
#सिमडेगा #झारखंड #पर्यावरणजागरूकता : विश्व पुनर्चक्रण दिवस पर छात्रों ने अपशिष्ट से उपयोगी वस्तुएं बनाकर संदेश दिया।
सिमडेगा के सेंट जेवियर्स कॉलेज में 18 मार्च को विश्व पुनर्चक्रण दिवस के अवसर पर भूगोल विभाग द्वारा संगोष्ठी आयोजित की गई। प्रथम वर्ष के छात्रों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक प्रयोग प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
- सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में मनाया गया विश्व पुनर्चक्रण दिवस।
- कार्यक्रम का आयोजन भूगोल विभाग और प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा।
- जिबेनी साबर ने बताया दिवस का महत्व और उद्देश्य।
- छात्रों ने अपशिष्ट से बनाए नवोन्मेषी उपयोगी उत्पाद।
- पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का दिया संदेश।
सिमडेगा स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज में विश्व पुनर्चक्रण दिवस के अवसर पर एक जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के भूगोल विभाग द्वारा किया गया, जिसमें प्रथम वर्ष के स्नातक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत छात्रा जिबेनी साबर के परिचयात्मक भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने विश्व पुनर्चक्रण दिवस के महत्व और इसकी पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिवस हर वर्ष 18 मार्च को मनाया जाता है और इसकी शुरुआत ग्लोबल रीसाइक्लिंग फाउंडेशन द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है।
छात्रों ने दिखाया नवाचार और रचनात्मकता
परिचयात्मक सत्र के बाद विद्यार्थियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया और उन्हें एक व्यावहारिक गतिविधि में शामिल किया गया। इस गतिविधि के तहत छात्रों ने कॉलेज परिसर से विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ एकत्र किए।
इनमें टूटे हुए गमले, अनुपयोगी पानी के पाइप, लकड़ी के तख्ते, सूखे पत्ते और बेकार कागज शामिल थे। इसके बाद प्रत्येक समूह ने इन सामग्रियों के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के नए-नए तरीके खोजे और प्रस्तुत किए।
अपशिष्ट से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण
छात्रों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए कई उपयोगी वस्तुएं तैयार कीं। उन्होंने टूटे हुए गमलों को सुंदर प्लांटर में बदल दिया, जबकि पुराने पाइपों का उपयोग बागवानी के लिए किया गया।
इसी प्रकार लकड़ी के तख्तों को विभिन्न उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित किया गया और सूखे पत्तों से जैविक खाद बनाने के तरीके प्रस्तुत किए गए। इन सभी प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता और पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता साफ झलक रही थी।
टीम वर्क और सीखने का अनोखा अनुभव
इस गतिविधि के दौरान छात्रों ने टीम वर्क के महत्व को भी समझा। सभी समूहों ने मिलकर अपने-अपने विचारों को साझा किया और उन्हें व्यावहारिक रूप दिया।
शिक्षकों ने छात्रों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल सीखने का अवसर देते हैं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि पुनर्चक्रण केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक आदत होनी चाहिए, जिसे हर व्यक्ति अपने जीवन में अपनाए।
शिक्षकों ने कहा: “पुनर्चक्रण को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर ही हम एक बेहतर और स्वच्छ भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”
न्यूज़ देखो: छोटे प्रयास, बड़ा बदलाव
सेंट जेवियर्स कॉलेज का यह आयोजन दर्शाता है कि जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। छात्रों द्वारा किए गए ये छोटे-छोटे प्रयास भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करते हैं। क्या ऐसे कार्यक्रम अन्य शिक्षण संस्थानों में भी बढ़ाए जाएंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पर्यावरण बचाएं, भविष्य संवारें
आज की छोटी पहल कल के बड़े बदलाव की नींव होती है। अगर हम अभी से पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वच्छ दुनिया दे पाएंगे।
आप भी अपने आसपास के अपशिष्ट को सही तरीके से प्रबंधित करें और पुनर्चक्रण को अपनाएं। यह केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है।
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