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रांची: बरियातू रोड पर अस्पतालों के बाहर जाम का जंजाल, मरीजों की जान पर बन रही है बात

#रांची #बरियातूरोडजाम : पल्स हॉस्पिटल समेत कई निजी अस्पतालों की लापरवाही से मेडिकल हब बना बरियातू रोड बना ‘ट्रैफिक ब्लैकस्पॉट’—गोल्डेन ऑवर में भी नहीं पहुंच पा रही एंबुलेंस
  • बरियातू रोड पर रिम्स समेत कई हॉस्पिटल, लेकिन नहीं है समुचित पार्किंग व्यवस्था
  • पल्स हॉस्पिटल में पार्किंग न होने से मरीज और स्टाफ अपनी गाड़ियां नो-पार्किंग में लगाते हैं
  • एंबुलेंस फंसी रहती है जाम में, गोल्डेन ऑवर में मरीजों की जान पर बन आती है
  • नगर निगम की अनदेखी से अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की भरमार
  • स्थानीय लोगों ने की सख्त कार्रवाई की मांग—’ऐसे हॉस्पिटल का नक्शा पास नहीं होना चाहिए’

मेडिकल हब बरियातू रोड पर ट्रैफिक की त्रासदी

राजधानी रांची की बरियातू रोड, जहां राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स स्थित है, वहां आज यातायात की स्थिति बदतर हो चुकी है। दिन भर इस सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है, और इस भीड़-भाड़ के पीछे सबसे बड़ा कारण हैं प्राइवेट हॉस्पिटल्स की लापरवाहियां, खासकर पल्स हॉस्पिटल, जहां खुद की पार्किंग सुविधा तक नहीं है।

पार्किंग नहीं, सिर्फ ऊंची बिल्डिंग

पल्स हॉस्पिटल, जो एक सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल है, ने मरीजों के इलाज के लिए भले आधुनिक उपकरण लगाए हों, लेकिन वाहनों की पार्किंग के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं की। नतीजा—डॉक्टर्स की गाड़ियों को छोड़कर मरीज, स्टाफ और परिजन सब अपनी गाड़ियां सड़क पर खड़ी करते हैं, वो भी नो-पार्किंग जोन में। ऐसे में जब मरीज इमरजेंसी में पहुंचता है, तो उसे हॉस्पिटल के दरवाजे तक पहुंचना भी एक संकट से कम नहीं होता।

जाम में फंसी एंबुलेंस, गई जानें

बरियातू रोड पर अक्सर एंबुलेंस की सायरन सुनाई देती है, लेकिन यह सायरन जाम में फंसकर गोल्डेन आवर बर्बाद कर देती है। डॉक्टरों के मुताबिक किसी भी गंभीर मरीज के लिए पहले 60 मिनट जीवन रक्षक होते हैं, लेकिन जब मरीज अस्पताल ही नहीं पहुंच पाता, तो इलाज का सवाल ही नहीं उठता। कई मामले ऐसे सामने आए हैं जहां एंबुलेंस रिम्स के सामने जाम में फंसी और मरीज की मौत हो गई।

नगर निगम की चुप्पी, अतिक्रमण से चौड़ी सड़क बनी तंग

शहर में नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करने पर सामान्यतः फौरन कार्रवाई होती है, लेकिन प्राइवेट हॉस्पिटल के बाहर नगर निगम की कार्रवाई गायब है। पल्स हॉस्पिटल के पास सड़क पर ही दुकानें, ठेले और अवैध पार्किंग ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। रिम्स से पल्स हॉस्पिटल के बीच ई-रिक्शा, ऑटो, ठेला और बाइक—सभी ने अवैध स्टैंड बना रखा है, जिससे सड़क की चौड़ाई घट गई है और जाम स्थायी समस्या बन चुकी है।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

रूपेश ने कहा: “हॉस्पिटल में पार्किंग नहीं होने से लोग मजबूरी में सड़क पर गाड़ी लगाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को होती है। इस समस्या से निजात मिलनी चाहिए।”

गुड्डू ने कहा: “जिन हॉस्पिटल में पार्किंग नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे हॉस्पिटल का तो नक्शा ही पास नहीं होना चाहिए।”

न्यूज़ देखो: चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारी से भागना अपराध के बराबर

बरियातू रोड जैसी जगह, जहां एक ओर राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल हो और दूसरी ओर सुपरस्पेशियलिटी प्राइवेट हॉस्पिटल, वहां पर सड़क की स्थिति ऐसी हो जो मरीज की जान ले ले, यह शहरी व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता है। ‘न्यूज़ देखो’ पूछता है—क्या हॉस्पिटल सिर्फ मुनाफे के लिए हैं या मरीजों की जान बचाने के लिए भी जिम्मेदार?

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जागरूक नागरिक ही बेहतर शहर बना सकते हैं

शहर की समस्याओं को केवल प्रशासन की गलती मानना काफी नहीं है। हमें भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा, आवाज उठानी होगी और ऐसी व्यवस्था के खिलाफ संगठित होना होगा जो जनहित की जगह सिर्फ कारोबार को प्राथमिकता देती है।

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