#महुआडांड़ #मनरेगा_प्रशिक्षण : मेटों को तकनीकी ज्ञान और पारदर्शिता के लिए किया गया प्रशिक्षित।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में मनरेगा मेटों के लिए प्रशिक्षण सह समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में 14 पंचायतों की महिला मेटों ने भाग लेकर योजनाओं के बेहतर संचालन की जानकारी प्राप्त की। बीडीओ संतोष बैठा ने पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता पर जोर दिया। यह पहल ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय में मनरेगा मेटों का प्रशिक्षण सह समीक्षा बैठक आयोजित।
- बीडीओ संतोष बैठा ने मेटों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण।
- 14 पंचायतों की 50 महिला मेटों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
- NMMS ऐप और E-KYC को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश।
- 20 महिला मेटों को मेट किट प्रदान कर तकनीकी सहायता दी गई।
- लीड्स संस्था के सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन।
महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय एवं सभागार में सोमवार को मनरेगा मेटों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम सह अर्धवार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से आई महिला मेटों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य मनरेगा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और कार्यस्थल प्रबंधन को मजबूत करना था।
मेटों की भूमिका को बताया अहम
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष बैठा की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने मेटों को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा योजनाओं के सफल संचालन में मेटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
संतोष बैठा ने कहा: “मजदूरों का E-KYC कराना और NMMS ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी मेट कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति, मस्टर रोल संधारण और समय पर भुगतान की प्रक्रिया को गंभीरता से निभाएं।
प्रशिक्षण में दी गई विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधिकारियों ने मेटों को कार्यस्थल प्रबंधन, मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने और मस्टर रोल तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन करने पर विशेष जोर दिया गया।
मेटों को बताया गया कि वे योजना के क्रियान्वयन की मुख्य कड़ी हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि हर कार्य पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा हो। प्रशिक्षण के दौरान मेटों ने अपने अनुभव भी साझा किए और समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से चर्चा की।
महिला मेटों को मिली तकनीकी सहायता
इस अवसर पर 14 पंचायतों के 20 सक्रिय महिला मेटों को मेट किट प्रदान की गई, जिसमें बैग, नापी टेप, कैलकुलेटर और स्केल जैसे उपकरण शामिल थे। इससे मेटों को अपने कार्य को अधिक व्यवस्थित और सटीक तरीके से करने में मदद मिलेगी।
नए दिशा-निर्देशों की जानकारी
लीड्स संस्था के प्रतिनिधि रंजीत भेंगरा ने बताया कि अप्रैल 2026 से मनरेगा के नए दिशा-निर्देश लागू होंगे।
रंजीत भेंगरा ने कहा: “अब NMMS ऐप के माध्यम से मस्टर रोल संधारण अनिवार्य होगा, जिससे मेटों की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य स्तर पर मेटों को और अधिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे नई तकनीकों के अनुरूप कार्य कर सकें।
अन्य योजनाओं की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में आत्मा विभाग की एटीएम ज्योति कुमारी ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना और टपक सिंचाई योजना की जानकारी दी और अधिक लाभुकों को जोड़ने का आह्वान किया।
ज्योति कुमारी ने कहा: “किसानों को इन योजनाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है।”
वहीं जिला परिषद सदस्य स्टेला नगेसिया ने मेटों को सतर्क रहने और किसी भी अनियमितता की जानकारी देने की बात कही।
स्टेला नगेसिया ने कहा: “पारदर्शिता बनाए रखना मेटों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
प्रखंड प्रमुख कंचन कुजूर ने मेटों को अपने कार्य के प्रति समर्पित रहने और मर्यादा बनाए रखने का संदेश दिया।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर
JSLPS के प्रतिनिधि सकलदीप सिंह ने महिला समूहों को सशक्त बनाने और बीमा योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।
सकलदीप सिंह ने कहा: “आर्थिक सशक्तिकरण से ही ग्रामीण महिलाओं की स्थिति मजबूत हो सकती है।”
कार्यक्रम में लीड्स संस्था से संगीता गिद्ध, राजेंद्र उरांव, कुलदीप बेक, राजेश्वरी एवं संध्या सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। कुल मिलाकर 14 पंचायतों से 50 महिला मेटों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
न्यूज़ देखो: प्रशिक्षण से मजबूत होगी मनरेगा व्यवस्था
महुआडांड़ में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्पष्ट करता है कि सरकार और प्रशासन मनरेगा योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए गंभीर हैं। महिला मेटों को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से सशक्त करना ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षण के बाद योजनाओं के क्रियान्वयन में कितना सुधार आता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक मेट, सशक्त गांव विकास की नई दिशा
जब जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग प्रशिक्षित और जागरूक होते हैं, तभी योजनाओं का सही लाभ आम जनता तक पहुंचता है। महुआडांड़ की महिला मेटों ने यह दिखा दिया है कि बदलाव की शुरुआत गांव से ही होती है।
आप भी अपने क्षेत्र में योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर नजर रखें, सवाल पूछें और जागरूक नागरिक बनें।
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