
#कोलेबिरा #उर्स_कार्यक्रम : पीर बाबा दरगाह में दुआओं संग तालीम संदेश।
कोलेबिरा थाना परिसर स्थित हजरत शुफीशाह क्यामुद्दीन दाता अंजान शाह रहमतुल्लाह अलेह पीर बाबा की दरगाह पर उर्स के अवसर पर श्रद्धा और अकीदत के साथ कुरान खानी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उर्स कमिटी के अध्यक्ष अशोक इंदवार के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। इस मौके पर मुल्क और समाज की सलामती की दुआ मांगी गई तथा बच्चों के बीच शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया गया। आयोजन ने अमन, भाईचारे और तालीम के महत्व का संदेश दिया।
- कोलेबिरा थाना परिसर स्थित दरगाह में उर्स पर विशेष आयोजन।
- अशोक इंदवार के नेतृत्व में उर्स कमिटी ने कार्यक्रम संपन्न कराया।
- बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने की शिरकत।
- बच्चों को कॉपी, कलम और अंगवस्त्र का वितरण।
- मुल्क और समाज की सलामती के लिए की गई दुआएं।
कोलेबिरा थाना परिसर स्थित हजरत शुफीशाह क्यामुद्दीन दाता अंजान शाह रहमतुल्लाह अलेह पीर बाबा की दरगाह पर उर्स के पावन अवसर पर धार्मिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं की मौजूदगी में कुरान खानी का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का संचालन उर्स कमिटी के अध्यक्ष अशोक इंदवार के नेतृत्व में किया गया। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि समाज में अमन और शिक्षा का संदेश देना भी रहा।
दरगाह में गूंजती रहीं दुआएं और इबादत की स्वर लहरियां
उर्स के मौके पर सुबह से ही दरगाह परिसर में अकीदतमंदों की आवाजाही शुरू हो गई थी। कुरान खानी के दौरान मुल्क और कौम की सलामती, समाज में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। श्रद्धालुओं ने पीर बाबा की शिक्षाओं को याद करते हुए उनकी रहमत हासिल करने की प्रार्थना की।
धार्मिक कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर रहा। उपस्थित लोगों ने बताया कि उर्स केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल और इंसानियत का पैगाम देने का अवसर है।
उर्स कमिटी की पहल से बच्चों को मिला तालीम का तोहफा
इस मुबारक अवसर पर उर्स कमिटी की ओर से बच्चों के बीच कॉपी, कलम और अंगवस्त्र का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना था।
उर्स कमिटी के अध्यक्ष अशोक इंदवार ने कहा:
अशोक इंदवार ने कहा: “तालीम ही तरक्की का सबसे मजबूत जरिया है। बच्चों को शिक्षित करना ही असली खिदमत है और यही समाज की सबसे बड़ी सेवा है।”
उन्होंने आगे बताया कि पीर बाबा की शिक्षाएं खिदमत-ए-ख़ल्क़ यानी मानव सेवा पर आधारित रही हैं, और कमिटी उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
खिदमत और भाईचारे की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
उर्स कमिटी के सदस्यों ने सामूहिक रूप से यह संदेश दिया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी कदम बढ़ाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने समाज में आपसी सौहार्द, प्रेम और खुशहाली की कामना की। लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दरगाह परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही और सभी ने अनुशासन व श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। स्थानीय स्तर पर यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण बनकर सामने आया।
न्यूज़ देखो: उर्स के बहाने तालीम और इंसानियत का संदेश
कोलेबिरा में आयोजित यह उर्स कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। बच्चों के बीच शैक्षणिक सामग्री वितरण जैसी पहल यह दर्शाती है कि परंपराएं तब सार्थक होती हैं जब वे समाज को आगे बढ़ाने का माध्यम बनें। उर्स कमिटी ने जिस तरह खिदमत और तालीम को साथ जोड़ा, वह सराहनीय है। अब देखना होगा कि ऐसी पहलें नियमित रूप से जारी रहती हैं या नहीं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जिम्मेदारी निभाएं तालीम और भाईचारे को दें नई दिशा
उर्स जैसे पावन अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं। यदि हर आयोजन में शिक्षा और मानव सेवा का तत्व जोड़ा जाए तो समाज की तस्वीर बदल सकती है।
बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना, जरूरतमंदों की मदद करना और आपसी सद्भाव बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आज संकल्प लें कि अपने आसपास कम से कम एक बच्चे की शिक्षा में योगदान देंगे।
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