#छतरपुर #निर्माण_घोटाला : घटिया सामग्री और मानकों की अनदेखी—ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई।
पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड स्थित बाघमारा गांव में भदैया नाला पर बन रहे चेकडैम निर्माण में अनियमितता के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन देकर जांच की मांग की है। आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं हो रहा और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। मामले में कार्रवाई को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
- बाघमारा गांव के भदैया नाला में बन रहा चेकडैम विवादों में।
- ग्रामीणों ने बीडीओ को लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की।
- निर्माण में घटिया सामग्री और कम गुणवत्ता का आरोप।
- DPR मानकों की अनदेखी करने की शिकायत।
- PCC की मोटाई कम रखने का भी आरोप लगा।
- ठेकेदार और संबंधित कर्मियों की मिलीभगत की आशंका।
पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड अंतर्गत नौडीहा पंचायत के बाघमारा गांव में निर्माणाधीन चेकडैम को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भदैया नाला पर बन रहे इस चेकडैम के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पांच साल पुरानी योजना पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, यह चेकडैम लगभग 5 वर्ष पूर्व स्वीकृत किया गया था और इसका निर्माण कार्य लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराया जा रहा है। लेकिन वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य को देखकर ग्रामीणों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण योजना में लापरवाही बरती जा रही है, जो भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।
निर्माण में घटिया सामग्री का आरोप
आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि चेकडैम निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा।
दीवार और संरचना में इस्तेमाल किए जा रहे पत्थर और गिट्टी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कमजोर सामग्री के कारण यह चेकडैम लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा और जल्द ही क्षतिग्रस्त हो सकता है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के अनुसार नहीं किया जा रहा है।
विशेष रूप से PCC (कंक्रीट) की मोटाई कम रखे जाने की बात सामने आई है, जो निर्माण की मजबूती को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, ढलाई और संरचना के कार्य में भी कई खामियां बताई गई हैं, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर-कर्मियों की मिलीभगत हो सकती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो सरकारी धन की भारी बर्बादी होगी।
किसानों पर पड़ सकता है असर
यह चेकडैम क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सिंचाई की सुविधा बेहतर हो सकती है। लेकिन यदि निर्माण कार्य में गड़बड़ी रही, तो इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस मामले में सुधार नहीं किया गया, तो यह परियोजना पूरी तरह विफल हो सकती है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल ग्रामीणों द्वारा आवेदन देने के बाद अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
न्यूज़ देखो: विकास योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी
भदैया नाला चेकडैम मामला यह दिखाता है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। यदि समय पर निगरानी नहीं हो, तो योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं। प्रशासन के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है कि वह इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी और निर्माण में सुधार आएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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