
#बानो #सिमडेगा #शिक्षा_संस्कार : वार्षिकोत्सव और मातृ सम्मेलन में विद्यार्थियों ने प्रतिभा व संस्कारों का दिया संदेश।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, केतुंगाधाम में मंगलवार को विद्यालय का 45वां स्थापना दिवस सह वार्षिकोत्सव और मातृ सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर समन्वय देखने को मिला। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। आयोजन ने विद्यालय की शैक्षणिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
- 45वां स्थापना दिवस सह वार्षिकोत्सव का आयोजन।
- कोचे मुंडा रहे मुख्य अतिथि।
- विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र।
- मातृ सम्मेलन में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी।
- शिक्षा के साथ संस्कार और आत्मविश्वास पर जोर।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, केतुंगाधाम में मंगलवार को 45वां स्थापना दिवस सह वार्षिकोत्सव एवं मातृ सम्मेलन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और पूरे वातावरण में उत्सव, अनुशासन और संस्कार की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। बड़ी संख्या में अभिभावक, गणमान्य नागरिक और शिक्षाविद् इस कार्यक्रम के साक्षी बने।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में तोरपा के पूर्व विधायक कोचे मुंडा उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में वनवासी कल्याण केंद्र के शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे, बाल गोविंद पटेल, प्रदेश प्रवर्तन प्रमुख संजय वर्मा एवं भाजपा प्रखंड अध्यक्ष बालगोविंद सिंह शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात छात्राओं द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सरस्वती वंदना ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। वंदना के माध्यम से ज्ञान, विद्या और संस्कार के प्रति श्रद्धा प्रकट की गई, जो विद्यालय की मूल भावना को दर्शाती है।
कार्यक्रम का मंच संचालन विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य बधनु केरकेट्टा एवं मनोज गोस्वामी ने संयुक्त रूप से किया। इससे पूर्व विद्यालय के विद्यार्थियों ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
वार्षिकोत्सव के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों ने पारंपरिक एवं आधुनिक नृत्य, देशभक्ति गीत, लोकगीत, लघु नाटक एवं समूह नृत्य जैसी अनेक रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। बोध वर्ग से लेकर कक्षा 10वीं तक के भैया-बहनों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया “झारखंड वाला ठुमका” नृत्य कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिस पर दर्शक तालियां बजाने और झूमने को विवश हो गए। नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक संदेश, संस्कार और नैतिक मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
शिक्षा के साथ संस्कार पर दिया गया बल
मुख्य अतिथि कोचे मुंडा ने अपने संबोधन में विद्यालय परिवार को 45वें स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जैसे संस्थान शिक्षा के साथ-साथ संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
कोचे मुंडा ने कहा: “आज के समय में केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास भी उतना ही आवश्यक है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, परिश्रम करने और अपने संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों के सर्वांगीण विकास में विद्यालय के साथ निरंतर सहयोग करें।
मातृ सम्मेलन में अभिभावकों की सहभागिता
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित मातृ सम्मेलन में माताओं एवं अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी रही। अभिभावकों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन और संस्कार आधारित शिक्षा की प्रशंसा की। सम्मेलन के दौरान यह संदेश दिया गया कि विद्यालय और परिवार मिलकर ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर एलिस संस्थान के निर्देशक विमल कुमार, रोहित साहु, कृष्ण सिंह, लखेश्वर पंडा, महावीर सोनी, अभिषेक कुमार साहु, विद्यालय के प्रधानाचार्य सुकरा केरकेट्टा, शिक्षक गौरव गोस्वामी, केतुंगाधाम मंदिर के संरक्षक मनोज गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम में शिक्षिकाओं में रेणु गोस्वामी, अंजली कुमारी, शकुंतला सिंह, प्रेमलता केरकेट्टा, निराली बागे, रेखा तिर्की एवं अविनाश पंडा की सक्रिय भूमिका रही। विद्यालय परिवार के समर्पण और अनुशासन ने पूरे आयोजन को सफल बनाया।
शिक्षा और संस्कृति का सशक्त मंच
पूरे कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, केतुंगाधाम केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने वाला मंच है। 45 वर्षों की इस यात्रा में विद्यालय ने क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने का कार्य किया है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार का मजबूत मॉडल
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर का यह आयोजन बताता है कि जब शिक्षा को संस्कार और संस्कृति से जोड़ा जाता है, तब उसका प्रभाव समाज पर दूरगामी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के आयोजन शिक्षा के प्रति विश्वास और सहभागिता को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों के भविष्य में आपकी भूमिका भी अहम
शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, समाज और अभिभावकों की भी साझी भूमिका है। ऐसे आयोजनों से प्रेरणा लें और बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहयोग करें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और शिक्षा व संस्कार की इस पहल को आगे बढ़ाएं।





