
#गुमला #रूद्रपुर #ऐतिहासिक_धरोहर : एएसआई की टीम ने किया स्थल का सर्वेक्षण, वैज्ञानिक खुदाई से मिल सकते हैं महत्वपूर्ण अवशेष
गुमला जिले के जारी प्रखंड स्थित रूद्रपुर गांव में लगभग 1200 वर्ष पुराने ध्वस्त शिव मंदिरों और राजमहलों के अवशेषों पर अब शोध किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने स्थल का दौरा कर प्रारंभिक सर्वेक्षण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां वैज्ञानिक खुदाई होने पर कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य सामने आ सकते हैं।
- रूद्रपुर में प्राचीन शिव मंदिर और राजमहलों के अवशेषों पर होगा शोध
- एएसआई के सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. नीरज कुमार मिश्र ने किया सर्वे
- लगभग 1200 वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं मंदिरों के अवशेष
- वैज्ञानिक खुदाई से मिल सकते हैं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण
- क्षेत्र के इतिहास को उजागर होने की जगी उम्मीद
गुमला जिले के जारी प्रखंड अंतर्गत रूद्रपुर गांव में स्थित लगभग 1200 वर्ष पुराने ध्वस्त शिव मंदिरों और राजमहलों के अवशेषों पर अब शोध किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है।
इस सिलसिले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. नीरज कुमार मिश्र ने स्थल का दौरा कर वहां मौजूद प्राचीन अवशेषों का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया।
खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने लिया संज्ञान
बताया जाता है कि हाल ही में एक स्थानीय अखबार में “रूद्रपुर में हैं कई प्राचीन शिव मंदिर व अनगिनत शिवलिंग” शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी।
खबर सामने आने के बाद पुरातत्व विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और इसके बाद डॉ. नीरज कुमार मिश्र रूद्रपुर गांव पहुंचे। उन्होंने गांव के विभिन्न स्थानों पर मौजूद प्राचीन अवशेषों की जानकारी लेकर उनका निरीक्षण किया।
1200 वर्ष पुराने हो सकते हैं मंदिर
डॉ. मिश्र ने बताया कि उपलब्ध संकेतों के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इन शिव मंदिरों का निर्माण लगभग 1200 वर्ष पूर्व शिव समाज के लोगों द्वारा कराया गया था।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्राचीन शिव मंदिर बहुत कम देखने को मिलते हैं। सर्वेक्षण की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी और यदि यहां वैज्ञानिक खुदाई कराई जाती है तो कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष मिलने की संभावना है।
राजा रूद्रप्रताप सिंह से जुड़ी स्थानीय मान्यता
स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन काल में राजा रूद्रप्रताप सिंह जब इस क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से प्रभावित होकर उन्होंने अपने सेनापतियों को यहां मंदिर और राजमहल बनाने का आदेश दिया था।
बताया जाता है कि मंदिर और राजमहल बनकर तैयार भी हो गए थे और यह क्षेत्र उस समय एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया था।
औरंगजेब के समय ध्वस्त होने की कथा
ग्रामीणों के अनुसार बाद में जब मुगल बादशाह औरंगजेब इस मार्ग से गुजरे, तो उनकी नजर इन मंदिरों और राजमहलों पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने अपने सैनिकों को इन्हें तोड़ने का आदेश दिया, जिसके बाद मंदिर और राजमहल ध्वस्त कर दिए गए।
आज भी रूद्रपुर गांव में प्राचीन ईंट, पत्थर और मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं, जो उस ऐतिहासिक धरोहर की गवाही देते हैं।
न्यूज़ देखो : इतिहास को सहेजने की जरूरत
रूद्रपुर में मौजूद ये प्राचीन अवशेष क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक देते हैं। यदि यहां वैज्ञानिक शोध और खुदाई होती है, तो न केवल गुमला जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
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