
#अकासीग्राम #सरनामहासमागम : ककड़ोलता परिसर में मंत्रोच्चार, भजन और प्रकृति आराधना के बीच ऐतिहासिक आयोजन सम्पन्न।
प्रखंड के अकासी ग्राम स्थित ककड़ोलता परिसर में शुक्रवार को सिरसी ता नाले नु सरना धर्म आध्यात्मिक महासमागम राजकीय मेला का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में राज्य सरकार के मंत्री, विधायक, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और हजारों की संख्या में सरना समाज के श्रद्धालु शामिल हुए। पूरा परिसर भक्ति गीत, पारंपरिक पूजा विधि और प्रकृति आराधना से सराबोर रहा। यह आयोजन आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
- अकासी ग्राम के ककड़ोलता परिसर में राजकीय स्तर का सरना महासमागम सम्पन्न।
- मंत्री चमरा लिंडा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल।
- विधायक झीगा सुसरेन होरो और विधायक राम सूर्या मुंडा रहे विशिष्ट अतिथि।
- बैगा गाहजू मुंडा, पेचा मुंडा और बुधना मुंडा ने पारंपरिक पूजा कराई।
- गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत एवं संबोधन किया।
- हजारों की संख्या में सरना समाज के श्रद्धालुओं की सहभागिता।
प्रखंड के अकासी ग्राम स्थित ककड़ोलता धार्मिक परिसर शुक्रवार को आस्था, अध्यात्म और परंपरा का केंद्र बना रहा। सिरसी ता नाले नु सरना धर्म आध्यात्मिक महासमागम राजकीय मेला के अवसर पर यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। पारंपरिक भजन, ढोल-मांदर की गूंज और पूजा-पाठ के बीच पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहा। जिला प्रशासन की ओर से अतिथियों का पारंपरिक तरीके से शॉल ओढ़ाकर और पौधा भेंट कर सम्मान किया गया।
मुख्य अतिथि मंत्री चमरा लिंडा का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा ने कहा:
“आज का दिन अत्यंत शुभ है। ककड़ोलता एक आदिवासी सृष्टि स्थल है, जहां से मानव जाति के उद्भव की मान्यता जुड़ी है। डंडा कटना पूजा में सूर्य, चंद्रमा, प्रकृति और मानव जीवन की संरचना का क्रम स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। धर्म इंसान के लिए अत्यंत आवश्यक है, धर्म के बिना मानव का अस्तित्व अधूरा है।”
उन्होंने सरना धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि सरना का अर्थ सखुआ वृक्ष और प्रकृति से जुड़ा है।
मंत्री ने आगे कहा:
“नशापान शैतान के समान है, जबकि पानी धर्मेश की देन है। ककड़ोलता का पवित्र जल शुद्ध विचार देता है और जीवन को दिशा प्रदान करता है। हमें अपनी परंपराओं को समझकर जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।”
विधायक राम सूर्या मुंडा ने ऐतिहासिक महत्व पर डाला प्रकाश
खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा ने अपने संबोधन में कहा:
“इस आध्यात्मिक महासमागम में कई जिलों और राज्यों से लोग पहुंचे हैं। ककड़ोलता एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां पीढ़ियों से हमारे पूर्वज पूजा-पाठ करते आ रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराओं को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि इस वर्ष सरहुल पर्व से पहले ढोल-मांदर उपलब्ध कराने का कार्य किया जाएगा, ताकि धार्मिक आयोजनों की परंपरा सशक्त बनी रहे।
उन्होंने समाज से अपील की कि अपने धर्म, संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ें।
विधायक झीगा सुसरेन होरो का भावनात्मक संदेश
सिसई विधानसभा विधायक झीगा सुसरेन होरो ने कहा:
“माघ महीने का यह दिन अत्यंत शुभ है। पहाड़, पर्वत और खेतों के किनारे समाज के लोग एकत्र होकर पूजा करते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं।”
उन्होंने समाज की महिलाओं और युवाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि गीत, जतरा और त्योहार समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा:
“हमारे पूर्वजों ने हमें गीत, भाषा, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन की विरासत दी है। हमें इसे भूलना नहीं चाहिए। बच्चों को शिक्षित करें, अपनी भाषा और संस्कृति को संभालें। आदिवासी समाज का विचार सबसे सरल और सुंदर है।”
विधायक ने पत्रकारों का भी आभार जताया और समाज को एकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने बताया ककड़ोलता का ऐतिहासिक महत्व
गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत करते हुए ककड़ोलता से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सखुआ वृक्ष और जल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रकृति ही आदिवासी जीवन का आधार है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज को शिक्षित और जागरूक होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और अधिकारों को समझ सकें।
उन्होंने बच्चों की शिक्षा, सामाजिक उत्थान और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।
प्रशासनिक और सामाजिक सहभागिता
इस अवसर पर बिशुनपुर विधायक प्रतिनिधि सुनील उरांव, गुमला एसपी हरीश बिन जमां, डीडीसी दिलेश्वर महतो, चैनपुर एसडीओ पूर्णिमा कुमारी, जिला खेल पदाधिकारी प्रवीण कुमार, बीडीओ उमेश कुमार स्वांसी, मोहरलाल उरांव, चितरंजन उरांव सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और समाजसेवी उपस्थित रहे।
हजारों की संख्या में सरना समाज के लोगों ने पूरे श्रद्धा और अनुशासन के साथ आयोजन में भाग लिया।
न्यूज़ देखो: ककड़ोलता से संस्कृति संरक्षण का स्पष्ट संदेश
यह आयोजन दर्शाता है कि सरना धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के साथ संतुलन का जीवन दर्शन है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की सहभागिता यह संकेत देती है कि सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की जिम्मेदारी सामूहिक है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर मिलता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा और संस्कृति संरक्षण के लिए किए गए संकल्पों पर कितना अमल होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था, संस्कृति और एकता से बनेगा मजबूत समाज
सरना धर्म की परंपराएं हमें प्रकृति के साथ संतुलन और सामाजिक एकजुटता का संदेश देती हैं।
ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और भविष्य की दिशा तय करते हैं।
जरूरत है कि हम केवल उत्सव तक सीमित न रहें, बल्कि मूल्यों को जीवन में उतारें।
अपने बच्चों को शिक्षित करें, संस्कृति से जोड़ें और समाज को संगठित बनाएं।
आप इस आयोजन को कैसे देखते हैं, अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जागरूकता फैलाने में सहभागी बनें।







