रभावित होता है।
वार्ड सदस्य सरोज देवी ने भी जताई निराशा
केपूर पंचायत की वार्ड सदस्य सरोज देवी ने कहा कि वार्ड सदस्यों को पहले से ही सीमित मानदेय मिलता है, लेकिन जब मिलने की उम्मीद बनती है तो खुशी भी बढ़ जाती है।
सरोज देवी ने कहा: “वार्ड सदस्यों को ज्यादा कुछ नहीं मिलता, लेकिन जब मिलने की उम्मीद रहती है तो मन में खुशी होती है। इस बार होली से पहले मानदेय मिलने की उम्मीद थी, लेकिन भुगतान नहीं होने से सारी उम्मीद खत्म हो गई और त्योहार फीका पड़ गया।”
उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों में बढ़ रहा असंतोष
प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आवंटन मिलने के बावजूद भुगतान में देरी होती है तो इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पंचायत स्तर पर कार्य करने वाले प्रतिनिधियों का मानना है कि उन्हें समय पर मानदेय मिलना चाहिए, ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन बेहतर तरीके से कर सकें।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि लंबित मानदेय का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
न्यूज़ देखो: पंचायत व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है समय पर भुगतान
रायडीह प्रखंड में जनप्रतिनिधियों का मानदेय लंबित रहने की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं कितनी संवेदनशील हैं। यदि आवंटन मिलने के बावजूद भुगतान में देरी होती है तो इससे स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को देखते हुए समय पर भुगतान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पंचायत व्यवस्था मजबूत बने तभी गांवों का विकास संभव
गांवों के विकास में पंचायत जनप्रतिनिधियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
जब ये प्रतिनिधि अपने दायित्वों के साथ काम करते हैं, तभी योजनाएं जमीन पर उतरती हैं और लोगों तक लाभ पहुंचता है।
ऐसे में जरूरी है कि उनके अधिकारों और सुविधाओं का भी सम्मान किया जाए।
समय पर मानदेय भुगतान केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र के सम्मान का भी सवाल है।
यदि आपके क्षेत्र में भी इस तरह की कोई समस्या या प्रशासनिक देरी देखने को मिल रही है, तो अपनी आवाज जरूर उठाएं।
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