
#बिश्रामपुर #पलामू #धार्मिक_पदयात्रा : ग्यारह महीने से अधिक समय से अकेले पदयात्रा कर रहे सच्चिदानंद का हुआ स्वागत।
उड़ीसा से निकलकर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की पदयात्रा पर निकले श्रद्धालु सच्चिदानंद की यात्रा बिश्रामपुर, पलामू पहुंची। ग्यारह महीने आठ दिन से निरंतर पदयात्रा कर रहे सच्चिदानंद अब तक काशी विश्वनाथ, अयोध्या और बागेश्वर धाम के दर्शन कर चुके हैं। बिश्रामपुर पहुंचने पर उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया। मंगलवार को वे यहां से बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए, जहां ज्योतिर्लिंग दर्शन करेंगे।
- उड़ीसा से शुरू हुई अकेली धार्मिक पदयात्रा।
- 11 महीने 8 दिन से निरंतर पैदल यात्रा।
- काशी, अयोध्या और बागेश्वर धाम के दर्शन पूर्ण।
- बिश्रामपुर, पलामू पहुंचने पर भव्य स्वागत।
- अब बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना।
उड़ीसा से निकलकर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पदयात्रा पर निकले श्रद्धालु सच्चिदानंद की आस्था, संकल्प और साधना ने बिश्रामपुर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। ग्यारह महीने आठ दिन से लगातार पदयात्रा कर रहे सच्चिदानंद मंगलवार को बिश्रामपुर, पलामू पहुंचे, जहां से वे देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम के लिए आगे रवाना हुए।
यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि आस्था, आत्मसंयम और सनातन परंपरा के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक मानी जा रही है। सच्चिदानंद बिना किसी सहारे, पूरी तरह अकेले यह लंबी और कठिन पदयात्रा कर रहे हैं।
उड़ीसा से शुरू हुई आस्था की लंबी यात्रा
सच्चिदानंद ने बताया कि उन्होंने अपनी पदयात्रा की शुरुआत उड़ीसा से की थी। यात्रा का उद्देश्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन के साथ आत्मिक शांति और सनातन संस्कृति से जुड़ाव है। उन्होंने बताया कि अब तक वे काशी विश्वनाथ, अयोध्या और बागेश्वर धाम के दर्शन कर चुके हैं।
सच्चिदानंद ने कहा:
“यह यात्रा मेरे लिए तपस्या है। हर कदम के साथ ईश्वर की कृपा का अनुभव होता है।”
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कई कठिनाइयां आईं, लेकिन आस्था और विश्वास ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।
बिश्रामपुर पहुंचने पर हुआ आत्मीय स्वागत
जब सच्चिदानंद की पदयात्रा बिश्रामपुर, पलामू पहुंची, तो स्थानीय लोगों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। संघ के कार्यकर्ताओं ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और उनके साहस व संकल्प की सराहना की।
इस अवसर पर संघ के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई गणमान्य लोग भी मौजूद थे। सभी ने सच्चिदानंद की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उनके सुरक्षित और सफल यात्रा की कामना की।
अकेले पदयात्रा, मजबूत संकल्प
सच्चिदानंद की यह यात्रा इस मायने में भी विशेष है कि वे इसे पूरी तरह अकेले कर रहे हैं। न कोई वाहन, न कोई सहायक—सिर्फ आस्था और संकल्प के सहारे वे दिन-रात पैदल यात्रा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में ऐसी पदयात्राएं युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो संयम, साधना और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश देती हैं।
अब बैद्यनाथ धाम के लिए प्रस्थान
बिश्रामपुर में विश्राम के बाद सच्चिदानंद मंगलवार को बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि देवघर पहुंचकर वे बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे और अपनी यात्रा को आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान करेंगे।
उनकी यह पदयात्रा झारखंड के कई क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से उनका संपर्क होता रहेगा।
धार्मिक आस्था और समाज के लिए संदेश
सच्चिदानंद की पदयात्रा केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है—धैर्य, आस्था और अनुशासन का। उनकी यात्रा यह दिखाती है कि सच्चे संकल्प के सामने दूरी, समय और कठिनाइयां मायने नहीं रखतीं।
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि ऐसी यात्राएं समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना को मजबूत करती हैं।
न्यूज़ देखो: आस्था की पदयात्रा बनी प्रेरणा
सच्चिदानंद की पदयात्रा यह दर्शाती है कि आज भी समाज में गहरी धार्मिक आस्था और संकल्प जीवित है। अकेले पदयात्रा कर देश के प्रमुख तीर्थों के दर्शन करना आसान नहीं, लेकिन यह सनातन परंपरा की शक्ति को उजागर करता है। ऐसे प्रयास समाज को जोड़ने और आध्यात्मिक चेतना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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आस्था, संकल्प और साधना का मार्ग
सच्ची श्रद्धा कठिन से कठिन मार्ग को भी आसान बना देती है।
ऐसी यात्राएं समाज को सकारात्मक सोच और धैर्य का संदेश देती हैं।
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