
#सिमडेगा #ओबीसी_आरक्षण : नगर निकाय चुनावों में आरक्षण नहीं मिलने से पिछड़ी जातियों में गहरा आक्रोश।
सिमडेगा जिले में ओबीसी वर्ग को नगर निकाय चुनावों में आरक्षण से वंचित किए जाने के विरोध में पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति ने जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार की शाम मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और पुतला दहन किया गया। आंदोलनकारियों ने इसे सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार बताते हुए 21 जनवरी को धरना प्रदर्शन की घोषणा की।
- ओबीसी आरक्षण शून्य किए जाने के विरोध में पिछड़ी जातियों का प्रदर्शन।
- पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति के बैनर तले मशाल जुलूस।
- प्रिंस चौक से महावीर चौक तक निकाला गया जुलूस।
- सरकार के खिलाफ नारेबाजी और पुतला दहन।
- 21 जनवरी को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर चौक पर धरना प्रदर्शन की घोषणा।
सिमडेगा जिले में ओबीसी वर्ग को नगर निकाय चुनावों में आरक्षण नहीं दिए जाने के फैसले के बाद पिछड़ी जातियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति के बैनर तले एक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने सरकार के निर्णय के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और इसे सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।
जुलूस में शामिल लोगों का कहना था कि ओबीसी समाज लंबे समय से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करता आ रहा है, लेकिन बार-बार उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। आरक्षण शून्य किए जाने का फैसला पिछड़े वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने वाला कदम है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मशाल जुलूस के माध्यम से जताया गया रोष
मशाल जुलूस का नेतृत्व समिति के मुख्य संरक्षक जगदीश साहू एवं अध्यक्ष रामजी यादव ने किया। जुलूस की शुरुआत प्रिंस चौक से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल थे। हाथों में मशाल लिए प्रदर्शनकारी “ओबीसी को उनका हक दो”, “सामाजिक न्याय बहाल करो” जैसे नारों के साथ आगे बढ़ते रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मशाल जुलूस प्रतीक है उस संघर्ष का, जो पिछड़ी जातियां अपने अधिकारों की रक्षा के लिए करने को मजबूर हैं। जुलूस में शामिल महिलाओं ने भी सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि आरक्षण खत्म होने से सामाजिक संतुलन बिगड़ेगा।
महावीर चौक पर पुतला दहन
मशाल जुलूस प्रिंस चौक से होते हुए महावीर चौक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पुतला दहन किया। इस दौरान माहौल पूरी तरह आक्रोशपूर्ण हो गया। वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी वर्ग को आरक्षण से वंचित करना केवल एक वर्ग के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।
अध्यक्ष रामजी यादव ने कहा:
“ओबीसी समाज देश की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यदि हमें राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया गया, तो यह लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करेगा। सरकार को अपना निर्णय अविलंब वापस लेना चाहिए।”
मुख्य संरक्षक जगदीश साहू ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
“आरक्षण खत्म करना सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने जैसा है। पिछड़ी जातियां इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।”
धरना प्रदर्शन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान यह भी घोषणा की गई कि यदि सरकार ने जल्द ही ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। समिति ने 21 जनवरी को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर चौक, सिमडेगा में धरना प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह धरना केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक ओबीसी वर्ग को उनका संवैधानिक अधिकार वापस नहीं मिल जाता। उन्होंने सभी पिछड़ी जातियों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
सामाजिक न्याय का सवाल
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने संविधान में आरक्षण का प्रावधान समाज के वंचित वर्गों को बराबरी का अवसर देने के लिए किया था। ऐसे में ओबीसी आरक्षण को शून्य करना उनके विचारों के भी खिलाफ है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा से बाहर करने की दिशा में जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

न्यूज़ देखो: सामाजिक न्याय बनाम सरकारी निर्णय
सिमडेगा में निकला यह मशाल जुलूस साफ संकेत देता है कि ओबीसी आरक्षण का मुद्दा केवल चुनावी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा गहरा प्रश्न बन चुका है। पिछड़ी जातियों का यह आक्रोश सरकार के लिए चेतावनी है कि संवेदनशील विषयों पर निर्णय लेते समय व्यापक संवाद जरूरी है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार आंदोलन की चेतावनियों को कितनी गंभीरता से लेती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की लड़ाई में एकजुटता जरूरी
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