
#बेतला #पर्यटन_व्यवस्था : सैलानियों ने होटल सुविधाओं और अतिरिक्त शुल्क वसूली पर उठाए सवाल।
लातेहार जिले के विश्वप्रसिद्ध बेतला राष्ट्रीय उद्यान में इन दिनों अव्यवस्थाओं को लेकर सैलानियों में नाराजगी देखी जा रही है। यहां आने वाले पर्यटकों ने वन विभाग और पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटलों की खराब व्यवस्था, साफ-सफाई की कमी और अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर सवाल उठाए हैं। पर्यटकों का कहना है कि सुविधाएं कम हैं लेकिन शुल्क लगातार बढ़ाया जा रहा है।
- बेतला राष्ट्रीय उद्यान में होटल व्यवस्था को लेकर सैलानियों की नाराजगी।
- कमरों का किराया 1500 से 2000 रुपये, फिर भी मेंटेनेंस के नाम पर 500 रुपये अतिरिक्त वसूली।
- कई कमरों में दुर्गंध, गंदे शौचालय और साफ-सफाई का अभाव।
- बिजली कटने पर जनरेटर चलाने के लिए भी अलग से शुल्क लेने का आरोप।
- आराध्या होटल और प्लाजा होटल की जर्जर स्थिति पर भी पर्यटकों ने उठाए सवाल।
लातेहार जिले का बेतला राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और वन्यजीवों के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के बीच खास पहचान रखता है। लेकिन इन दिनों यहां की अव्यवस्थाएं चर्चा का विषय बन गई हैं।
यहां घूमने आए कई सैलानियों ने वन विभाग और पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटलों की खराब व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है, जबकि शुल्क लगातार बढ़ाया जा रहा है।
होटल किराया और अतिरिक्त शुल्क पर सवाल
पर्यटकों के अनुसार वन विभाग की ओर से संचालित होटलों में कमरों का किराया 1500 से 2000 रुपये तक लिया जा रहा है। इसके अलावा “मेंटेनेंस” के नाम पर अलग से 500 रुपये भी वसूले जा रहे हैं।
सैलानियों का सवाल है कि जब कमरों का नियमित किराया लिया जा रहा है, तो फिर अलग से मेंटेनेंस शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है। कई पर्यटकों ने इसे मनमानी करार दिया है।
सुविधाओं की हालत भी खराब
सैलानियों ने केवल शुल्क वसूली ही नहीं बल्कि सुविधाओं की स्थिति पर भी नाराजगी जताई है। कई पर्यटकों का कहना है कि कमरों में दुर्गंध रहती है और शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती।
इसके अलावा कई कमरों में बिजली और रोशनी की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बिजली कटने की स्थिति में जनरेटर चलाने के लिए भी अलग से पैसे मांगे जाते हैं, जिससे पर्यटक असंतुष्ट हैं।
पर्यटन विभाग के होटलों पर भी सवाल
पर्यटन विभाग के अंतर्गत आने वाले आराध्या होटल और प्लाजा होटल की स्थिति को लेकर भी पर्यटकों ने सवाल उठाए हैं।
पर्यटकों का कहना है कि इन होटलों के कई कमरे जर्जर हो चुके हैं और बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। साफ-सफाई, पानी और रोशनी जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है।
पर्यटन विशेषज्ञों ने जताई चिंता
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन व्यवस्थागत खामियों को समय रहते दूर नहीं किया गया तो बेतला राष्ट्रीय उद्यान जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
बेतला लंबे समय से झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रहा है और यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
जांच और सुधार की मांग
स्थानीय लोगों और सैलानियों ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि होटल व्यवस्था और सुविधाओं में सुधार किया जाए, ताकि बेतला राष्ट्रीय उद्यान की पहचान और विश्वसनीयता बनी रहे और यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
न्यूज़ देखो: पर्यटन स्थल की साख बचाना जरूरी
बेतला राष्ट्रीय उद्यान झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन यदि बुनियादी सुविधाएं ही खराब हों तो इसका असर पर्यटन पर पड़ना तय है। जरूरी है कि संबंधित विभाग समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार करें, ताकि बेतला की पहचान और पर्यटन संभावनाएं सुरक्षित रह सकें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बेहतर सुविधाओं से ही बढ़ेगा पर्यटन
पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई, सुरक्षा और बेहतर होटल व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। जब पर्यटकों को अच्छी सुविधाएं मिलती हैं तो वे दोबारा भी वहां आने के लिए प्रेरित होते हैं।
ऐसे में जरूरी है कि बेतला जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाए।
अगर आप भी चाहते हैं कि बेतला राष्ट्रीय उद्यान की व्यवस्था सुधरे, तो इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और अपनी राय कमेंट में जरूर दें।






