
#सिमडेगा #नारी_स्वास्थ्य : विभिन्न गांवों में पैड वितरण के साथ स्वच्छता पर जागरूकता अभियान।
सिमडेगा जिले में महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकास सेवा केंद्र फाउंडेशन द्वारा नारी पैड सेवा योजना के तहत पैड वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ठेठईटांगर, बोलबा और करसई प्रखंड के कई गांवों में संपन्न हुआ। महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता और सुरक्षित स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। संस्था ने आगे भी ऐसे अभियान जारी रखने की बात कही।
- विकास सेवा केंद्र फाउंडेशन द्वारा नारी पैड सेवा योजना का आयोजन।
- कार्यक्रम ठेठईटांगर, बोलबा और करसई प्रखंड के गांवों में संपन्न।
- महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता पर दी गई विस्तृत जानकारी।
- डिस्ट्रिक्ट हेड एनिश केरकेट्टा व सरोज केरकेट्टा की सक्रिय भागीदारी।
- ब्लॉक कोऑर्डिनेटर रमेश टोप्पो समेत टीम की अहम भूमिका।
सिमडेगा जिले में महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। स्वयंसेवी संस्था विकास सेवा केंद्र फाउंडेशन द्वारा संचालित नारी पैड सेवा योजना के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित साधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है।
यह कार्यक्रम मुख्य रूप से ठेठईटांगर प्रखंड के रिपो टोली, बोलबा प्रखंड के पालेमुण्डा, तथा करसई प्रखंड के मालसाड़ा एवं ठेसुटोली गांवों में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और संस्था की इस पहल की सराहना की।
मासिक धर्म स्वच्छता पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई महिलाएं जागरूकता के अभाव में असुरक्षित तरीकों का उपयोग करती हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
संस्था की डिस्ट्रिक्ट हेड एनिश केरकेट्टा ने कहा:
“महिलाओं का स्वास्थ्य परिवार और समाज की नींव है। यदि महिलाएं स्वस्थ रहेंगी तो पूरा समाज मजबूत होगा। मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर झिझक खत्म करना समय की जरूरत है।”
उन्होंने यह भी बताया कि नारी पैड सेवा योजना का उद्देश्य केवल पैड वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को वैज्ञानिक और स्वास्थ्यपरक जानकारी देना भी है।
बाल एवं जननी शिक्षा अभियान की जानकारी
इस अवसर पर सरोज केरकेट्टा ने संस्था की एक अन्य योजना बाल एवं जननी शिक्षा अभियान के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा:
“स्वास्थ्य और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि महिलाएं जागरूक होंगी तो वे अपने बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति प्रेरित कर सकेंगी।”
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को पोषण, स्वच्छता, किशोरियों के स्वास्थ्य और नियमित जांच की आवश्यकता जैसे विषयों पर भी जागरूक किया गया।
स्थानीय टीम की अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की स्थानीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ब्लॉक कोऑर्डिनेटर रमेश टोप्पो, सेंटर इंचार्ज आभा ब्यूटी तिर्की, नेमान्ति टोप्पो एवं रश्मि केरकेट्टा ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को एकत्रित किया और कार्यक्रम के संचालन में सक्रिय सहयोग दिया।
स्थानीय महिलाओं ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि कई बार जानकारी के अभाव में महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। पैड वितरण के साथ जागरूकता सत्र ने उन्हें सही जानकारी प्राप्त करने का अवसर दिया।
ग्रामीण महिलाओं में दिखा उत्साह
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने खुलकर अपने सवाल पूछे और स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर चर्चा की। कई महिलाओं ने स्वीकार किया कि पहले वे इस विषय पर खुलकर बात करने में संकोच करती थीं, लेकिन अब उन्हें सही जानकारी मिल रही है।
संस्था की ओर से बताया गया कि भविष्य में भी ऐसे जागरूकता एवं वितरण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक यह सुविधा पहुंच सके।

न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य जागरूकता की ओर मजबूत कदम
सिमडेगा जैसे ग्रामीण जिलों में मासिक धर्म स्वच्छता पर खुलकर चर्चा और जागरूकता अभियान चलाना सामाजिक बदलाव का संकेत है। नारी पैड सेवा जैसी योजनाएं न केवल स्वास्थ्य सुधारती हैं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ाती हैं। जरूरत है कि ऐसे प्रयासों को सरकारी और सामाजिक स्तर पर और मजबूती मिले। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला
स्वास्थ्य कोई विकल्प नहीं, बल्कि हर महिला का अधिकार है।
मासिक धर्म स्वच्छता पर खुलकर संवाद करना समाज की जिम्मेदारी है।
आइए, झिझक तोड़ें और बेटियों-बहनों को सुरक्षित जीवन का आधार दें।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता ही असली परिवर्तन की शुरुआत है।
क्या आपके क्षेत्र में भी ऐसे कार्यक्रम हो रहे हैं?
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