
#गिरिडीह #प्रवासी_मजदूर : डुमरी के मृतक मजदूर विजय महतो के परिजनों को मुआवजा और सहायता की मांग।
गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की सऊदी अरब में गोली लगने से हुई मौत के तीन महीने बाद भी परिवार को कोई ठोस सहायता नहीं मिली है। इस मामले को लेकर समाजसेवी सिकंदर अली ने मृतक के परिवार के साथ राज्यपाल, मुख्यमंत्री आवास और श्रम आयुक्त को आवेदन सौंपा। उन्होंने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, मुआवजा और सरकारी सहयोग की मांग की। यह मामला विदेशों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
- डुमरी थाना क्षेत्र के प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की सऊदी अरब में मौत।
- घटना को करीब तीन महीने बीतने के बाद भी परिवार को सहायता नहीं।
- समाजसेवी सिकंदर अली ने परिवार के साथ उच्च अधिकारियों को आवेदन दिया।
- राज्यपाल, मुख्यमंत्री आवास और लेबर कमिश्नर से मदद की गुहार।
- मृतक मधगोपाली पंचायत के दूधपनिया गांव का निवासी था।
- प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और मुआवजा का मुद्दा उठाया गया।
गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मधगोपाली पंचायत के दूधपनिया गांव निवासी प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की मौत के बाद उनके परिवार की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सऊदी अरब में काम के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी, लेकिन घटना को लगभग तीन महीने बीत जाने के बावजूद परिजनों को न तो समुचित मुआवजा मिला और न ही कोई ठोस सरकारी सहायता। इसी पीड़ा को सामने लाने के लिए समाजसेवी सिकंदर अली ने पहल की है।
सऊदी अरब में हुई थी प्रवासी मजदूर की मौत
परिजनों के अनुसार विजय कुमार महतो रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए थे, जहां काम के दौरान उन्हें गोली लगने से जान गंवानी पड़ी। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सीमित संसाधनों वाले इस परिवार के लिए कमाने वाले सदस्य की मौत ने आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा कर दिया है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक पहुंची पीड़ा
आज समाजसेवी सिकंदर अली मृतक के परिवार के साथ महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री आवास और श्रम आयुक्त (लेबर कमिश्नर) के कार्यालय पहुंचे और लिखित आवेदन सौंपकर मदद की गुहार लगाई। आवेदन के माध्यम से मृतक के परिजनों को मुआवजा, सरकारी सहायता और विदेश में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
सिकंदर अली ने कहा: “प्रवासी मजदूर देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं, लेकिन संकट के समय उनके परिवारों को बेसहारा छोड़ दिया जाता है। विजय महतो के परिवार को तत्काल सहायता मिलनी चाहिए।”
परिवार की स्थिति और उम्मीद
विजय कुमार महतो के परिवार का कहना है कि अब तक किसी भी स्तर से ठोस सहयोग नहीं मिला है। परिवार न्याय और सम्मानजनक सहायता की उम्मीद में प्रशासन और सरकार की ओर देख रहा है। परिजनों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो परिवार का गुजर-बसर करना बेहद कठिन हो जाएगा।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
यह मामला विदेशों में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। रोजगार के लिए बाहर गए मजदूरों के साथ किसी दुर्घटना या हिंसक घटना की स्थिति में उनके परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया अक्सर लंबी और जटिल हो जाती है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में त्वरित सरकारी हस्तक्षेप जरूरी है।
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विजय कुमार महतो का मामला यह दर्शाता है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके परिवारों के लिए मुआवजा व्यवस्था अभी भी कमजोर है। तीन महीने बीतने के बाद भी सहायता न मिलना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और श्रम विभाग इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रवासी मजदूरों के सम्मान के लिए आवाज उठाएं
देश की तरक्की में प्रवासी मजदूरों का योगदान अमूल्य है और उनके परिवारों की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित सहायता बेहद जरूरी है।
आप भी प्रवासी मजदूरों के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करें। इस खबर को साझा करें, चर्चा को आगे बढ़ाएं और न्याय की मांग को मजबूत बनाएं।



