#बरवाडीह #जहरीला_चावल : सड़ा अनाज खाने से पशुओं की बिगड़ी हालत—ग्रामीणों ने जांच की मांग की।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के ठूठाकुसुम क्षेत्र में सड़ा चावल फेंके जाने से कई पशु बीमार हो गए और एक गाय की मौत हो गई। घटना शांति निकेतन स्कूल के पास की है, जहां खुले में पड़े चावल को खाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई। ग्रामीणों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले ने प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
- ठूठाकुसुम, बरवाडीह में 40 बोरा सड़ा चावल मिलने से हड़कंप मचा।
- चावल खाने से कई गाय बीमार, एक की मौत हो गई।
- स्थानीय पशुपालकों अब्दुल सलाम, सरस्वती देवी, चंदन देवी प्रभावित।
- पशुओं के इलाज में हजारों रुपये खर्च, फिर भी हालत गंभीर।
- सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने मौके पर पहुंचकर जांच की मांग की।
- प्रशासन से दोषियों की पहचान और मुआवजा देने की मांग तेज।
बरवाडीह प्रखंड के ठूठाकुसुम क्षेत्र में एक गंभीर लापरवाही ने पशुपालकों की जिंदगी पर संकट ला दिया है। शांति निकेतन स्कूल के पास बड़ी मात्रा में सड़ा हुआ चावल खुले में फेंक दिया गया, जिसे खाने से कई पशु बीमार हो गए और एक गाय की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
कैसे सामने आया मामला
ग्रामीणों के अनुसार, ठूठाकुसुम स्थित शांति निकेतन स्कूल के समीप अचानक बड़ी मात्रा में सड़ा और बदबूदार चावल देखा गया। अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 40 बोरा खराब चावल यहां फेंका गया था। खुले में पड़े इस चावल को आसपास चरने वाली गायों ने खा लिया, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
कुछ ही समय में कई पशु बीमार पड़ गए और एक गाय की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे गांव में चिंता और डर का माहौल पैदा कर दिया।
पशुपालकों की परेशानी और दर्द
इस घटना से सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानीय पशुपालक हैं। अब्दुल सलाम, चंदन देवी, सरस्वती देवी, शिला देवी समेत कई लोगों की गायें बीमार हो गई हैं।
सरस्वती देवी ने बताया कि उनकी तीन गायों की हालत बिगड़ गई, जिनमें से एक की स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा:
सरस्वती देवी ने कहा: “हमारी गायों की हालत बहुत खराब है, इलाज में पैसे खर्च हो रहे हैं लेकिन कोई राहत नहीं मिल रही।”
पशुपालकों का कहना है कि इलाज में अब तक हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सड़ा हुआ चावल यहां किसने फेंका। लोगों को आशंका है कि यह किसी पीडीएस डीलर या अन्य स्रोत से आया हो सकता है।
घटना के बाद लोगों में यह भी चर्चा है कि यदि समय रहते निगरानी होती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है।
जनप्रतिनिधि पहुंचे मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही सांसद प्रतिनिधि दीपक राज मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
दीपक राज ने कहा: “यह बेहद गंभीर मामला है, दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा मिलना चाहिए।”
उन्होंने आपूर्ति पदाधिकारी सुमित तिवारी और बरवाडीह थाना प्रभारी अनुराग कुमार को पूरे मामले से अवगत कराते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- सड़ा चावल फेंकने वाले की पहचान की जाए
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
- प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा दिया जाए
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए
लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
न्यूज़ देखो: लापरवाही की कीमत पशुओं की जान, जिम्मेदार कौन
यह घटना सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर करती है। खुले में सड़ा खाद्यान्न फेंकना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि पशुओं और इंसानों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में अनाज कहां से आया और किसकी निगरानी में यह सब हुआ? प्रशासन को सिर्फ जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करनी होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जिम्मेदारी समझें, जागरूक बनें — यही बदलाव की शुरुआत है
हमारे आसपास होने वाली छोटी लापरवाहियां भी बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं। यह घटना हमें सिखाती है कि जागरूक नागरिक बनना कितना जरूरी है।
अगर आप अपने क्षेत्र में ऐसी कोई गतिविधि देखें, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
पशुओं और पर्यावरण की सुरक्षा हमारी भी जिम्मेदारी है।
अपनी आवाज उठाएं, दूसरों को भी जागरूक करें और ऐसी खबरों को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि जिम्मेदारों तक सच्चाई पहुंचे।

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