रैयत विस्थापित मोर्चा ने 25 जून को खलारी बंद का किया ऐलान: 24 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन तेज

रैयत विस्थापित मोर्चा ने 25 जून को खलारी बंद का किया ऐलान: 24 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन तेज

author Jitendra Giri
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#रांची #रैयतआंदोलन : नौकरी मुआवजा और पुनर्वास मांगों को लेकर मोर्चा ने बंदी की घोषणा की।

रैयत विस्थापित मोर्चा ने 24 सूत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में 25 जून को एक दिवसीय बंदी का आह्वान किया है। खलारी में आयोजित बैठक में मोर्चा अध्यक्ष बिगन भोगता ने सीसीएल प्रबंधन पर रैयतों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया। मोर्चा ने नौकरी, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। बैठक में कई रैयत प्रतिनिधि और सदस्य उपस्थित रहे।

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  • रैयत विस्थापित मोर्चा ने 25 जून को एक दिवसीय बंदी का किया ऐलान।
  • 24 सूत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से रैयतों में बढ़ा आक्रोश।
  • बिगन भोगता ने सीसीएल प्रबंधन पर मांगों की अनदेखी का लगाया आरोप।
  • नौकरी, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
  • बैठक में बिनय कुमार खलखो, जालिम सिंह सहित कई सदस्य रहे मौजूद।

खलारी, रांची में रैयत विस्थापित मोर्चा की बैठक रविवार को आयोजित की गई। बैठक में एनके एरिया की परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों और विस्थापितों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष बिगन भोगता ने की, जबकि संचालन रामलखन गंझू ने किया।

बैठक में मांगों के समाधान में देरी को लेकर नाराजगी जताई गई और आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में मोर्चा ने आगामी 25 जून को एक दिवसीय बंदी का आह्वान किया है।

24 सूत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी

बैठक को संबोधित करते हुए मोर्चा अध्यक्ष बिगन भोगता ने कहा कि एनके एरिया की सभी परियोजनाओं के विस्तार में स्थानीय रैयतों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके बावजूद रैयतों और विस्थापितों से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 19 सितंबर 2025 को रैयत विस्थापित मोर्चा की ओर से धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सीसीएल प्रबंधन को 24 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया था।

इस मांग पत्र में नौकरी, मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, डीएमएफटी और सीएसआर से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी। मांगों को लेकर प्रबंधन के साथ वार्ता भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने की बात मोर्चा ने कही है।

नौ माह बाद भी समाधान नहीं होने का आरोप

मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि मांग पत्र सौंपे जाने के करीब नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन रैयतों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि इससे रैयतों और विस्थापितों में असंतोष बढ़ रहा है। इसी कारण मोर्चा ने आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि रैयतों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए संगठन आगे भी संघर्ष जारी रखेगा।

पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की सहमति की मांग

बैठक में एनके एरिया में होने वाले सभी ठेकेदारी कार्यों को लेकर भी चर्चा की गई। मोर्चा ने मांग की कि सभी ठेकेदारी कार्य पेसा कानून के प्रावधानों के अनुसार ग्राम सभा की सहमति के बाद ही कराए जाएं।

मोर्चा के अनुसार यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, इसलिए स्थानीय ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा संगठन ने सीसीएल प्रबंधन से मांग की कि ठेकेदारी कार्यों की निविदा प्रक्रिया में 15 प्रतिशत से अधिक बिलो (Below) दर पर काम लेने वाले संवेदकों की विजिलेंस जांच कराई जाए।

मोर्चा का कहना है कि इससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।

बैठक में कई सदस्य रहे उपस्थित

बैठक में संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। इनमें बिनय कुमार खलखो, जालिम सिंह, अमृत भोगता, आदेश गंझू, नरेश गंझू, प्रभाकर गंझू, राजेंद्र उरांव, विनय उरांव, रोहित गंझू और अरविंद कुमार सहित अन्य लोग शामिल थे।

सभी सदस्यों ने रैयतों और विस्थापितों से जुड़े मुद्दों को लेकर एकजुट होकर संघर्ष करने की बात कही।

न्यूज़ देखो: विस्थापन के मुद्दों पर बढ़ता असंतोष और समाधान की चुनौती

रैयत विस्थापित मोर्चा की बंदी घोषणा सीसीएल परियोजनाओं से जुड़े स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को सामने लाती है। विकास परियोजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनके पुनर्वास से जुड़े मुद्दे हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। प्रशासन और प्रबंधन के लिए जरूरी है कि संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। अब देखना होगा कि 25 जून की बंदी के बाद प्रबंधन और मोर्चा के बीच आगे की बातचीत किस दिशा में जाती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की आवाज को संवाद से मिले समाधान की राह

विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाना किसी भी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होता है। रैयतों और विस्थापितों की समस्याओं का समय पर समाधान सामाजिक विश्वास को मजबूत करता है।

जनहित से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण संवाद और प्रभावी कार्रवाई ही स्थायी समाधान का रास्ता तैयार कर सकती है। सभी पक्षों को मिलकर क्षेत्र के विकास और लोगों के अधिकारों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा।

आप भी अपने क्षेत्र के जनहित से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहें। खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में बताएं और सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।

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Written by

खलारी, रांची

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