बानो कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक, बांस शिल्प और पशुपालन पर बनी रणनीति

बानो कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक, बांस शिल्प और पशुपालन पर बनी रणनीति

author Shivnandan Baraik
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#बानो #कृषि_विकास : कृषि नवाचार और ग्रामीण रोजगार पर हुई विस्तृत चर्चा।

सिमडेगा जिले के बानो स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में 19वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि, पशुपालन, बांस आधारित हस्तशिल्प और औषधीय पौधों के विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और जिला कृषि विभाग के अधिकारी सहित कई किसान मौजूद रहे।

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  • कृषि विज्ञान केंद्र बानो में आयोजित हुई 19वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक।
  • ए० जे० आई० निरंजन लाल और माधुरी टोप्पो ने दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन।
  • बांस आधारित हस्तशिल्प इकाइयों को बढ़ावा देने पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा।
  • बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने की रणनीति पर जोर।
  • वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव।
  • औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की दी गई जानकारी।

सिमडेगा जिले के बानो स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को 19वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कृषि, पशुपालन, ग्रामीण उद्योग और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना था।

बैठक का उद्घाटन बिरसा कृषि विश्वविद्यालय कांके, रांची के ए० जे० आई० निरंजन लाल, जिला कृषि पदाधिकारी माधुरी टोप्पो, बीपीएम कुंदन भगत तथा किसान प्रतिनिधि चूड़ामणि यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के बाद कृषि क्षेत्र में बदलती चुनौतियों और संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

बांस आधारित हस्तशिल्प को बढ़ावा देने पर जोर

बैठक में बांस आधारित हस्तशिल्प उद्योग को ग्रामीण रोजगार का मजबूत माध्यम बनाने पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि बांस संसाधन का बेहतर उपयोग कर स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे क्राफ्ट यूनिट स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

कार्यक्रम में इस बात पर भी विचार किया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र और महाविद्यालयों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर लोगों को आधुनिक डिजाइन और मार्केटिंग से जोड़ा जाए। अधिकारियों ने कहा कि यदि बांस आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

पशुपालन और कृत्रिम गर्भाधान पर विस्तृत चर्चा

बैठक में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक से पशुओं की नस्ल में सुधार होगा और पशुपालकों की आय बढ़ेगी।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि पशुपालक आधुनिक तकनीकों का लाभ उठा सकें।

विशेषज्ञों ने कहा: “कृषि और पशुपालन में तकनीकी नवाचार अपनाने से किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।”

वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर हुई चर्चा

बैठक में जंगल और वन क्षेत्रों से मिलने वाले उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि वन उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग बेहतर तरीके से की जाए तो उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सकती है और बाजार में बेहतर मूल्य मिल सकता है।

इस दौरान ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को इससे जोड़ने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।

औषधीय और सुगंधित पौधों पर प्रशिक्षण

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर सात प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन पौधों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर विकल्प बन सकती है।

विशेषज्ञों ने किसानों को कम लागत और अधिक लाभ वाली खेती की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को इस दिशा में प्रशिक्षित करना समय की जरूरत है।

कृषि और ग्रामीण उद्योग पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

बैठक के दौरान कृषि, पशुपालन और कृषि आधारित उद्योगों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खेती, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव पर भी ध्यान देने की सलाह दी। कार्यक्रम में किसानों और अधिकारियों के बीच संवाद का माहौल रहा, जहां कई स्थानीय समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की गई।

कई अधिकारी और किसान रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दुलमु बुडिउली, नेहा भारती, संगीता स्वेता, राजेश बड़ाईक, सुलेन भुइयां सहित कई अधिकारी, कर्मचारी और किसान उपस्थित रहे।

सभी प्रतिभागियों ने कृषि और ग्रामीण विकास को लेकर आयोजित इस बैठक को उपयोगी बताया और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता जताई।

न्यूज़ देखो: तकनीक और प्रशिक्षण से बदल सकती है ग्रामीण तस्वीर

बानो में आयोजित यह बैठक दिखाती है कि कृषि और ग्रामीण विकास अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गया है। बांस हस्तशिल्प, औषधीय पौधे और आधुनिक पशुपालन जैसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशिक्षण और योजनाओं का लाभ वास्तव में गांवों तक पहुंचे। यदि प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर काम करें तो सिमडेगा जैसे जिलों में रोजगार और आय के नए अवसर तेजी से विकसित हो सकते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेती को तकनीक से जोड़ें, गांव को आत्मनिर्भर बनाएं

ग्रामीण विकास तभी संभव है जब किसान नई तकनीकों और नवाचारों से जुड़ें। प्रशिक्षण, जागरूकता और स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग गांवों की आर्थिक स्थिति बदल सकता है। युवाओं और महिलाओं की भागीदारी से कृषि और ग्रामीण उद्योग को नई पहचान मिल सकती है।

यदि आपके क्षेत्र में भी कृषि या स्वरोजगार से जुड़ी कोई पहल चल रही है, तो उसमें भाग लें और दूसरों को भी प्रेरित करें। जागरूक किसान और आत्मनिर्भर गांव ही मजबूत समाज की नींव बनते हैं।

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बानो, सिमडेगा

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