News dekho specials
Latehar

रेलवे लाइन ने तोड़ा भंडारगढ़ा का संपर्क, अंडरपास के अभाव में खटिया पर ढोए जा रहे मरीज

#चंदवा #ग्रामीण_संकट : रेलवे लाइन के कारण भंडारगढ़ा गांव आज भी एम्बुलेंस सुविधा से वंचित।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत रेलवे लाइन पार बसे भंडारगढ़ा गांव में आज भी अंडरपास नहीं होने से ग्रामीणों का जीवन संकट में है। आपात स्थिति में एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को खटिया या डोली पर रेलवे लाइन पार कराना पड़ता है। सोमवार को एक बीमार ग्रामीण को इसी तरह जान जोखिम में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया। वर्षों से चली आ रही इस समस्या पर अब तक प्रशासन और रेलवे की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • भंडारगढ़ा गांव रेलवे लाइन पार होने के कारण बुनियादी संपर्क से कटा।
  • आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती।
  • मरीजों को खटिया पर रेलवे लाइन पार कराना ग्रामीणों की मजबूरी।
  • गोइंदा गंझु की तबीयत बिगड़ने पर सामने आई गंभीर स्थिति।
  • ग्रामीणों ने अंडरपास निर्माण की वर्षों पुरानी मांग दोहराई।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत रेलवे लाइन पार बसे भंडारगढ़ा गांव के ग्रामीण आज भी बुनियादी आवागमन सुविधा से वंचित हैं। गांव और मुख्य सड़क के बीच रेलवे लाइन एक ऐसी दीवार बन चुकी है, जिसने न सिर्फ आवागमन बल्कि आपात स्वास्थ्य सेवाओं को भी लगभग असंभव बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना यहां किसी परीक्षा से कम नहीं है।

सोमवार को इस समस्या का एक बार फिर दर्दनाक उदाहरण सामने आया, जब ग्राम भुसाढ़ के भंडारगढ़ा गांव निवासी गोइंदा गंझु की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को सूचना दी, लेकिन गांव तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता नहीं होने के कारण एम्बुलेंस रेलवे लाइन के इस पार ही रुक गई।

रेलवे लाइन के कारण अधूरा रास्ता

एम्बुलेंस टोरी जंक्शन के पूर्वी छोर, टोरी–महुआमिलान स्टेशन के बीच रेलवे पोल संख्या 182/28 और 182/29 के पास खड़ी रह गई। इसके बाद ग्रामीणों के पास कोई विकल्प नहीं बचा। उन्होंने खटिया का इंतजाम किया और मरीज को उस पर लिटाकर रेलवे लाइन पार कराया। यह पूरा दृश्य न सिर्फ भयावह था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण किस तरह हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर जीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इसी तरह रेलवे लाइन पार कराकर अस्पताल पहुंचाया गया है। हर बार यह डर बना रहता है कि कहीं कोई ट्रेन न आ जाए और बड़ा हादसा न हो जाए।

चारों ओर रेलवे लाइन से घिरा गांव

भंडारगढ़ा गांव चारों ओर से रेलवे लाइन से घिरा हुआ है। गांव का कोई सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता नहीं है, जिससे सीधे सड़क या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा जा सके। रोजमर्रा की जिंदगी में भी ग्रामीणों को स्कूल, बाजार, कॉलेज या काम के लिए रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए यह खतरा बना रहता है।

बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के मौसम में गांव एक तरह से टापू में तब्दील हो जाता है। कच्चे रास्ते और फिसलन भरी पटरी पार करना जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन मजबूरी में ग्रामीणों को यही करना पड़ता है।

वर्षों पुरानी मांग, अब तक सिर्फ आश्वासन

पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने बताया कि जब रेलवे लाइन का विस्तार किया गया था, तब ग्रामीणों को उम्मीद थी कि यहां अंडरपास या अंडरब्रिज का निर्माण किया जाएगा। लेकिन यह उम्मीद अब तक अधूरी ही है। उन्होंने कहा कि परसाही–भंडारगढ़ा के बीच यही एकमात्र रास्ता है, जिसका उपयोग आजादी से पहले से आसपास के कई गांवों के सैकड़ों लोग पैदल आवागमन के लिए करते आ रहे हैं।

News dekho specials

अयुब खान ने कहा कि यह मार्ग स्कूल, कॉलेज, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़ने का एकमात्र साधन रहा है। रेलवे लाइन बनने के बाद यह रास्ता और भी खतरनाक हो गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

धरना, ज्ञापन और फिर भी समाधान नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर वे कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। जमीन पर कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ।

पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने इस बार सीधे रेलवे के जीएम और धनबाद डीआरएम से इस स्थान पर शीघ्र अंडरपास निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों की पीड़ा और प्रशासन की जिम्मेदारी

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसे गांव हैं, जहां एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण जीवन की असुरक्षा को भी उजागर करती है।

लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर किसी दिन ट्रेन की चपेट में आकर कोई ग्रामीण या मरीज घायल हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उनका कहना है कि अंडरपास कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन रक्षक आवश्यकता है।

न्यूज़ देखो: विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत

भंडारगढ़ा गांव की यह तस्वीर बताती है कि बुनियादी ढांचे के बिना विकास अधूरा है। रेलवे और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर चुका रहे हैं। अब देखना होगा कि अंडरपास निर्माण की मांग पर कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जीवन की राह सुरक्षित बनाना जरूरी

रेलवे लाइन के इस पार बसे गांवों की आवाज अब अनसुनी नहीं रहनी चाहिए। आप क्या मानते हैं, अंडरपास निर्माण में देरी की जिम्मेदारी किसकी है? अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और ग्रामीणों की इस पीड़ा को प्रशासन तक पहुंचाने में सहयोग करें।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

Related News

Back to top button
error: