
#बरवाडीह #सड़क_विकास : संवेदक की लापरवाही से दो माह से खोदी सड़क बनी ग्रामीणों की परेशानी।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत चमरडीहा–लंका मुख्य सड़क को संवेदक द्वारा लगभग दो माह से खोदकर अधूरा छोड़ देने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। खराब सड़क के कारण दुर्घटनाओं और आवागमन में गंभीर दिक्कतें सामने आ रही हैं। उपप्रमुख वीरेंद्र जायसवाल ने इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित सूचना देकर एक सप्ताह में कार्य शुरू नहीं होने पर सड़क जाम की चेतावनी दी है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की लापरवाही को उजागर करता है।
- चमरडीहा–लंका मुख्य सड़क दो माह से अधूरी पड़ी।
- संवेदक की लापरवाही से ग्रामीणों को भारी परेशानी।
- उपप्रमुख वीरेंद्र जायसवाल ने बीडीओ को लिखा पत्र।
- एक सप्ताह में कार्य शुरू नहीं हुआ तो सड़क जाम की चेतावनी।
- दुर्घटनाओं और जनजीवन प्रभावित होने का आरोप।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत चमरडीहा–लंका मुख्य सड़क इन दिनों ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। संवेदक द्वारा सड़क को खोदकर लगभग दो माह से अधूरा छोड़ देने के कारण सड़क की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले ग्रामीण, मजदूर, स्कूली बच्चे और राहगीर लगातार जोखिम उठाने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन खुदाई के बाद संवेदक ने काम बीच में ही छोड़ दिया। नतीजतन जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसात के बाद पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है। कई ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय इस सड़क से गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है।
उपप्रमुख ने बीडीओ को लिखा पत्र
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बरवाडीह प्रखंड उपप्रमुख वीरेंद्र जायसवाल ने अपने लेटर पैड पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, बरवाडीह को लिखित सूचना दी है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि संवेदक की लापरवाही से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।
उपप्रमुख ने पत्र में लिखा है कि सड़क की जर्जर हालत के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। विशेष रूप से पैदल चलने वाले राहगीरों और राजगीरों को इस मार्ग से गुजरने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा
ग्रामीणों का आरोप है कि गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ सड़क के कारण अब तक कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। मोटरसाइकिल सवारों के लिए यह सड़क किसी खतरे से कम नहीं है। स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। सड़क किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए भी इस मार्ग से गुजरना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार शिकायत करने के बावजूद संवेदक या विभागीय अधिकारियों ने सुध नहीं ली। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
सड़क जाम की चेतावनी
उपप्रमुख वीरेंद्र जायसवाल ने पत्र के माध्यम से चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सड़क निर्माण कार्य पुनः शुरू नहीं किया गया, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर सड़क जाम करने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या समस्या की पूरी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों, संबंधित जेई और संवेदक की होगी।
उपप्रमुख ने कहा:
वीरेंद्र जायसवाल ने कहा: “यह सड़क क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है। संवेदक की लापरवाही से ग्रामीणों की जान खतरे में है। यदि समय रहते काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
प्रशासन और पुलिस को दी गई सूचना
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उपप्रमुख द्वारा भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि बरवाडीह अंचलाधिकारी और स्थानीय थाना प्रभारी को भी उपलब्ध करा दी गई है। इससे स्पष्ट है कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि जल्द समाधान निकल सके।
ग्रामीणों ने भी मांग की है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर संवेदक को कार्य शुरू करने का निर्देश दे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर सड़क खोदकर छोड़ देना न केवल लापरवाही है, बल्कि जनता के साथ अन्याय भी है।
ग्रामीणों में बढ़ता असंतोष
चमरडीहा और लंका सहित आसपास के गांवों के लोगों में इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी से यह साफ जाहिर होता है कि विकास योजनाओं की निगरानी सही ढंग से नहीं हो रही है। यदि समय पर काम पूरा किया जाता तो आज यह स्थिति नहीं आती।
कई ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किसकी अनुमति से सड़क को खोदकर इतने लंबे समय तक छोड़ दिया गया। क्या विभागीय अधिकारियों ने निरीक्षण नहीं किया या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
न्यूज़ देखो: अधूरी सड़कें, कमजोर निगरानी
चमरडीहा–लंका सड़क का मामला यह दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की निगरानी कितनी कमजोर है। संवेदकों की लापरवाही और विभागीय चुप्पी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता है या आंदोलन की नौबत आती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सड़क नहीं, यह ग्रामीणों की जीवनरेखा है
ग्रामीण सड़कों की अनदेखी सीधे लोगों की सुरक्षा और आजीविका पर असर डालती है। जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वे जनता की आवाज को गंभीरता से लें। आप भी अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाएं।





