मैकलुस्कीगंज खलारी कोयलांचल में रंगों की धूम: सामाजिक समरसता और परंपराओं के संग मनाई गई होली

मैकलुस्कीगंज खलारी कोयलांचल में रंगों की धूम: सामाजिक समरसता और परंपराओं के संग मनाई गई होली

author Jitendra Giri
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#खलारी #होली_उत्सव : मैकलुस्कीगंज खलारी कोयलांचल में उत्साह और भाईचारे के साथ मनाई गई होली।

रांची जिले के खलारी और मैकलुस्कीगंज सहित पूरे कोयलांचल क्षेत्र में इस वर्ष होली का पर्व उत्साह, रंग और सामाजिक समरसता के साथ मनाया गया। गांवों, बाजारों और कोलियरी क्षेत्रों में लोगों ने पारंपरिक फगुआ गीत, नृत्य और होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए। विभिन्न समुदायों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश दिया। प्रशासन की सतर्कता के बीच पर्व शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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  • मैकलुस्कीगंज, खलारी और आसपास के कोयलांचल क्षेत्र में होली उत्साह के साथ मनाई गई।
  • बाजार टांड़, चूरी, डकरा, लपरा, राय, हुटाप, बुकबुका, मायापुर, विश्रामपुर में भी दिखी विशेष रौनक।
  • ढोल, मांदर और फगुआ गीतों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक होली उत्सव।
  • सीसीएल परियोजनाओं की कॉलोनियों में भी आयोजित हुए होली मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ रंगों का महापर्व

रांची जिले के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित मैकलुस्कीगंज, खलारी और आसपास का पूरा कोयलांचल क्षेत्र इस वर्ष होली के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया। गांवों से लेकर बाजारों तक और कोलियरी क्षेत्रों से लेकर पंचायत मुख्यालयों तक हर जगह रंग, उमंग और भाईचारे का अद्भुत माहौल देखने को मिला। यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकता और लोक परंपराओं को जीवंत करने का माध्यम भी बना। लोगों ने उत्साहपूर्वक एक-दूसरे को रंग लगाया और मिठाइयां बांटकर पर्व की खुशियां साझा कीं।

बाजारों में दिखी रौनक, गांवों में गूंजे फगुआ गीत

होली से करीब एक सप्ताह पहले से ही मैकलुस्कीगंज, खलारी, बाजार टांड़, चूरी, डकरा, लपरा, राय, हुटाप, बुकबुका, मायापुर और विश्रामपुर जैसे क्षेत्रों के बाजारों में खास रौनक देखने को मिली। दुकानों को रंग-बिरंगे गुलाल, अबीर, पिचकारी और आकर्षक गुब्बारों से सजाया गया था।

बच्चों और युवाओं में होली को लेकर विशेष उत्साह रहा। बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। परदेश में काम करने वाले कई युवक-युवतियां और मजदूर भी अपने गांव लौटे, जिससे रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी चहल-पहल बढ़ गई। लंबे समय बाद परिवारों के साथ त्योहार मनाने का अवसर मिलने से घरों में खुशी का माहौल बन गया।

होलिका दहन में दिखी परंपरा और आस्था

पूर्णिमा की रात क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया। बच्चों और युवाओं ने कई दिनों पहले से लकड़ी और उपले एकत्र किए थे।

होलिका दहन के दौरान लोगों ने अग्नि की परिक्रमा की और नई फसल की बालियां अग्नि में अर्पित कर समृद्धि और सुख-शांति की कामना की। कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों ने सामूहिक कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को नशामुक्ति और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संदेश भी दिया।

फगुआ गीत और नृत्य से गूंजा कोयलांचल

धूलंडी की सुबह होते ही पूरा कोयलांचल क्षेत्र रंगों में डूब गया। बच्चे पिचकारी लेकर सड़कों पर निकल पड़े और युवाओं की टोलियां ढोल और मांदर की थाप पर फगुआ गीत गाते हुए एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाने लगीं।

ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक फगुआ गीतों की गूंज सुनाई दी। मांदर और ढाक की थाप पर युवाओं ने नृत्य किया और बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

आदिवासी समुदायों में भी पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ होली मनाई गई। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

कोलियरी क्षेत्रों में भी हुआ होली मिलन समारोह

कोयलांचल क्षेत्र होने के कारण सीसीएल की विभिन्न परियोजनाओं और कॉलोनियों में भी होली का उत्साह देखने को मिला। कर्मचारियों और उनके परिवारों ने सामूहिक रूप से होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए।

इन आयोजनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिनमें बच्चों और युवाओं ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। कई स्थानों पर वरिष्ठ कर्मियों को सम्मानित किया गया। प्रबंधन और श्रमिकों के बीच भी सौहार्दपूर्ण वातावरण देखने को मिला।

सामाजिक समरसता का बना संदेश

इस बार की होली ने एक बार फिर यह साबित किया कि यह पर्व केवल रंगों का नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। विभिन्न जाति, धर्म और समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाया और मिठाइयां बांटी।

मैकलुस्कीगंज, जो अपनी एंग्लो-इंडियन विरासत के लिए प्रसिद्ध है, वहां भी पारंपरिक और आधुनिक शैली में होली मनाई गई। इसने सांस्कृतिक विविधता और एकता की सुंदर मिसाल पेश की।

प्रशासन की सतर्कता से शांतिपूर्ण माहौल

पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गई और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी गई।

थाना स्तर पर गश्ती बढ़ाई गई और लोगों से अपील की गई कि नशे में वाहन न चलाएं तथा किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन की सक्रियता और जनता के सहयोग से पूरा पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी

इस वर्ष होली में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों ने सामूहिक होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए।

पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने फगुआ गीत गाए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं। बच्चों में भी खास उत्साह देखने को मिला।

विद्यालयों में होली से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को इस पर्व के महत्व और पर्यावरण अनुकूल होली मनाने का संदेश दिया गया।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश

होली के अवसर पर कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने प्राकृतिक रंगों के उपयोग और जल संरक्षण का संदेश दिया। लोगों से अपील की गई कि वे रासायनिक रंगों से बचें और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पर्व मनाएं।

होलिका दहन में भी सीमित लकड़ी के उपयोग की अपील की गई, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

होली के अवसर पर स्थानीय व्यापारियों, मिठाई विक्रेताओं और रंग-गुलाल बेचने वाले दुकानदारों के यहां भीड़ देखी गई। इससे स्थानीय बाजारों में व्यापार बढ़ा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिला।

त्योहार के कारण छोटे व्यापारियों और स्थानीय दुकानदारों को अच्छी आमदनी हुई, जिससे उनके चेहरों पर भी खुशी देखने को मिली।

न्यूज़ देखो: रंगों के पर्व ने फिर दिखाया एकता का रंग

मैकलुस्कीगंज–खलारी और पूरे कोयलांचल क्षेत्र में मनाई गई होली ने यह साबित कर दिया कि भारत के त्योहार केवल परंपरा नहीं बल्कि सामाजिक एकता की मजबूत डोर भी हैं। यहां विभिन्न समुदायों ने मिलकर जिस तरह से यह पर्व मनाया, वह सामाजिक समरसता की प्रेरणादायक मिसाल है। ऐसे उत्सव समाज को जोड़ते हैं और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

रंगों से ही नहीं, रिश्तों से भी बनता है त्योहार

त्योहार तभी सार्थक होते हैं जब वे लोगों को जोड़ते हैं और समाज में प्रेम का संदेश फैलाते हैं।
कोयलांचल की यह होली हमें सिखाती है कि परंपराओं को निभाते हुए भी सामाजिक समरसता को मजबूत किया जा सकता है।

यदि आपके क्षेत्र में भी होली से जुड़ी कोई खास परंपरा या आयोजन हुआ है, तो उसे साझा करें।
ऐसी सकारात्मक खबरें समाज में प्रेरणा फैलाती हैं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाती हैं।

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Written by

खलारी, रांची

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