Editorial

राकेश शर्मा भारत का वह सितारा जिसने अंतरिक्ष से देश को देखा और भारत को वैश्विक पहचान दिलाई

#अंतरिक्ष_इतिहास : भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की जयंती पर उनके जीवन, साहस और राष्ट्रगौरव की स्मरण यात्रा
  • राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री।
  • 3 अप्रैल 1984 को सोयूज टी-11 से अंतरिक्ष यात्रा।
  • अंतरिक्ष से भारत को बताया “सारे जहाँ से अच्छा”
  • अशोक चक्र से सम्मानित एकमात्र भारतीय अंतरिक्ष यात्री।
  • युवाओं के लिए अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा का प्रेरक उदाहरण।

भारतीय विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और राष्ट्रीय गौरव के इतिहास में राकेश शर्मा का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वे केवल भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री नहीं हैं, बल्कि उस आत्मविश्वास के प्रतीक हैं जिसने एक विकासशील देश को यह विश्वास दिलाया कि वह भी अंतरिक्ष की असीम सीमाओं को छू सकता है। उनकी जयंती पर राकेश शर्मा को स्मरण करना दरअसल उस दौर को याद करना है, जब भारत ने वैज्ञानिक आकांक्षाओं को राष्ट्रीय संकल्प में बदला।

साधारण शुरुआत, असाधारण उड़ान

राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में प्रवेश लिया और भारतीय वायुसेना के लड़ाकू पायलट बने। अनुशासन, साहस और तकनीकी दक्षता—ये गुण उन्हें शुरू से अलग पहचान देते थे। एक फाइटर पायलट के रूप में उन्होंने अनेक उन्नत विमानों पर उड़ान भरी और यही अनुभव आगे चलकर उन्हें अंतरिक्ष यात्रा के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाता है।

1970 और 80 के दशक में भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपने पांव जमा रहा था। इसी दौरान सोवियत संघ के साथ हुए सहयोग के तहत भारतीय वायुसेना से कुछ पायलटों का चयन अंतरिक्ष प्रशिक्षण के लिए किया गया। कठोर चयन प्रक्रिया के बाद राकेश शर्मा को इस ऐतिहासिक मिशन के लिए चुना गया।

कठिन प्रशिक्षण और ऐतिहासिक चयन

उन्होंने रूस के स्टार सिटी में लंबा और कठिन प्रशिक्षण लिया—जहाँ शून्य गुरुत्वाकर्षण, सीमित संसाधन और मानसिक-शारीरिक सहनशीलता की कठोर परीक्षाएँ थीं। इस प्रशिक्षण ने उन्हें न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाया, बल्कि मानसिक रूप से भी एक अंतरिक्ष यात्री के स्तर पर तैयार किया।

सोयूज टी-11 और अंतरिक्ष इतिहास

3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा ने सोयूज टी-11 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी और साल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे। वे अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। यह केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था।

इस मिशन के दौरान राकेश शर्मा ने पृथ्वी अवलोकन, जैव-चिकित्सीय प्रयोग और भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित कई प्रयोगों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने अंतरिक्ष से भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का अध्ययन किया, जिसका उपयोग बाद में वैज्ञानिक अनुसंधान में हुआ।

“सारे जहाँ से अच्छा” — एक अमर क्षण

राकेश शर्मा की यात्रा का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा—

“अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?”

राकेश शर्मा का उत्तर था—

“सारे जहाँ से अच्छा।”

यह उत्तर मात्र एक वाक्य नहीं था; यह भारत की आत्मा, उसकी सभ्यता और उसकी संभावनाओं का घोष था। यह संवाद आज भी हर भारतीय के मन में गर्व की अनुभूति कराता है।

सम्मान, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण

11 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें भारत सरकार ने अशोक चक्र से सम्मानित किया—जो किसी अंतरिक्ष यात्री को दिया गया देश का सर्वोच्च वीरता सम्मान है।

इसके बाद भी उन्होंने देश की सेवा जारी रखी। भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद राकेश शर्मा ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्वदेशी विमानन परियोजनाओं में योगदान दिया।

आज के भारत के लिए संदेश

आज जब भारत अपने गगनयान मिशन और अंतरिक्ष में मानव उड़ान की नई तैयारियों में जुटा है, राकेश शर्मा की भूमिका और भी प्रासंगिक हो जाती है। वे उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस किया।

युवा पीढ़ी के लिए उनका जीवन यह संदेश देता है कि—अनुशासन, निरंतर परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

राष्ट्रगौरव का स्थायी प्रतीक

राकेश शर्मा ने कभी स्वयं को नायक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया। उनकी सादगी, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। वे यह याद दिलाते हैं कि सच्चा गौरव प्रचार में नहीं, बल्कि कर्म में होता है।

उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का भी दिन है कि भारत विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बने। राकेश शर्मा का जीवन एक उड़ान है—जो धरती से शुरू होकर अंतरिक्ष तक जाती है और फिर राष्ट्रसेवा में लौट आती है। वे उस भारत का चेहरा हैं जो आत्मविश्वासी है, जिज्ञासु है और भविष्य की ओर निडर होकर देखता है।

न्यूज़ देखो: अंतरिक्ष से आत्मविश्वास तक

राकेश शर्मा की यात्रा भारत की वैज्ञानिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मबल का प्रतीक है। उनका जीवन यह साबित करता है कि भारतीय प्रतिभा वैश्विक मंच पर नेतृत्व कर सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

स्मरण नहीं, संकल्प का दिन

राकेश शर्मा की जयंती पर यह लेख पढ़ने वाले हर युवा से यही आह्वान है—
बड़े सपने देखें, कठिन परिश्रम करें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
इस प्रेरक कहानी को साझा करें और भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री को नमन करें।

Guest Author
वरुण कुमार

वरुण कुमार

बिष्टुपुर, जमशेदपुर

वरुण कुमार, कवि और लेखक: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर के सदस्य हैं।

यह आलेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों पर आधारित है और NewsDekho के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

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