News dekho specials
Gumla

15 वर्षों से सड़क की बाट जोह रहा रेंगारी गांव, अब ग्रामीण चंदा कर बना रहे रास्ता—प्रशासनिक उदासीनता उजागर

#जारी #सड़क_संकट : विकास के दावों के बीच ग्रामीण मजबूरी में खुद बना रहे हैं आवागमन का रास्ता।

गुमला जिले के जारी प्रखंड में रेंगारी गांव को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क पिछले 15 वर्षों से सिर्फ आश्वासनों तक सीमित है। लगभग 5.5 किलोमीटर लंबी सड़क के अभाव में ग्रामीणों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर बार-बार आवेदन के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं होने से आक्रोश बढ़ता गया। अंततः मजबूरी में ग्रामीणों ने आपसी चंदा कर कच्चा रास्ता बनाना शुरू कर दिया है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • रेंगारी गांव को जोड़ने वाली 5.5 किमी सड़क 15 वर्षों से लंबित।
  • प्रखंड विकास पदाधिकारी, उपायुक्त और विधायक को दिए गए कई आवेदन बेअसर।
  • बरसात में मरीज, छात्र और ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित।
  • ग्रामीणों ने आपसी चंदा और ट्रैक्टर से कच्चा रास्ता बनाना शुरू किया।
  • सड़क संकट ने प्रशासनिक संवेदनहीनता पर सवाल खड़े किए।
  • ग्रामीणों ने पक्की सड़क निर्माण की फिर से मांग उठाई।

जारी प्रखंड अंतर्गत रेंगारी गांव की स्थिति आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव को दर्शाती है। प्रखंड मुख्यालय से गांव को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण वर्षों से अधर में लटका हुआ है। विकास के तमाम दावों के बावजूद ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी आज भी कीचड़, जंगलनुमा रास्तों और जोखिम भरे सफर में सिमटी हुई है।

फाइलों में कैद रह गई सड़क योजना

ग्रामीणों के अनुसार करीब 5.5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण की मांग वे पिछले 15 वर्षों से कर रहे हैं। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी, उपायुक्त और स्थानीय विधायक तक को कई बार लिखित आवेदन सौंपे गए। बावजूद इसके न तो किसी स्तर पर स्थल निरीक्षण हुआ और न ही सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने आया।

बरसात में और भयावह हो जाते हैं हालात

सड़क नहीं होने का सबसे ज्यादा असर बरसात के मौसम में देखने को मिलता है। कीचड़ और फिसलन भरे रास्तों से होकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई बार ग्रामीणों को बीमार लोगों को खाट पर लादकर जंगल और कीचड़ से होकर ले जाना पड़ता है। वहीं बच्चों की स्कूल पहुंच और ग्रामीणों की बाजार तक आवाजाही भी बाधित हो जाती है।

प्रशासनिक उदासीनता से टूटा सब्र

लंबे समय तक इंतजार और बार-बार निराशा मिलने के बाद अब ग्रामीणों का सब्र टूटता नजर आ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित ग्रामीणों ने अंततः खुद ही रास्ता बनाने का फैसला लिया। गांव में आपसी चंदा इकट्ठा कर और ट्रैक्टर की मदद से कच्चा रास्ता तैयार किया जा रहा है, ताकि कम से कम पैदल और वाहन से आवागमन संभव हो सके।

मजबूरी में उठाया गया कदम

ग्रामीणों का कहना है कि यह काम किसी शौक या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है। अगर समय रहते प्रशासन ने सड़क निर्माण पर ध्यान दिया होता, तो आज उन्हें अपने सीमित संसाधनों से यह काम नहीं करना पड़ता। ग्रामीणों के अनुसार यह स्थिति विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई को उजागर करती है।

ग्रामीणों की सामूहिक आवाज

इस मुद्दे पर सैमुएल मिंज, यूरेनियस बड़ा, अशोक तिर्की, अनिल बेक, संजीव कुजूर, अरविंद टोप्पो, अमित बेक और जॉन बड़ा सहित कई ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि रेंगारी गांव तक पक्की सड़क का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े।

विकास के दावों पर खड़े होते सवाल

परमबीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का के क्षेत्र से जुड़े इस गांव की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब ग्रामीण खुद सड़क बनाने को मजबूर हो जाएं, तो यह साफ संकेत है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक तंत्र अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है। यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की अनदेखी का प्रतीक बनता जा रहा है।

News dekho specials

न्यूज़ देखो: सड़क नहीं, व्यवस्था की परीक्षा

रेंगारी गांव की यह तस्वीर विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। 15 वर्षों तक सड़क का न बनना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। ग्रामीणों द्वारा चंदे से रास्ता बनाना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस बार ठोस कदम उठाता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संघर्ष नहीं, समाधान चाहिए

सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बुनियाद होती है। रेंगारी गांव के ग्रामीणों का संघर्ष पूरे जिले के लिए चेतावनी है।
अब समय है कि जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत को समझें।
ग्रामीणों की आवाज को अनसुना न किया जाए।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और बुनियादी सुविधाओं की मांग को मजबूती दें।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

News dekho specials


IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...
News dekho specials

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: