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सिमडेगा पुलिस की मानवीय पहल, तीन साल से लापता मानसिक रूप से कमजोर युवक को परिवार से मिलाया

#सिमडेगा #मानवीय_पुलिसिंग : तीन वर्ष बाद मिला युवक—पुलिस की पहल से परिवार से पुनर्मिलन हुआ।

सिमडेगा पुलिस ने तीन वर्षों से लापता मानसिक रूप से कमजोर युवक भालेन केरकेट्टा को खोजकर उसके परिजनों से मिलाया। युवक पुरुलिया के आश्रय गृह में रह रहा था, जिसकी जानकारी मिलने पर पुलिस ने समन्वय कर उसे वापस लाया। 2 अप्रैल 2026 को युवक को सकुशल परिवार को सौंप दिया गया। इस पहल से पुलिस की संवेदनशीलता उजागर हुई है।

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  • भालेन केरकेट्टा (40 वर्ष) तीन साल से लापता थे।
  • सिमडेगा पुलिस ने पुरुलिया आश्रम से खोज निकाला
  • 02 अप्रैल 2026 को परिवार से मिलाया गया।
  • टीटांगर थाना क्षेत्र की सिबरिया किरकेट्टा ने दर्ज कराई थी शिकायत
  • पुलिस की मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना

सिमडेगा पुलिस ने एक सराहनीय और संवेदनशील पहल करते हुए तीन वर्षों से लापता एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को उसके परिवार से मिलाने में सफलता हासिल की है। यह घटना पुलिस की मानवता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

तीन वर्ष पूर्व हुआ था लापता

जानकारी के अनुसार, टीटांगर थाना क्षेत्र के गुड़गुड़टोली गांव निवासी सिबरिया किरकेट्टा ने अपने भाई भालेन केरकेट्टा (उम्र लगभग 40 वर्ष) के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

भालेन मानसिक रूप से कमजोर थे और CIP रांची से इलाज कराकर लौटते समय रास्ते में कहीं भटक गए थे।

परिजनों ने बताया: “हमने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया।”

पुलिस ने फिर शुरू की खोजबीन

लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिलने के बाद भी पुलिस ने प्रयास जारी रखा। हाल ही में सिमडेगा पुलिस ने आसपास के जिलों के विभिन्न आश्रय गृहों से संपर्क कर जानकारी जुटानी शुरू की।

पुरुलिया आश्रम में मिला युवक

जांच के दौरान पता चला कि भालेन केरकेट्टा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित ‘अपना घर आश्रम’ में रह रहे हैं। यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

पुलिस अधिकारियों ने कहा: “हमने समन्वय कर युवक को सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की।”

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परिवार से कराया गया पुनर्मिलन

सिमडेगा पुलिस के प्रयासों से 2 अप्रैल 2026 को भालेन केरकेट्टा को उनके परिवार से मिलवाया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें सकुशल परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

भावुक हुआ परिवार

तीन वर्षों बाद अपने बेटे और भाई को पाकर परिवार भावुक हो उठा। उन्होंने पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया और इस पहल की सराहना की।

पुलिस की संवेदनशीलता का उदाहरण

यह घटना दर्शाती है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की मदद के लिए भी तत्पर रहती है।

क्षेत्र में सराहना

सिमडेगा पुलिस की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। लोग इसे पुलिस की मानवीय सोच और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक मान रहे हैं।

न्यूज़ देखो: संवेदनशील पुलिस ही समाज का सहारा

सिमडेगा पुलिस की यह पहल दिखाती है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता के साथ काम करता है, तो समाज में विश्वास बढ़ता है। ऐसे कार्य पुलिस और जनता के बीच संबंधों को मजबूत बनाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मानवता को प्राथमिकता दें

हर व्यक्ति की मदद करना हमारा कर्तव्य है।
जरूरी है कि हम भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएं।
मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।
आइए, हम एक संवेदनशील समाज का निर्माण करें।

अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस प्रेरणादायक पहल को आगे बढ़ाएं।

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Birendra Tiwari

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