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पीरटांड़ प्रखंड में विकास कार्यों पर उठे सवाल, माले ने अनियमितताओं की जांच और आंदोलन की दी चेतावनी

#गिरिडीह #पीरटांड़ #भवननिर्माणअनियमितता : स्कूल भवन कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगा जांच की मांग।

पीरटांड़ प्रखंड के खुखरा पंचायत और +2 हाई स्कूल बरियारपुर सहित कई स्कूलों में चल रहे भवन निर्माण कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया गया है। माले सदस्य विमल कुमार सिन्हा ने गिरिडीह जिला मुख्यालय में लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की है। माले नेता राजेश सिन्हा ने दस्तावेजों और तस्वीरों के आधार पर टेंडर के अनुरूप कार्य नहीं होने का दावा किया है। मामले को लेकर संगठन ने विभागीय जांच और आवश्यक होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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  • खुखरा पंचायत और +2 हाई स्कूल बरियारपुर सहित कई स्कूलों में निर्माण कार्य पर सवाल।
  • विमल कुमार सिन्हा ने गिरिडीह माले जिला मुख्यालय में दी लिखित शिकायत।
  • टेंडर में चिमनी ईंट का प्रावधान, लेकिन स्थल पर लोकल ईंट उपयोग का आरोप।
  • विभागीय जांच नहीं होने पर डीसी गिरिडीह को आवेदन देने की चेतावनी।
  • पीरटांड़ और मधुबन क्षेत्र में विकास कार्यों पर निगरानी की कमी का दावा।
  • व्यापक बैठक कर आंदोलन और संगठन विस्तार की घोषणा।

पीरटांड़ प्रखंड में चल रहे विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खुखरा पंचायत और +2 हाई स्कूल बरियारपुर सहित कई विद्यालयों में भवन निर्माण कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए माले नेताओं ने जांच की मांग की है। इस संबंध में माले सदस्य विमल कुमार सिन्हा ने गिरिडीह जिला मुख्यालय में लिखित शिकायत सौंपी है। वहीं माले नेता राजेश सिन्हा ने दस्तावेज और तस्वीरों के आधार पर कार्य में गड़बड़ी का दावा करते हुए विभाग से जांच कराने की बात कही है।

स्कूल भवन निर्माण में अनियमितता का आरोप

माले सदस्य विमल कुमार सिन्हा ने बताया कि पीरटांड़ प्रखंड के खुखरा पंचायत और +2 हाई स्कूल बरियारपुर समेत कई स्कूलों में भवन निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यों में टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है।

उनका कहना है कि ग्रामीणों द्वारा कई बार कार्य में गड़बड़ी को लेकर रोक लगाने की कोशिश की गई, लेकिन विरोध के बावजूद संवेदक द्वारा काम पुनः शुरू कर दिया जाता है। इस स्थिति से ग्रामीणों में असंतोष है और मामले के समाधान की आवश्यकता है।

विमल कुमार सिन्हा ने कहा: “पीरटांड़ प्रखंड में लगभग सभी विकास कार्यों की यही हालत है। ग्रामीण विरोध करते हैं, लेकिन दबाव बनाकर काम शुरू करा दिया जाता है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

टेंडर के अनुरूप सामग्री नहीं लगाने का दावा

माले नेता राजेश सिन्हा ने बताया कि उन्होंने संबंधित कार्यों के कागजात और तस्वीरों का अवलोकन किया। उनके अनुसार टेंडर के स्टीमेट में चिमनी ईंट का उल्लेख है, जबकि मौके पर स्थानीय ईंट का उपयोग किया जा रहा है।

राजेश सिन्हा ने कहा: “कागजात देखने के बाद स्पष्ट लगा कि टेंडर के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। हम विभाग से इसकी जांच कराएंगे। यदि विभाग कार्रवाई नहीं करता है तो डीसी गिरिडीह को लिखित आवेदन देंगे।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बेहतर गुणवत्ता का कार्य सुनिश्चित नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

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प्रशासनिक निगरानी पर उठाए सवाल

राजेश सिन्हा ने कहा कि पीरटांड़ और मधुबन क्षेत्र में सरकारी कार्यों की निगरानी प्रभावी तरीके से नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा है।

राजेश सिन्हा ने कहा: “पहले सत्ता बीजेपी की थी, अब जेएमएम की है, लेकिन भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकारी कार्यों को देखने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल बनाया जाता है और थाना-पुलिस का डर दिखाया जाता है।”

उन्होंने कहा कि जल्द ही पीरटांड़ क्षेत्र की महिलाओं की एक टीम पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपनी बात रखेगी।

संगठन विस्तार और आंदोलन की तैयारी

माले नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें एक-एक मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उनका कहना है कि पहले लोगों को संगठित किया जाएगा और घर-घर, गांव-गांव में सदस्यता अभियान चलाया जाएगा।

राजेश सिन्हा ने बताया कि छात्र, किसान, मजदूर और प्रवासी मजदूरों को संगठन से जोड़ा जाएगा। महिलाओं को एप्वा में शामिल करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लगभग दस बैठकों में वे स्वयं इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

माले के वरिष्ठ नेता पूरन महतो इस अभियान का मार्गदर्शन करेंगे। नेताओं का कहना है कि पूरे पीरटांड़ क्षेत्र में प्रत्येक बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में पारदर्शिता की मांग या सियासी टकराव

पीरटांड़ प्रखंड में उठे ये सवाल स्थानीय विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर चर्चा की मांग करते हैं। यदि टेंडर शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो विभागीय जांच आवश्यक है, वहीं प्रशासन को भी निगरानी तंत्र मजबूत करना होगा। दूसरी ओर, राजनीतिक दलों की ओर से आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र में सियासी हलचल बढ़ा सकती है। अब देखना होगा कि शिकायत पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच होती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सजग गांव, मजबूत समाज की ओर एक कदम

विकास कार्यों की गुणवत्ता केवल सरकारी फाइलों का विषय नहीं, बल्कि हर ग्रामीण के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। स्कूल भवन जैसे निर्माण कार्य बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

यदि आपके क्षेत्र में भी किसी विकास कार्य को लेकर सवाल हैं, तो आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। जागरूक रहें, तथ्यों के साथ अपनी बात रखें और सकारात्मक बदलाव के लिए संगठित हों।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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