
#ठेठईटांगर #सिमडेगा #नागरिक_पहल : समाजसेवी की पहल पर एनएच 143 किनारे यात्री शेड की व्यवस्था सुधरी।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में एनएच 143 के किनारे स्थित यात्री शेड की बदहाल स्थिति का समाधान हो गया है। लंबे समय से यात्रियों को हो रही परेशानी को समाजसेवी दीपक लकड़ा ने गंभीरता से उठाया था। उनकी पहल के बाद संबंधित विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैठने की समुचित व्यवस्था बहाल की। इससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है।
- एनएच 143 पर बने यात्री शेड की स्थिति लंबे समय से थी जर्जर।
- समाजसेवी दीपक लकड़ा ने यात्रियों की समस्या को विभाग के समक्ष उठाया।
- संबंधित विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यवस्था दुरुस्त की।
- स्थानीय लोगों और यात्रियों ने जताया संतोष और आभार।
- पहल को बताया गया सकारात्मक नागरिक हस्तक्षेप का उदाहरण।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड मुख्यालय के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 143 के किनारे स्थित यात्री शेड लंबे समय से बदहाल स्थिति में था। बारिश, धूप और ठंड के मौसम में बस या अन्य साधनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शेड में बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खास तौर पर दिक्कतें झेलनी पड़ रही थीं। यह समस्या धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गई थी।
लंबे समय से उपेक्षा का शिकार था यात्री शेड
स्थानीय लोगों के अनुसार, एनएच 143 एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिससे होकर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री, छात्र, मजदूर और व्यवसायी आवाजाही करते हैं। इसके बावजूद प्रखंड के समीप बना यात्री शेड कई महीनों से उपेक्षा का शिकार था। शेड की छत और बैठने की व्यवस्था जर्जर हो चुकी थी, जिससे वहां रुकना भी असुरक्षित महसूस होता था।
यात्रियों का कहना था कि बारिश के दिनों में पानी टपकने से शेड बेकार साबित हो रहा था, जबकि गर्मी में धूप से बचने का भी कोई ठोस इंतजाम नहीं था। कई बार इस समस्या को लेकर मौखिक शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हो पाई।
समाजसेवी दीपक लकड़ा ने उठाई आवाज
इस स्थिति को देखते हुए समाजसेवी दीपक लकड़ा ने यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बदहाली पर नाराजगी जताई और संबंधित विभाग से शीघ्र सुधार की मांग की। दीपक लकड़ा का कहना था कि यह केवल सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित यात्री शेड की ऐसी हालत न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि आम जनता के प्रति असंवेदनशीलता भी उजागर करती है। उनकी स्पष्ट और तथ्यात्मक मांग ने इस मुद्दे को प्राथमिकता में ला दिया।
विभाग की त्वरित कार्रवाई से बदली तस्वीर
समाजसेवी की पहल के बाद संबंधित विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और त्वरित कार्रवाई शुरू की। कुछ ही समय में यात्री शेड की साफ-सफाई कराई गई और यात्रियों के बैठने के लिए उचित एवं व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। अब शेड में बैठने की सुविधा बहाल हो चुकी है, जिससे यात्रियों को बस या अन्य वाहनों का इंतजार करने में सहूलियत मिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां यात्री शेड से लोग दूरी बनाते थे, वहीं अब सुधार के बाद वहां रुकना सुविधाजनक हो गया है। यह बदलाव प्रशासनिक तत्परता और नागरिक पहल के समन्वय का अच्छा उदाहरण माना जा रहा है।
यात्रियों और स्थानीय लोगों में संतोष
यात्री शेड की स्थिति सुधरने के बाद स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों में संतोष का माहौल है। लोगों ने समाजसेवी दीपक लकड़ा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि या समाजसेवी इस तरह से आम जनता की समस्याओं को ईमानदारी से उठाए, तो समाधान संभव है।
एक स्थानीय यात्री ने बताया कि रोजाना काम के सिलसिले में बस का इंतजार करना पड़ता है। पहले खड़े रहना मजबूरी थी, लेकिन अब बैठने की सुविधा मिलने से राहत मिली है। बुजुर्ग यात्रियों ने भी इसे एक जरूरी और सराहनीय कदम बताया।
नागरिक पहल से प्रशासन को मिला संदेश
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि जब नागरिक स्तर पर जिम्मेदारी निभाई जाती है, तो प्रशासन भी सक्रिय होता है। दीपक लकड़ा की पहल ने न केवल एक समस्या का समाधान कराया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि छोटी-छोटी सुविधाएं भी आम लोगों के जीवन में बड़ा फर्क ला सकती हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इसी तरह अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता पर भी सामूहिक प्रयास किए जाएं, तो क्षेत्र का समग्र विकास संभव है।
न्यूज़ देखो: नागरिक पहल से बदली व्यवस्था
एनएच 143 पर यात्री शेड की समस्या का समाधान यह दिखाता है कि जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने पर परिणाम मिलते हैं। यह पहल प्रशासन और समाज के बीच संवाद को मजबूत करती है। अब जरूरत है कि ऐसी सुविधाओं का नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
छोटी पहल, बड़ा बदलाव
सुविधाएं तभी बेहतर होती हैं जब आवाज उठाई जाती है।
यह उदाहरण बताता है कि जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की नींव हैं।
अपने आसपास की समस्याओं पर ध्यान दें और जिम्मेदारी निभाएं।
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