जंगल-पहाड़ के बीच बसे हुरदा स्कूल ने रचा इतिहास: 34 छात्रों ने प्रथम श्रेणी में पास होकर बढ़ाया मान

जंगल-पहाड़ के बीच बसे हुरदा स्कूल ने रचा इतिहास: 34 छात्रों ने प्रथम श्रेणी में पास होकर बढ़ाया मान

author Shivnandan Baraik
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#बानो #मैट्रिक_परिणाम : दूरस्थ हुरदा विद्यालय के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन कर रचा नया कीर्तिमान।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित हुरदा गांव के राजकीयकृत उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय ने वर्ष 2026 की मैट्रिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कुल 94 परीक्षार्थियों में से 34 छात्रों ने प्रथम श्रेणी हासिल की, जबकि बड़ी संख्या में छात्र द्वितीय श्रेणी में भी सफल रहे। दूरस्थ और भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद यह सफलता क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बनी है। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने छात्रों की मेहनत की सराहना की है।

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  • हुरदा विद्यालय, बानो के 94 छात्रों ने दी मैट्रिक परीक्षा।
  • 34 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी, 44 ने द्वितीय श्रेणी प्राप्त की।
  • 3 छात्र तृतीय श्रेणी से सफल, 13 परीक्षार्थी असफल रहे।
  • जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में स्थित विद्यालय का प्रदर्शन सराहनीय।
  • प्रधानाध्यापक रेमोलियुस केरकेटा ने छात्रों को दी बधाई।
  • सभी शिक्षकों और प्रबंधन समिति ने सफलता पर जताई खुशी।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड का सुदूरवर्ती गांव हुरदा एक बार फिर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि को लेकर चर्चा में है। झारखंड-ओडिशा सीमा के पास जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस क्षेत्र के राजकीयकृत उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय ने मैट्रिक परीक्षा 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद छात्रों ने मेहनत और लगन से सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

दूरस्थ क्षेत्र से निकली सफलता की कहानी

हुरदा गांव जिला मुख्यालय सिमडेगा से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां तक पहुंचना भी आसान नहीं है, क्योंकि रास्ता जंगलों और पहाड़ियों से होकर गुजरता है। ऐसे इलाके में शिक्षा की व्यवस्था बनाए रखना अपने आप में चुनौतीपूर्ण कार्य है।

इसके बावजूद विद्यालय के छात्रों ने जिस तरह से परीक्षा में प्रदर्शन किया है, वह न केवल विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। कुल 94 विद्यार्थियों ने मैट्रिक परीक्षा में भाग लिया, जिनमें से अधिकांश ने सफलता प्राप्त की।

परिणामों का विस्तृत आंकड़ा

विद्यालय के परीक्षा परिणाम पर नजर डालें तो:

  • 34 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में सफलता हासिल की
  • 44 विद्यार्थियों ने द्वितीय श्रेणी प्राप्त की
  • 3 विद्यार्थियों ने तृतीय श्रेणी में सफलता पाई
  • जबकि 13 छात्र असफल रहे

यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि अधिकांश छात्रों ने अच्छे अंकों के साथ परीक्षा पास की है, जो विद्यालय की गुणवत्ता और शिक्षकों की मेहनत को दर्शाता है।

शिक्षकों और विद्यालय की भूमिका

इस सफलता के पीछे विद्यालय के शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने छात्रों को निरंतर मार्गदर्शन दिया और पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक रेमोलियुस केरकेटा ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा:

रेमोलियुस केरकेटा ने कहा: “विद्यार्थी आगे भी मन लगाकर पढ़ाई करें, क्योंकि शिक्षा ही जीवन को बेहतर बनाने का सबसे बड़ा माध्यम है।”

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही छात्र अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

शिक्षकों और प्रबंधन समिति ने जताई खुशी

विद्यालय के शिक्षक सुदामा सिंह, कल्याण सुंरिन, अमेरिका साहू, शिखा जोजो, सुभाष पाल, अमूल्य ज्योति मिंज, वर्षा परिहार, सरिता बागे, लिली मड़कीं, पूनम सुरीन, हीरा साहू सहित सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बधाई दी।

इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भी छात्रों की इस सफलता पर खुशी जताई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

संसाधनों की कमी के बावजूद शानदार उपलब्धि

हुरदा जैसे सुदूर और पिछड़े इलाके में शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। कई बार छात्रों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ती है।

इसके बावजूद छात्रों ने अपने हौसले और मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी है दृढ़ संकल्प और मेहनत।

यह सफलता उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण खुद को कमजोर समझते हैं।

शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता

इस परिणाम से यह भी स्पष्ट होता है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। अभिभावक और शिक्षक दोनों मिलकर बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

विद्यालय का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों में और बेहतर परिणाम देने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

न्यूज़ देखो: सीमित संसाधन, असीमित सफलता का उदाहरण बना हुरदा विद्यालय

हुरदा विद्यालय की यह सफलता यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और मेहनत हो, तो भौगोलिक बाधाएं भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। यह कहानी उन क्षेत्रों के लिए प्रेरणा है, जहां संसाधनों की कमी को अक्सर असफलता का कारण माना जाता है। अब जरूरत है कि ऐसे विद्यालयों को और बेहतर सुविधाएं दी जाएं, ताकि यह प्रतिभा और निखर सके। क्या प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा ही सबसे बड़ी ताकत है — इसे अपना हथियार बनाएं

हर बच्चा अपने भीतर एक अनमोल क्षमता लेकर जन्म लेता है, जरूरत है उसे सही दिशा देने की। हुरदा के छात्रों ने दिखा दिया कि मेहनत और लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

अगर आप भी अपने गांव या समाज में बदलाव लाना चाहते हैं, तो शिक्षा को प्राथमिकता दें।
बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें और उनके सपनों को उड़ान दें।

अपनी राय जरूर साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें कि शिक्षा के माध्यम से ही उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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