
#कुरडेग #स्वास्थ्य_व्यवस्था : विधायक भुषण बाड़ा के हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सहियाओं का रुका मानदेय भुगतान शुरू।
कुरडेग प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं का चार माह से रोका गया मानदेय आखिरकार भुगतान के लिए खोल दिया गया है। यह कार्रवाई सिमडेगा विधायक भुषण बाड़ा के त्वरित हस्तक्षेप के बाद संभव हो सकी। गुरुवार को सहियाओं की शिकायत मिलने पर विधायक ने सीएचसी प्रभारी को कड़ी फटकार लगाई और समयबद्ध भुगतान का आदेश दिया। इसके बाद शुक्रवार से ही भुगतान प्रक्रिया शुरू हो गई, जिससे सहियाओं में राहत और संतोष का माहौल बना।
- कुरडेग प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं का चार माह से रुका मानदेय।
- सीएचसी प्रभारी दिलीप कुमार बेहरा पर भुगतान रोकने का आरोप।
- विधायक भुषण बाड़ा के हस्तक्षेप से शुरू हुई भुगतान प्रक्रिया।
- गुरुवार को शिकायत, शुक्रवार से भुगतान की कार्रवाई।
- महिला जिला अध्यक्ष जोशीमा खाखा ने दी कड़ी चेतावनी।
- सहियाओं ने विधायक के प्रति जताया आभार।
कुरडेग प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं के लिए यह सप्ताह राहत भरा साबित हुआ। महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहीं सहियाओं के चेहरे पर अब मुस्कान लौट आई है। चार माह तक भुगतान रोके जाने के बाद आखिरकार मानदेय की प्रक्रिया शुरू हो गई। यह पूरा घटनाक्रम स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर कई सवाल भी खड़े करता है।
चार माह तक क्यों रोका गया मानदेय
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुरडेग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी दिलीप कुमार बेहरा द्वारा बिना किसी ठोस कारण के स्वास्थ्य सहियाओं का मानदेय पिछले चार महीनों से रोका गया था। इस दौरान सहियाएं लगातार कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
मानदेय रुकने से सहियाओं को घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद लंबे समय तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
विधायक को सौंपी गई लिखित शिकायत
गुरुवार को परेशान होकर स्वास्थ्य सहियाओं ने एकजुट होकर सिमडेगा विधायक भुषण बाड़ा को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में मानदेय रोके जाने की पूरी जानकारी दी गई और शीघ्र समाधान की मांग की गई।
शिकायत मिलते ही विधायक ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत कुरडेग सीएचसी प्रभारी को तलब कर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में दो दिनों के भीतर हर हाल में भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
विधायक की फटकार का दिखा असर
विधायक की सख्ती का असर तुरंत दिखाई दिया। जहां चार महीनों तक भुगतान को लेकर टालमटोल होती रही, वहीं विधायक के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार से ही मानदेय भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस तेजी ने पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए।
स्थानीय लोगों और सहियाओं का कहना है कि जब भुगतान संभव था, तो फिर चार माह तक इसे क्यों रोका गया। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक अहम सवाल सामने रखा है कि जब तक सहियाएं परेशान होती रहीं, तब तक संबंधित अधिकारी निष्क्रिय क्यों रहे। वहीं, जनप्रतिनिधि की फटकार लगते ही अचानक इतनी तेजी से भुगतान प्रक्रिया कैसे शुरू हो गई।
यह मामला दर्शाता है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई होती, तो सहियाओं को महीनों तक संघर्ष नहीं करना पड़ता।
महिला जिला अध्यक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए महिला जिला अध्यक्ष श्रीमती जोशीमा खाखा ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“महिला स्वास्थ्य कर्मियों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई गई, तो हम आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।”
उनके इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सहियाओं में राहत और संतोष
मानदेय भुगतान की प्रक्रिया शुरू होते ही स्वास्थ्य सहियाओं में राहत की लहर दौड़ गई। सहियाओं ने कहा कि लंबे समय बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ है। उन्होंने विधायक भुषण बाड़ा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं होता, तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती।
जनप्रतिनिधि की सक्रियता का संदेश
इस पूरे प्रकरण से यह संदेश भी सामने आया है कि जब जनप्रतिनिधि सजग और संवेदनशील हों, तो अन्याय ज्यादा समय तक नहीं टिकता। विधायक की इस सक्रियता ने उन्हें केवल सदन तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर पीड़ितों की आवाज़ बनने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत किया है।
न्यूज़ देखो: जवाबदेही तय करने की जरूरत
कुरडेग की यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। सहियाएं स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन उनके मानदेय जैसे बुनियादी अधिकारों के साथ लापरवाही चिंताजनक है। विधायक के हस्तक्षेप से समस्या का समाधान तो हुआ, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन को इस मामले से सबक लेने की जरूरत है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सम्मान और अधिकार से ही मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवा
स्वास्थ्य सहियाएं गांव की पहली कड़ी होती हैं।
उनका सम्मान और समय पर भुगतान बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव है।
जब अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठती है, तभी व्यवस्था सुधरती है।





