#कोलेबिरा #सरनासरमोलीपूजा : होली से पहले सरना स्थल पर परंपरागत अनुष्ठान संपन्न।
कोलेबिरा प्रखंड के नवाटोली पंचायत अंतर्गत खास नवाटोली गांव में होली पूर्व संध्या पर पारंपरिक सरना सरमोली पूजा संपन्न हुई। गांव के पहान किसटो पाहन और कसटू पाहन ने सरना स्थल पर विधि-विधान से पूजा कर क्षेत्रवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। पूजा के बाद प्रसाद स्वरूप फूल और प्रसादी प्रत्येक घर तक पहुंचाई गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- खास नवाटोली ग्राम, नवाटोली पंचायत में पारंपरिक आयोजन।
- किसटो पाहन और कसटू पाहन ने की सरना सरमोली पूजा।
- क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना।
- घर-घर पहुंचाई गई फूल और प्रसादी।
- ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों की रही सक्रिय उपस्थिति।
कोलेबिरा प्रखंड के नवाटोली पंचायत स्थित खास नवाटोली ग्राम में वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए होली पूर्व संध्या पर सरना सरमोली पूजा का आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान गांव के सरना स्थल पर विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर गांव के पहानों ने सामूहिक रूप से क्षेत्र के लोगों की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।
सरना स्थल पर परंपरागत पूजा अनुष्ठान
गांव के पहान किसटो पाहन एवं कसटू पाहन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सरना स्थल में सरना सरमोली की पूजा की। आदिवासी समाज में सरना स्थल का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। यहां प्रकृति और ग्राम देवताओं की आराधना कर सामुदायिक कल्याण की कामना की जाती है।
पूजा के दौरान ग्रामीणों ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से अनुष्ठान में भाग लिया। पहानों ने प्रकृति, ग्राम देवता और पूर्वजों का स्मरण करते हुए गांव की उन्नति, आपसी सौहार्द और खुशहाली की प्रार्थना की।
किसटो पाहन ने कहा: “हमारी यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सरना सरमोली पूजा के माध्यम से हम पूरे गांव और क्षेत्र की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।”
कसटू पाहन ने कहा: “होली से पहले यह पूजा गांव की एकता और समृद्धि का प्रतीक है। सभी लोग मिलकर इसमें भाग लेते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।”
घर-घर पहुंचाई गई प्रसादी
पूजा के उपरांत प्रसाद के रूप में फूल और प्रसादी गांव के प्रत्येक घर तक पहुंचाई गई। यह परंपरा सामूहिकता और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। ग्रामीणों ने इसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया और एक-दूसरे को होली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। इससे गांव में आपसी संबंध मजबूत होते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति
इस अवसर पर विनोद पाहन, मंगरू पाहन, रतिया पाहन, संजीव पाहन, सनोज पाहन, भाजपा प्रखंड अध्यक्ष अशोक इंदवार, दसरथ लोहरा, सुरेंद्र लोहरा, जया लोहरा, राजेश नायक, सुधीर यादव, रंथू सिंह, प्रकाश सिंह, नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सभी ने मिलकर पूजा में सहभागिता निभाई और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण का संकल्प दोहराया।
परंपरा और संस्कृति का संरक्षण
खास नवाटोली ग्राम में होली पूर्व सरना सरमोली पूजा वर्षों से आयोजित होती आ रही है। यह आयोजन आदिवासी संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का कार्य करता है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि इस परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जा रहा है और युवा वर्ग भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग ले रहा है।
ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक आस्था प्रकट होती है, बल्कि सामाजिक समरसता और सामुदायिक चेतना भी मजबूत होती है।
न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़ाव ही सामाजिक मजबूती की नींव
खास नवाटोली में आयोजित सरना सरमोली पूजा यह दर्शाती है कि आधुनिक दौर में भी ग्रामीण समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ है। सामूहिक पूजा और घर-घर प्रसादी वितरण सामाजिक एकता का मजबूत संदेश देता है। यह जरूरी है कि ऐसी परंपराएं केवल औपचारिकता न बनें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक सहेजकर पहुंचाई जाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी संस्कृति से जुड़ें, एकता का रंग और गहरा करें
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि मेल-मिलाप और परंपराओं को संजोने का अवसर भी है। सरना सरमोली जैसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं और सामूहिक जीवन का महत्व सिखाते हैं।
आइए, अपने गांव और समाज की परंपराओं को जानें और उन्हें आगे बढ़ाएं।
युवा पीढ़ी को भी इन आयोजनों से जोड़ें ताकि सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे।