News dekho specials
Palamau

यज्ञ से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार पाटन के निमिया-टुसरा में सतचंडी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ

#पलामू #पाटन #धार्मिक_आयोजन : रामसागर तालाब परिसर में सतचंडी महायज्ञ के प्रथम दिन निकली भव्य जलयात्रा।

पाटन प्रखंड के ग्राम निमिया-टुसरा स्थित रामसागर तालाब परिसर में गुरुवार 05 फरवरी 2026 को सतचंडी महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हुआ। 1008 श्री जगदाचार्य, श्रीमद् विष्वसेनाचार्य एवं श्री त्रिदण्डी स्वामी महाराज के तत्वावधान में आयोजित इस महायज्ञ के प्रथम दिन भव्य जलयात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य जयशंकर कुमार सिंह उर्फ संग्राम सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • 05 फरवरी 2026 को सतचंडी महायज्ञ के प्रथम दिन निकाली गई भव्य जलयात्रा।
  • निमिया-टुसरा, रामसागर तालाब परिसर बना धार्मिक आयोजन का केंद्र।
  • जयशंकर कुमार सिंह (संग्राम सिंह) ने यज्ञ को मानसिक शांति का माध्यम बताया।
  • 1008 श्री जगदाचार्य, श्री त्रिदण्डी स्वामी महाराज के सान्निध्य में आयोजन।
  • आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों श्रद्धालु कार्यक्रम में हुए शामिल।

पाटन प्रखंड के ग्रामीण अंचल में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजते हुए सतचंडी महायज्ञ का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में प्रारंभ हुआ। ग्राम निमिया-टुसरा स्थित रामसागर तालाब परिसर में गुरुवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और भक्ति गीतों के बीच जलयात्रा निकाली गई, जिसमें पुरुष, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

सतचंडी महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ

सतचंडी महायज्ञ का आयोजन 1008 श्री जगदाचार्य, श्रीमद् विष्वसेनाचार्य एवं श्री त्रिदण्डी स्वामी महाराज के पावन मार्गदर्शन में किया गया है। यज्ञ के प्रथम दिन जलयात्रा के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत की गई। श्रद्धालु कलश लेकर पारंपरिक वेशभूषा में तालाब परिसर से यज्ञ स्थल तक पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्ति गीत, जयघोष और धार्मिक नारे गूंजते रहे।

संग्राम सिंह का संदेश: यज्ञ से मिलती है मानसिक शांति

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित जिला परिषद सदस्य जयशंकर कुमार सिंह (संग्राम सिंह) ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

जयशंकर कुमार सिंह ने कहा: “इस प्रकार के धार्मिक आयोजन से मन को शांति मिलती है और आसपास सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनता है। आज के तनावपूर्ण जीवन में ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का काम करते हैं।”

उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परंपराओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ते हैं।

यज्ञ समिति की सक्रिय भूमिका

सतचंडी महायज्ञ के सफल आयोजन में यज्ञ समिति की भूमिका सराहनीय रही। मौके पर समिति के सभी पदाधिकारी और सदस्य सक्रिय रूप से व्यवस्थाओं में जुटे रहे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, स्वच्छता, जल व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल रहे:

News dekho specials
  • विनोद सिंह, अध्यक्ष
  • देवेन्द्र प्रसाद, उपाध्यक्ष
  • प्रमोद साव, सचिव
  • महेंद्र सिंह, उपसचिव
  • नरेन्द्र कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष
  • नागेंद्र कुमार सिंह, उप कोषाध्यक्ष

इसके अलावा राजपति प्रजापति, प्रदीप पांडे, प्रवीण पांडे, सतेंन सिंह, संजय सिंह, शक्ति गुप्ता सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता आयोजन को सफल बनाने में लगे रहे।

आसपास के गांवों से उमड़ा जनसैलाब

इस धार्मिक आयोजन में केवल निमिया-टुसरा ही नहीं, बल्कि नगेसर, दुल्ही, सखुई, केल्हार, जोड़ कला, कजरमा, नावाडीह, उताकी सहित पाटन प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों ग्रामीण शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं की सहभागिता ने आयोजन को और भव्य बना दिया।

ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से आपसी भाईचारा मजबूत होता है और सामाजिक समरसता बढ़ती है। कई श्रद्धालु दूर-दराज से पैदल चलकर जलयात्रा में शामिल हुए, जो आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाता है।

धार्मिक आयोजनों से सामाजिक एकता को बल

सतचंडी महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर उभरा। आयोजन के दौरान जाति, वर्ग और उम्र की सीमाएं टूटती नजर आईं। सभी श्रद्धालु एक साथ यज्ञ स्थल पर एकत्र होकर धार्मिक क्रियाकलापों में भाग लेते दिखे।

ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से गांवों में सकारात्मक माहौल बनता है और आपसी मतभेद दूर होते हैं। साथ ही युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण संस्कृति और आस्था की सशक्त मिसाल

निमिया-टुसरा में आयोजित सतचंडी महायज्ञ यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की गहरी पकड़ है। जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से ऐसे आयोजनों को सामाजिक समर्थन मिलता है। यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है। आने वाले दिनों में यज्ञ के अन्य अनुष्ठानों पर भी सबकी निगाहें रहेंगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था, एकता और सकारात्मकता का संकल्प

ऐसे धार्मिक आयोजन हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। जब गांव और समाज एक साथ आस्था के मंच पर खड़े होते हैं, तब सामाजिक मजबूती स्वतः बढ़ती है।
आप भी अपने क्षेत्र में होने वाले ऐसे आयोजनों में सहभागिता निभाएं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजें।
इस खबर पर अपनी राय जरूर साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

News dekho specials


IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...
News dekho specials

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: