
#रांची #जयंती_कार्यक्रम : मुख्यमंत्री आवास में पत्रिका विमोचन के साथ दिशोम गुरु के विचारों को किया गया स्मरण।
झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में गुरुजी के विचारों, संघर्ष और जीवन-दर्शन पर आधारित एक विशेष पत्रिका का विधिवत विमोचन हुआ। इस अवसर पर सिमडेगा जिले के युवा समाजसेवी एवं व्यवसायी भरत प्रसाद को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया और उन्हें पत्रिका देकर सम्मानित किया गया। आयोजन का उद्देश्य दिशोम गुरु के सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकार और झारखंडी अस्मिता से जुड़े योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।
- मुख्यमंत्री आवास, रांची में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर विशेष कार्यक्रम।
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में विशेष पत्रिका का विमोचन।
- सिमडेगा के समाजसेवी भरत प्रसाद को आमंत्रण व सम्मान।
- आदिवासी अधिकार, सामाजिक न्याय और झारखंडी अस्मिता पर केंद्रित विचारों का स्मरण।
- दिशोम गुरु के संघर्ष और जीवन-दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर।
झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना के केंद्र में रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती इस वर्ष राज्य स्तर पर गरिमामय तरीके से मनाई गई। रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि गुरुजी का संघर्ष केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी नीति, समाज और जनआंदोलन की दिशा तय करने वाला आधार है। कार्यक्रम में राज्य के शीर्ष नेतृत्व, आमंत्रित अतिथियों और सामाजिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। सिमडेगा जिले के लिए यह अवसर इसलिए भी उल्लेखनीय रहा क्योंकि जिले के युवा समाजसेवी भरत प्रसाद की सहभागिता और सम्मान ने स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूती दी।
मुख्यमंत्री आवास में गरिमामय आयोजन
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु उनके विचारों और संघर्षों को समर्पित विशेष पत्रिका का विमोचन रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में पत्रिका का विधिवत विमोचन किया गया, जिसमें गुरुजी के जीवन-दर्शन, आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए किए गए आंदोलन और झारखंड राज्य निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समाहित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि दिशोम गुरु का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा रहा है, जिसने झारखंडी अस्मिता को पहचान दिलाई।
विशेष पत्रिका का महत्व
विमोचित पत्रिका में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन के विभिन्न चरणों, उनके आंदोलनों, जेल यात्राओं और सामाजिक न्याय के लिए किए गए प्रयासों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को यह समझाना है कि झारखंड आंदोलन किन परिस्थितियों में शुरू हुआ और किन मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ा।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि ऐसी पत्रिकाएं केवल स्मृति का दस्तावेज नहीं होतीं, बल्कि वे विचारों की निरंतरता बनाए रखने का माध्यम बनती हैं। इससे युवाओं को अपने इतिहास से जुड़ने और सामाजिक जिम्मेदारी को समझने में मदद मिलती है।
समाजसेवी भरत प्रसाद की सहभागिता और सम्मान
इस अवसर पर सिमडेगा जिले के युवा समाजसेवी एवं व्यवसायी भरत प्रसाद को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें विशेष पत्रिका देकर सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान सामाजिक सहभागिता और जनहित के कार्यों से जुड़े युवाओं को प्रोत्साहित करने के रूप में देखा जा रहा है।
भरत प्रसाद की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि राज्य स्तर के आयोजनों में जिला स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी महत्व दिया जा रहा है। सिमडेगा जैसे सीमावर्ती और आदिवासी बहुल जिले से प्रतिनिधित्व का यह अवसर स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
दिशोम गुरु के विचारों का पुनः स्मरण
कार्यक्रम के दौरान दिशोम गुरु शिबू सोरेन के आदिवासी अधिकारों, सामाजिक न्याय और झारखंडी अस्मिता के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को स्मरण किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुजी का जीवन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने और वंचित समाज को अधिकार दिलाने के लिए समर्पित रहा।
यह भी कहा गया कि आज के समय में जब सामाजिक और आर्थिक असमानताएं नई चुनौतियों के रूप में सामने आ रही हैं, तब दिशोम गुरु के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
सिमडेगा के लिए विशेष महत्व
सिमडेगा जिले से जुड़े समाजसेवी की इस कार्यक्रम में भागीदारी ने जिले के सामाजिक परिदृश्य को राज्य स्तर पर पहचान दिलाई है। स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले युवाओं और सामाजिक संगठनों के लिए यह संदेश है कि निरंतर सकारात्मक कार्यों से राज्य और समाज दोनों में पहचान बनाई जा सकती है।
इस आयोजन ने यह भी दर्शाया कि झारखंड के विभिन्न जिलों से आने वाली सामाजिक आवाजें राज्य की नीति और विमर्श में स्थान पा रही हैं।
न्यूज़ देखो: विचारों की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित यह कार्यक्रम दिशोम गुरु शिबू सोरेन की विचारधारा को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेष पत्रिका का विमोचन और समाजसेवियों का सम्मान यह दर्शाता है कि राज्य नेतृत्व सामाजिक न्याय और आदिवासी अस्मिता के मुद्दों को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखना चाहता। यह अवसर युवाओं को इतिहास से जोड़ने और भविष्य की दिशा तय करने की प्रेरणा देता है। अब यह देखना अहम होगा कि इन विचारों को नीति और जमीनी कार्यों में कितनी प्रभावी ढंग से उतारा जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विचारों से प्रेरणा, जिम्मेदारी से भविष्य निर्माण
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सामाजिक न्याय की याद दिलाने का अवसर है। ऐसे आयोजन हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करते हैं कि हम अपने समाज और क्षेत्र के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।
आइए, हम गुरुजी के विचारों से प्रेरणा लेकर अपने आसपास सकारात्मक बदलाव की पहल करें। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और झारखंडी अस्मिता व सामाजिक न्याय के इस संदेश को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।





