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सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया सरस्वती पूजन उत्सव

#सलडेगा #शैक्षिक_आयोजन : विद्या मंदिर परिसर में भक्ति भाव से संपन्न हुआ माँ सरस्वती पूजन उत्सव।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती का पूजन उत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन वनवासी कल्याण केंद्र झारखण्ड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखण्ड द्वारा किया गया। विद्यालय परिसर में प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन संपन्न हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं, आचार्य-आचार्या, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की गरिमामयी सहभागिता रही। यह आयोजन शिक्षा, संस्कार और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।

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  • सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में भव्य सरस्वती पूजन उत्सव।
  • श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखण्ड द्वारा संचालित विद्यालय में आयोजन।
  • पंडित शिवकुमार पाठक ने विधिवत पूजन संपन्न कराया।
  • भैया-बहनों द्वारा सरस्वती वंदना और मंत्रोच्चारण की प्रस्तुति।
  • अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आयोजित सरस्वती पूजन उत्सव ने पूरे विद्यालय परिसर को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। यह आयोजन वनवासी कल्याण केंद्र झारखण्ड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखण्ड के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। पूजन उत्सव के अवसर पर विद्यालय को भव्य रूप से सजाया गया था और वातावरण में भक्ति एवं उल्लास की स्पष्ट अनुभूति हो रही थी।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया। पंडित शिवकुमार पाठक द्वारा पूरे विधि-विधान से माँ सरस्वती की पूजा संपन्न कराई गई। माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर विद्या, बुद्धि और विवेक की कामना की गई।

पूजन के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पूर्ण श्रद्धा भाव से देवी माँ का स्मरण किया और शिक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

विद्यार्थियों की सामूहिक सहभागिता ने बढ़ाया उत्सव का गौरव

विद्यालय के भैया-बहनों ने सामूहिक रूप से सरस्वती वंदना और मंत्रोच्चारण प्रस्तुत किया। उनकी एकाग्रता, अनुशासन और भक्ति भाव ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। विद्यार्थियों की इस सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कार निर्माण पर भी विशेष ध्यान देता है।

पूरे परिसर में मंत्रोच्चारण की गूंज और शंख-ध्वनि से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया, जिसने सभी उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।

आचार्य-आचार्या और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका

इस अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य-आचार्या, अभिभावक एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय द्वारा आयोजित इस तरह के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आचार्य-आचार्याओं ने विद्यार्थियों को माँ सरस्वती के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी और ज्ञान के साथ विनम्रता और विवेक को भी आवश्यक बताया।

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भारतीय संस्कृति और शिक्षा का सुंदर समन्वय

सरस्वती पूजन उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और शिक्षा परंपरा का प्रतीक है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि ज्ञान का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनना भी है।

विद्यालय प्रबंधन की ओर से यह भी कहा गया कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सम्मान और गर्व की भावना विकसित होती है।

वनवासी शिक्षा परंपरा का जीवंत उदाहरण

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आयोजित यह उत्सव वनवासी कल्याण केंद्र झारखण्ड की शिक्षा परंपरा का एक जीवंत उदाहरण है। शिक्षा के माध्यम से संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना इस परंपरा का मूल उद्देश्य रहा है, जो इस आयोजन में स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

स्थानीय नागरिकों ने भी विद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का भाव उत्पन्न होता है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार का सशक्त संदेश

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा का यह आयोजन यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्कार और संस्कृति से जुड़कर ही पूर्ण होती है। माँ सरस्वती का पूजन विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति सम्मान और अनुशासन की भावना को मजबूत करता है। ऐसे आयोजनों से विद्यालय और समाज के बीच संबंध भी और प्रगाढ़ होते हैं। यह पहल भविष्य की पीढ़ी को संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जब ज्ञान, भक्ति और संस्कार एक साथ चलते हैं

माँ सरस्वती पूजन उत्सव जैसे आयोजन बच्चों के मन में शिक्षा के प्रति श्रद्धा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा देता है, बल्कि जीवन में सही दिशा चुनने की प्रेरणा भी देता है। ऐसे अवसर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जोड़ते हुए उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाते हैं।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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