
#सिमडेगा #मध्यस्थता_अभियान : राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं संग समीक्षा बैठक आयोजित।
सिमडेगा में राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0 विशेष अभियान को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रधान जिला जज राजीव कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने अभियान की रणनीति पर चर्चा की। यह अभियान 2 जनवरी से 31 मार्च तक संचालित होगा। इसका उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करना है।
- प्रधान जिला जज राजीव कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक।
- अभियान अवधि 2 जनवरी से 31 मार्च तक निर्धारित।
- वैवाहिक, चेक बाउंस, दुर्घटना दावा सहित कई मामले होंगे शामिल।
- सप्ताह के सातों दिन ऑफलाइन, ऑनलाइन व हाइब्रिड मोड में मध्यस्थता सत्र।
- न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम करने पर जोर।
सिमडेगा में नालसा के तत्वावधान तथा झालसा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के संयुक्त सहयोग से संचालित राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0 अभियान को लेकर मंगलवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला जज सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजीव कुमार सिन्हा ने की। इसमें न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
बैठक का उद्देश्य अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा तय करना और मध्यस्थता योग्य मामलों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना था, ताकि आम लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय मिल सके।
मध्यस्थता से त्वरित और कम खर्च में समाधान
बैठक में पीडीजे राजीव कुमार सिन्हा ने कहा,
“मध्यस्थता योग्य मामलों की शीघ्र पहचान कर उन्हें आपसी सहमति से त्वरित, सरल एवं कम खर्च में निपटाया जाए, ताकि आम लोगों को जल्द न्याय मिल सके और न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम हो।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता एक प्रभावी माध्यम है, जिससे समय, धन और आपसी संबंधों की रक्षा की जा सकती है। इस विशेष अभियान के तहत ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका समाधान आपसी सहमति से संभव है।
किन मामलों को किया गया शामिल
अभियान के तहत वैवाहिक विवाद, सड़क दुर्घटना दावा मामले, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा संबंधी मामले, समझौता योग्य आपराधिक प्रकरण, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, संपत्ति विभाजन, बेदखली और भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों को शामिल किया गया है।
निर्देश दिया गया कि 2 जनवरी से 31 मार्च की अवधि में न्यायालय अपनी कारण सूची से ऐसे मामलों को चिन्हित करें, जिनका समाधान मध्यस्थता के माध्यम से संभव है। चिन्हित मामलों को विशेष रूप से मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा, ताकि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित हो सके।
सप्ताह के सातों दिन होंगे सत्र
पीडीजे ने यह भी निर्देश दिया कि पक्षकारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान सप्ताह के सातों दिन मध्यस्थता सत्र आयोजित किए जाएं। ये सत्र ऑफलाइन, ऑनलाइन अथवा हाइब्रिड मोड में संचालित किए जा सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा ऑनलाइन मध्यस्थता की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे दूर-दराज के पक्षकारों को भी लाभ मिल सके।
उन्होंने मध्यस्थ अधिवक्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान न्याय तक सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक में उपस्थित रहे ये पदाधिकारी
समीक्षा बैठक में एडीजे नरंजन सिंह, सीजेएम निताशा बारला, सचिव मरियम हेमरोम, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुभाष बाड़ा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद, सचिव प्रद्युम्न सिंह, अधिवक्ता कोमल दास, संजय महतो, शकील अहमद सहित अन्य उपस्थित थे।
बैठक में सभी ने अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यूज़ देखो: सुलभ न्याय की दिशा में अहम पहल
राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0 अभियान न्याय व्यवस्था में सुधार की एक सकारात्मक पहल है। लंबित मामलों का बोझ कम करना और आम लोगों को त्वरित राहत देना समय की मांग है। यदि न्यायालय, अधिवक्ता और पक्षकार मिलकर सक्रिय भूमिका निभाएं, तो न्याय प्रणाली अधिक प्रभावी बन सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुलह से सशक्त हो न्याय व्यवस्था
मध्यस्थता विवादों का शांतिपूर्ण समाधान देती है।
यह समय, धन और संबंधों की रक्षा का प्रभावी माध्यम है।
आम नागरिक भी अपने मामलों में मध्यस्थता का विकल्प अपनाकर त्वरित राहत पा सकते हैं।
न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाने में सभी की भागीदारी जरूरी है।
इस पहल पर अपनी राय साझा करें और जागरूकता के लिए खबर को आगे बढ़ाएं।







