#पलामू #आंगनबाड़ीविवाद : पांकी में सेविका सहायिका चयन प्रक्रिया पर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति।
पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत होटाई पंचायत के परहिया टोला आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका-सहायिका नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी और चेरो आदिवासी भैयारी पंचायत के पदाधिकारियों ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने आदिम जनजाति के योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा किए जाने की शिकायत की है। मामले में जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
- पांकी प्रखंड के होटाई पंचायत स्थित परहिया टोला आंगनबाड़ी केंद्र में नियुक्ति को लेकर विवाद।
- सेविका-सहायिका चयन प्रक्रिया में अनियमितता का ग्रामीणों ने लगाया आरोप।
- आदिम जनजाति के योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा का लगाया गया आरोप।
- पिछले तीन वर्षों से बच्चों को पोषाहार नहीं मिलने की ग्रामीणों ने उठाई समस्या।
- अजय सिंह चेरो ने उपायुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की।
पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत होटाई पंचायत के परहिया टोला आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका और सहायिका नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए समाज कल्याण विभाग से जांच की मांग की है।
चयन प्रक्रिया में अनियमितता का लगाया आरोप
भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी एवं चेरो आदिवासी भैयारी पंचायत के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका-सहायिका नियुक्ति के दौरान नियमों की अनदेखी की गई।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र क्षेत्र में आदिम जनजाति समुदाय के योग्य अभ्यर्थी मौजूद थे, लेकिन उनके अधिकारों को नजरअंदाज कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई और योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिला।
तीन वर्षों से पोषाहार योजना प्रभावित होने की शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि परहिया टोला आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित होने के बावजूद पिछले लगभग तीन वर्षों से बच्चों को पोषाहार का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करना है, लेकिन नियुक्ति विवाद के कारण इसका सीधा असर लाभार्थियों पर पड़ रहा है।
आमसभा के निर्णय की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान कई बार आमसभा में लिए गए निर्णयों को नजरअंदाज किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर समुदाय की राय को महत्व दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इसके अलावा विरोध करने वाले लोगों को धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन से जांच और न्याय की मांग
आजाद समाज पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अजय सिंह चेरो ने मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और उपायुक्त पलामू से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिलना चाहिए।
अजय सिंह चेरो ने आदिम जनजाति समुदाय के अधिकारों की रक्षा की मांग करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष कार्रवाई की जताई उम्मीद
मामले को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था सुचारू रूप से चलना बच्चों के भविष्य और पोषण सुरक्षा के लिए जरूरी है।
अब सभी की नजर जिला प्रशासन की ओर है कि शिकायतों के आधार पर किस प्रकार की जांच प्रक्रिया शुरू की जाती है और चयन प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
न्यूज़ देखो: पारदर्शी चयन प्रक्रिया से ही मजबूत होगा विश्वास
परहिया टोला आंगनबाड़ी नियुक्ति विवाद सरकारी योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता की आवश्यकता को सामने लाता है। आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए सेविका-सहायिका चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप होना जरूरी है।
यदि ग्रामीणों की शिकायतों में तथ्य हैं तो प्रशासन को समयबद्ध जांच कर उचित समाधान निकालना चाहिए। वहीं बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना भी उचित नहीं होगा।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट होती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक समाज जरूरी
सरकारी योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे, इसके लिए जागरूक नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। किसी भी योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सामने लाना बदलाव की पहली सीढ़ी है। अपनी आवाज शांतिपूर्ण तरीके से उठाएं और विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाएं।
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