
#सिमडेगा #शैक्षणिक_संगोष्ठी : जनजातीय जीवन, संस्कृति और समकालीन विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सिमडेगा के सेंट जेवियर्स कॉलेज में जनजातीय अध्ययन विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शोध पत्र प्रस्तुतियों और तकनीकी सत्रों के माध्यम से जनजातीय समाज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसमें संकाय सदस्यों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही। संगोष्ठी का उद्देश्य शोध को बढ़ावा देना और छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
- सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित।
- डॉ. अनिमेष रॉय ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
- डॉ. रोशन बाा ने जनजातीय अध्ययन के महत्व पर जोर दिया।
- तीन तकनीकी सत्रों में विभिन्न शोध विषयों पर चर्चा।
- छात्रों और संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी।
सिमडेगा स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज में जनजातीय अध्ययन विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कॉलेज के रिसर्च सेल के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड के स्वदेशी समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं पर गहन चर्चा करना था। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
संगोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद रिसर्च सेल के समन्वयक एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. अनिमेष रॉय ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
डॉ. अनिमेष रॉय ने कहा: “इस संगोष्ठी का उद्देश्य छात्रों में शोध के प्रति रुचि विकसित करना और जनजातीय अध्ययन को व्यापक दृष्टिकोण से समझाना है।”
प्राचार्य ने बताई शोध की आवश्यकता
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोशन बाा ने मुख्य संबोधन में जनजातीय अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा—
“जनजातीय समाज के अध्ययन से हमें उनकी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को समझने का अवसर मिलता है, जो समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।”
उन्होंने छात्रों को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
तीन समूहों में आयोजित तकनीकी सत्र
संगोष्ठी के दौरान तीन अलग-अलग तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
प्रथम सत्र
सेमिनार हॉल में आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने की। इसमें छोटानागपुर क्षेत्र में काला जादू और जनजातीय छात्रों में वित्तीय साक्षरता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
द्वितीय सत्र
कक्षा संख्या 10 में आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. राधा महली ने की। इसमें जनजातीय व्यंजनों की गैस्ट्रो-पॉलिटिक्स, मुंडा जनजाति का इतिहास और पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।
तृतीय सत्र
भूगोल डिजिटल क्लासरूम में आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. अनिरुद्ध प्रसाद ने की। इसमें मुंडा रीति-रिवाज, UPI का प्रभाव और उपभोक्ता व्यवहार जैसे समकालीन विषयों पर चर्चा हुई।
छात्रों की अनिवार्य भागीदारी
संगोष्ठी की एक विशेषता यह रही कि सेमेस्टर VII के छात्रों की भागीदारी अनिवार्य थी। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि यह अनुभव छात्रों के लिए भविष्य में शोध कार्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
समापन सत्र में प्रस्तुत हुई रिपोर्ट
अंतिम दिन आयोजित विदाई सत्र में सभी तकनीकी सत्रों के समन्वयकों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में हेमरोम मार्शल, नारायण साई सहित तकनीकी टीम, संकाय सदस्य और एनएसएस स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शोध और शिक्षा का संगम
यह संगोष्ठी छात्रों के लिए एक ऐसा मंच बनी, जहां उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत किए और नए विषयों पर चर्चा की। इससे उनकी शोध क्षमता और ज्ञान में वृद्धि हुई।
न्यूज़ देखो: शोध से ही आगे बढ़ेगा समाज
सिमडेगा में आयोजित यह संगोष्ठी यह दर्शाती है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि शोध और विचार-विमर्श का भी माध्यम है। जनजातीय अध्ययन जैसे विषयों पर चर्चा समाज को समझने और विकास की दिशा तय करने में मदद करती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
ज्ञान बढ़ाएं, शोध की ओर बढ़ें
शिक्षा का असली उद्देश्य ज्ञान को विस्तार देना है।
शोध और अध्ययन से ही नई सोच और समाधान निकलते हैं।
छात्रों को चाहिए कि वे ऐसे अवसरों का लाभ उठाएं और खुद को विकसित करें।
ज्ञान ही भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।
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