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धूमधाम और अनुशासन के साथ रायडीह के शंख मोड़ मांझा टोली में संपन्न हुई सरस्वती पूजा

#रायडीह #गुमला #सरस्वती_पूजा : श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक सहभागिता के साथ भव्य आयोजन संपन्न।

गुमला जिले के रायडीह प्रखंड अंतर्गत शंख मोड़ मांझा टोली में सरस्वती पूजा समिति के तत्वावधान में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित की गई। आयोजन के दौरान आकर्षक पूजा पंडाल, विधिवत पूजा-अर्चना और अनुशासित व्यवस्था देखने को मिली। सुबह से ही स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी। यह आयोजन सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बना।

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  • सरस्वती पूजा समिति शंख मोड़ मांझा टोली, रायडीह द्वारा भव्य आयोजन।
  • आकर्षक पूजा पंडाल और विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन।
  • अध्यक्ष निलेश कुमार झा, कोषाध्यक्ष निलेश कुमार मेहता और सचिव विपुल गुप्ता की सक्रिय भूमिका।
  • पूजा के बाद आरती एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था।
  • ग्रामीणों, युवाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता।

रायडीह प्रखंड के शंख मोड़ मांझा टोली में इस वर्ष सरस्वती पूजा का आयोजन पूरे धार्मिक उल्लास और सामाजिक अनुशासन के साथ किया गया। विद्या, बुद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना के साथ ही क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बन गया। पूजा पंडाल को पारंपरिक एवं सांस्कृतिक प्रतीकों से सजाया गया था, जिसने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुआ पूजा अनुष्ठान

पूजा कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, जिसमें मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। समिति के सदस्यों और स्थानीय पुजारियों ने धार्मिक विधि-विधान का पूर्ण रूप से पालन किया। पूजा के दौरान विद्यार्थियों, युवाओं और अभिभावकों ने विशेष रूप से मां सरस्वती से विद्या, विवेक और सफलता का आशीर्वाद मांगा। पूजा के पश्चात आरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया।

समिति पदाधिकारियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

इस आयोजन को सफल बनाने में सरस्वती पूजा समिति शंख मोड़ मांझा टोली के पदाधिकारियों की अहम भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष निलेश कुमार झा, कोषाध्यक्ष निलेश कुमार मेहता और सचिव विपुल गुप्ता ने आयोजन की तैयारियों से लेकर व्यवस्थाओं तक हर स्तर पर सक्रिय सहभागिता निभाई। उन्होंने बताया कि पूजा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और अनुशासन के महत्व को मजबूत करना भी है।

ग्रामीणों और युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता

पूजा कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ युवाओं और बच्चों की विशेष उपस्थिति रही। गोविंद रजक, गुलाब सिंह, रणधीर कुमार, उत्तम प्रसाद, मोनू रजक, शेखर कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग पूजा में शामिल हुए। बच्चों में मां सरस्वती के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। कई बच्चों ने पुस्तकों और कलम के साथ मां सरस्वती की पूजा कर शिक्षा में प्रगति की कामना की।

शांति, अनुशासन और भाईचारे का संदेश

समिति सदस्यों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान शांति, अनुशासन और भाईचारे का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों द्वारा भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई गई। पूजा स्थल पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं देखने को मिली, जिससे आयोजन सफल और अनुकरणीय बन सका। स्थानीय लोगों ने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सामाजिक एकता का प्रतीक बताया।

सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का केंद्र बना आयोजन

सरस्वती पूजा का यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम न होकर सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र भी बना। ग्रामीणों ने एक-दूसरे से मिलकर आपसी संवाद और सहयोग को मजबूत किया। इस तरह के आयोजनों से क्षेत्र में सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण होता है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर मिलता है।

न्यूज़ देखो: आस्था और सामाजिक एकजुटता की मजबूत तस्वीर

रायडीह के शंख मोड़ मांझा टोली में आयोजित सरस्वती पूजा यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सांस्कृतिक परंपराएं पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही हैं। समिति द्वारा किया गया सुव्यवस्थित आयोजन स्थानीय नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों की ताकत को उजागर करता है। ऐसे आयोजन सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षा और संस्कार के महत्व को रेखांकित करते हैं। भविष्य में भी प्रशासन और समाज के सहयोग से इस तरह के आयोजनों को प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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शिक्षा, संस्कृति और सहभागिता का संकल्प

सरस्वती पूजा जैसे आयोजन हमें ज्ञान, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देते हैं। यह समय है कि हम शिक्षा के महत्व को समझें और नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करें। अपने आसपास होने वाले ऐसे सकारात्मक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और समाज में सद्भाव बनाए रखें।
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MD. Waris

रायडीह, गुमला

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