गोर्रा गांव में 26वीं जुबली जतरा पर मनिसाय राजा को श्रद्धांजलि पेसा अधिकारों पर जागरूकता का संदेश

गोर्रा गांव में 26वीं जुबली जतरा पर मनिसाय राजा को श्रद्धांजलि पेसा अधिकारों पर जागरूकता का संदेश

author Shivnandan Baraik
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#बानो #सिमडेगा #जुबली_जतरा : गोर्रा गांव में मनिसाय राजा की 26वीं जुबली जतरा पर सांस्कृतिक आयोजन।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित गोर्रा गांव में मनिसाय राजा की 26वीं जुबली जतरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख सुधीर डांग और जिला परिषद बिरजो कंडुलना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान पेसा कानून, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर दिया गया। मनिसाय राजा की स्मृति में पत्थलगड़ी कर शिलापट्ट स्थापित किया गया।

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  • गोर्रा गांव (बानो प्रखंड) में 26वीं जुबली जतरा आयोजित।
  • मुख्य अतिथि सुधीर डांग, विशिष्ट अतिथि बिरजो कंडुलना
  • पेसा कानून और शिक्षा पर दिया गया विशेष संदेश।
  • जादूर और लहसुवा नृत्य का आकर्षक प्रदर्शन।
  • मनिसाय राजा की स्मृति में पत्थलगड़ी व शिलापट्ट स्थापना

सिमडेगा जिला अंतर्गत बानो प्रखंड के ग्राम गोर्रा में मनिसाय राजा की 26 वर्षीय जुबली जतरा हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ आयोजित की गई। कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रमुखों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से पूर्वजों को याद किया गया तथा समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया गया।

अतिथियों का पारंपरिक स्वागत

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बानो प्रमुख सुधीर डांग तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद बिरजो कंडुलना उपस्थित रहे। आयोजन से पूर्व सभी अतिथियों को पारंपरिक नृत्य और गीत के साथ मंच तक लाया गया, जिससे पूरे वातावरण में उत्सव का रंग भर गया।

जादूर और लहसुवा नृत्य की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

पेसा कानून और समाज के अधिकारों पर चर्चा

मुख्य अतिथि सुधीर डांग ने अपने संबोधन में पेसा कानून के तहत आदिवासी समाज को प्राप्त अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा:

“पेसा कानून के माध्यम से हमारे समाज को कई महत्वपूर्ण अधिकार मिले हैं। हमें अपने अधिकारों को समझना और उनका सही उपयोग करना चाहिए।”

उन्होंने ग्रामीणों से संगठित रहने और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनने का आह्वान किया।

शिक्षा और संस्कृति पर जोर

जिला परिषद बिरजो कंडुलना ने कहा:

“आज भी अपने पूर्वजों को याद करना आवश्यक है। आदिवासी समाज के विकास के लिए शिक्षा जरूरी है। अपने बच्चों को अवश्य विद्यालय भेजें और अपनी संस्कृति को बचाकर रखें।”

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान पीढ़ी शहरों की चकाचौंध में अपनी जड़ों को भूलती जा रही है। ऐसे आयोजनों से समाज को अपनी परंपराओं और पहचान की याद दिलाई जाती है।

पत्थलगड़ी और शिलापट्ट स्थापना

कार्यक्रम के दौरान मनिसाय राजा की स्मृति में पत्थलगड़ी (शिलापट्ट) की स्थापना की गई। विभिन्न क्षेत्रों से आए पहानों द्वारा विधिवत भूमि पूजन किया गया। शिलापट्ट पर अभिमंत्रित जल छिड़ककर उसे स्थापित किया गया।

यह अनुष्ठान समाज की परंपराओं और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

संचालन और उपस्थिति

कार्यक्रम का संचालन ग्राम प्रधान शांतिएल हेमरोम ने किया। आयोजन में पहान राजा निर्मल हेमरोम, पाठ गोमके नोएल सहित अन्य गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने एकजुट होकर आयोजन को सफल बनाया और सामुदायिक एकता का परिचय दिया।

न्यूज़ देखो: संस्कृति और अधिकारों की जागरूकता का संगम

गोर्रा गांव में आयोजित जुबली जतरा केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का मंच भी बना। पेसा कानून, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण पर दिए गए संदेश इस आयोजन को और सार्थक बनाते हैं। ऐसे कार्यक्रम समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने और अधिकारों के प्रति सजग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति और अधिकारों को समझें

समाज की मजबूती उसकी परंपराओं और जागरूकता में निहित है।
अपने अधिकारों को जानें, बच्चों को शिक्षित करें और संस्कृति को संरक्षित रखें।
पूर्वजों की विरासत हमें पहचान देती है, इसे सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी है।
आप भी अपने गांव के ऐसे आयोजनों की जानकारी साझा करें।
इस खबर को साझा करें और जागरूकता का संदेश आगे बढ़ाएं।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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