
#सिमडेगा #नगर_प्रशासन : सामुदायिक शौचालयों की बदहाल स्थिति के बावजूद मासिक भुगतान पर उठे गंभीर प्रश्न।
सिमडेगा नगर क्षेत्र में निर्मित सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इस संबंध में संबंधित विभाग को लिखित आवेदन देकर देख-रेख व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नियमों की अनदेखी के बावजूद प्रत्येक शौचालय पर नियमित भुगतान किया जा रहा है। मामला सार्वजनिक होने के बाद नगर क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
- नगर क्षेत्र सिमडेगा में सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव पर अनियमितता का आरोप।
- विभागीय पत्रांक 1368 (ii) दिनांक 06 सितंबर 2023 का हवाला।
- कुल 07 सामुदायिक शौचालय इकरारनामा के तहत सौंपे जाने की जानकारी।
- जमादारों को सैरात वसूली के साथ निरीक्षण व रख-रखाव की जिम्मेदारी।
- प्रति शौचालय लगभग 18,400 रुपये मासिक भुगतान पर सवाल।
- शौचालयों की खराब जमीनी स्थिति और साफ-सफाई के अभाव का आरोप।
सिमडेगा नगर क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग द्वारा निर्मित सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव की जिम्मेदारी और उस पर किए जा रहे भुगतान को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में संबंधित विभाग को एक लिखित आवेदन सौंपा गया है, जिसमें नियमों की अनदेखी, जमीनी स्तर पर लापरवाही और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया है। आवेदन के सामने आने के बाद नगर क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
किस आधार पर सौंपा गया रख-रखाव का कार्य
आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विभागीय पत्रांक 1368 (ii) दिनांक 06 सितंबर 2023 के अंतर्गत नगर क्षेत्र के कुल 07 सामुदायिक शौचालयों को इकरारनामा के अनुसार रख-रखाव के लिए सौंपा गया था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह था कि शौचालयों की नियमित साफ-सफाई, रख-रखाव और उपयोग योग्य स्थिति बनी रहे। लेकिन आरोप है कि जिन व्यक्तियों को यह जिम्मेदारी दी गई, वे निर्धारित मानकों और विभागीय आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
जमादारों को दोहरी जिम्मेदारी देने पर सवाल
आवेदनकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिन जमादारों को सैरात वसूली का कार्य सौंपा गया है, उन्हीं को सामुदायिक शौचालयों के निरीक्षण और रख-रखाव की जिम्मेदारी भी दे दी गई है। यह व्यवस्था अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। आरोप है कि इस दोहरी जिम्मेदारी के चलते न तो सही ढंग से निरीक्षण हो पा रहा है और न ही शौचालयों की साफ-सफाई एवं रख-रखाव सुनिश्चित किया जा रहा है।
भुगतान प्रक्रिया पर उठे गंभीर प्रश्न
मामले का सबसे गंभीर पहलू भुगतान प्रक्रिया से जुड़ा है। आवेदन में दावा किया गया है कि प्रत्येक सामुदायिक शौचालय के रख-रखाव के नाम पर लगभग 18,400 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब बताई जा रही है। कई स्थानों पर साफ-सफाई का अभाव, दुर्गंध, टूट-फूट और उपयोग में कठिनाई जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जमीनी हकीकत कुछ और है, तो नियमित भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।
जमीनी हकीकत और स्वच्छता की स्थिति
नगर क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई सामुदायिक शौचालयों की स्थिति देखकर यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि वहां नियमित रूप से रख-रखाव का कार्य किया जा रहा है। शौचालयों में पानी की कमी, गंदगी, टूटे दरवाजे और अनुपयोगी सुविधाएं आम बात हो गई हैं। स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियानों के बावजूद यदि सामुदायिक शौचालयों की यह स्थिति है, तो यह न केवल व्यवस्था पर सवाल उठाता है बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सम्मान से भी जुड़ा मुद्दा बन जाता है।
भ्रष्टाचार की आशंका और जांच की मांग
आवेदनकर्ता ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार की ओर इशारा करने वाला बताया है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही और अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने विभाग से यह भी मांग की है कि सुलभ इंटरनेशनल को सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव के नाम पर अब तक कितनी राशि का भुगतान किया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जिम्मेवार लोगों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी।
नगर क्षेत्र में बढ़ती चर्चा और जन प्रतिक्रिया
मामला सामने आने के बाद नगर क्षेत्र में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोग यह जानना चाहते हैं कि यदि हर महीने भारी राशि खर्च की जा रही है, तो शौचालयों की स्थिति दयनीय क्यों है। कई लोगों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
न्यूज़ देखो: स्वच्छता के नाम पर खर्च, लेकिन जवाबदेही नदारद
यह मामला दर्शाता है कि नगर क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था के नाम पर होने वाले खर्चों की निगरानी कितनी जरूरी है। यदि जमीनी स्तर पर सुविधाएं बदहाल हैं और कागजों में सब कुछ दुरुस्त दिखाया जा रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर कार्रवाई करे। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस पर क्या कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वच्छता केवल योजना नहीं, सामूहिक जिम्मेदारी
सामुदायिक शौचालय आम लोगों की बुनियादी जरूरत से जुड़े हैं और उनकी स्थिति सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ऐसी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी बेहद जरूरी है। अगर हम सवाल नहीं उठाएंगे, तो समस्याएं यूं ही बनी रहेंगी।
अपने शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर नजर रखें, जागरूक बनें





