
#सलडेगा #शैक्षिक_उपलब्धि : राज्य स्तरीय प्रश्न मंच में विद्यालय ने द्वितीय स्थान हासिल किया।
वनवासी कल्याण केंद्र झारखण्ड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा आयोजित प्रांतीय प्रश्न मंच प्रतियोगिता में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड स्थित गायत्री शिशु विद्या मंदिर चन्द्री में आयोजित इस प्रतियोगिता में सलडेगा की टीम ने झारखंड प्रांत में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच विद्यार्थियों ने विषय ज्ञान और समन्वय का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस सफलता से विद्यालय, क्षेत्र और जिले का नाम गौरवान्वित हुआ।
- प्रांतीय प्रश्न मंच प्रतियोगिता में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा को द्वितीय स्थान।
- प्रतियोगिता का आयोजन गायत्री शिशु विद्या मंदिर, चन्द्री (चक्रधरपुर) में।
- टीम में कृति साहू, अमन प्रसाद और अनमोल प्रसाद का सराहनीय योगदान।
- आयोजक संस्था श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखण्ड।
- प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने विद्यार्थियों को बधाई दी।
वनवासी कल्याण केंद्र, झारखण्ड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखण्ड द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय प्रांतीय प्रश्न मंच प्रतियोगिता में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे झारखण्ड प्रांत में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। यह प्रतियोगिता पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत गायत्री शिशु विद्या मंदिर, चन्द्री में भव्य एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुई। प्रतियोगिता में झारखण्ड के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभाशाली भैया-बहनों ने भाग लिया, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यंत उच्च रहा।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और चुनौतीपूर्ण प्रश्नों के बीच सलडेगा विद्यालय की टीम ने अपनी मेधा, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट समन्वय का परिचय देते हुए निर्णायकों और उपस्थित श्रोताओं को प्रभावित किया। प्रश्न मंच पर त्वरित निर्णय क्षमता और सटीक उत्तरों के माध्यम से टीम ने यह सिद्ध किया कि नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन से किसी भी स्तर की प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
विद्यार्थियों का उत्कृष्ट योगदान
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा की ओर से प्रतियोगिता में शामिल बहन कृति साहू, भैया अमन प्रसाद एवं भैया अनमोल प्रसाद ने प्रश्न मंच पर विषयों की गहन समझ और संतुलित प्रस्तुति के साथ विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। तीनों प्रतिभागियों ने कठिन प्रश्नों का आत्मविश्वास के साथ उत्तर देकर टीम को राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के दौरान उनके उत्तरों की स्पष्टता, आपसी तालमेल और मंच पर संयमित व्यवहार ने यह दर्शाया कि विद्यालय में दी जा रही शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व विकास पर भी केंद्रित है।
प्रधानाचार्य ने दी बधाई, सम्मान की घोषणा
इस उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री जितेंद्र कुमार पाठक ने विजेता भैया-बहनों को हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा:
जितेंद्र कुमार पाठक ने कहा: “यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, आचार्यों के मार्गदर्शन और विद्यालय के संस्कारयुक्त शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि विद्यालय स्तर पर इन विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा, ताकि अन्य छात्र-छात्राएं भी इस उपलब्धि से प्रेरणा ले सकें।
संस्कार और अनुशासन की शिक्षा का परिणाम
यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में दी जा रही शिक्षा ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास का भी निर्माण करती है। प्रश्न मंच जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ उनकी निर्णय क्षमता और टीमवर्क को भी सशक्त बनाती हैं।
विद्यालय प्रबंधन और आचार्यों ने भी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी विद्यार्थियों को इस प्रकार की प्रतियोगिताओं के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का नाम रोशन कर सकें।
न्यूज़ देखो: शैक्षिक गुणवत्ता की सशक्त मिसाल
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा की यह उपलब्धि झारखण्ड में गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा की एक सशक्त मिसाल है। सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना यह दिखाता है कि सही दिशा और समर्पण से बड़ी सफलता संभव है। यह परिणाम अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि वे शैक्षिक गतिविधियों को गंभीरता से आगे बढ़ाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मेधा और मेहनत से मिलती है पहचान
प्रतियोगिताओं में सफलता केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और भविष्य की दिशा तय करती है। सलडेगा विद्यालय के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया कि निरंतर अभ्यास और अनुशासन से ऊंचे लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है।





