
#खलारी #रांची #सरहुल_पर्व : जरा टोंगरी गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव मनाया गया।
रांची जिले के खलारी प्रखंड अंतर्गत जरा टोंगरी गांव में प्रकृति पर्व सरहुल हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पर्व की शुरुआत पाहन द्वारा झखरा स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई। कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य-गीतों के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर कई गणमान्य अतिथि और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
- जरा टोंगरी गांव, खलारी में सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया।
- पाहन द्वारा झखरा स्थल पर पूजा-अर्चना से कार्यक्रम की शुरुआत।
- सीसीएल वेलफेयर बोर्ड सदस्य अरविंद शर्मा रहे मुख्य अतिथि।
- ढोल-नगाड़ों व मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य।
- बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता और उत्साह।
रांची जिले के खलारी प्रखंड से सटे पिपरवार-चतरा क्षेत्र के जरा टोंगरी गांव में सरहुल पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। यह पर्व आदिवासी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है, जिसमें प्रकृति की पूजा कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।
कार्यक्रम की शुरुआत गांव के झखरा स्थल पर पाहन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। पूजा के दौरान प्रकृति देवताओं से अच्छी फसल, वर्षा और विश्व शांति की प्रार्थना की गई। इसके बाद पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन गया।
झखरा स्थल पर विधि-विधान से हुई पूजा
सरहुल पर्व के मौके पर सबसे पहले झखरा स्थल पर पाहन ने पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस दौरान गांव के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सामूहिक रूप से प्रकृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
पाहन द्वारा की गई पूजा में धरती माता, पेड़-पौधों और प्रकृति शक्तियों से गांव की सुख-समृद्धि की कामना की गई। यह परंपरा आदिवासी समाज की प्रकृति के साथ गहरे संबंध को दर्शाती है।
पारंपरिक नृत्य और गीतों से सजा कार्यक्रम
पूजा-अर्चना के बाद सरहुल पर्व के अवसर पर पारंपरिक नृत्य और गीतों का आयोजन किया गया। ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप पर ग्रामीणों ने जमकर नृत्य किया।
युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी पारंपरिक वेशभूषा में सजकर इस आयोजन में शामिल हुए। जदुर और झूमर जैसे पारंपरिक नृत्यों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
मुख्य अतिथि का पारंपरिक स्वागत
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीसीएल वेलफेयर बोर्ड सदस्य अरविंद शर्मा उपस्थित रहे। उनका स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया।
अरविंद शर्मा ने कहा: “सरहुल पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश देता है, जिसे हमें जीवन में अपनाना चाहिए।”
उन्होंने सभी लोगों से एकजुट होकर पर्यावरण की रक्षा करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अपील की।
अतिथियों का स्वागत और आयोजन की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान सोमर गंझु ने अतिथियों का स्वागत किया और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का पूजन कर समारोह के शुभारंभ की घोषणा की।
इस अवसर पर लोगों ने अच्छी फसल और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की। पूरे आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में कई ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इनमें शोभा कुमारी, रमेश गंझु, विनोद गंझु, ललकु गंझु, सुरेश गंझु, सहंशा गंझु, भद्रेश्वर गंझु, सुकरी देवी, शनिचरी देवी, गीता देवी, मुनिया देवी, रीना देवी, सुशीला देवी, पूजा देवी, गणेश गंझु, उर्मिला देवी सहित अन्य लोग शामिल रहे।
सभी ने मिलकर इस पर्व को भव्य और यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई।

न्यूज़ देखो: परंपरा और प्रकृति के संगम का जीवंत उदाहरण
जरा टोंगरी में मनाया गया सरहुल पर्व आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति गहरी आस्था का जीवंत उदाहरण है। ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं। हालांकि, बदलते समय में इन परंपराओं को संरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है, जिस पर सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति से जुड़े रहें, प्रकृति को बचाएं
सरहुल हमें सिखाता है कि प्रकृति ही जीवन का आधार है और इसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आइए हम भी अपनी परंपराओं को संजोएं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनें। छोटी-छोटी पहल भी बड़े बदलाव ला सकती है।
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