संस्कार और शिक्षा का संगम बना सलडेगा का मातृ सम्मेलन, बच्चों की उपलब्धियों के साथ मातृशक्ति का सम्मान

संस्कार और शिक्षा का संगम बना सलडेगा का मातृ सम्मेलन, बच्चों की उपलब्धियों के साथ मातृशक्ति का सम्मान

author Birendra Tiwari
113 Views Download E-Paper (11)
#सलडेगा #मातृ_सम्मेलन : सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में माताओं और मेधावी छात्रों को सम्मान मिला।

सिमडेगा के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन सह वार्षिक परीक्षाफल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा ने माताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। मेधावी विद्यार्थियों और 100% उपस्थिति वाले छात्रों की माताओं को सम्मानित किया गया। आयोजन ने शिक्षा और संस्कार के महत्व को रेखांकित किया।

Join WhatsApp
  • सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में भव्य कार्यक्रम आयोजित।
  • डॉ. आशा लकड़ा ने मातृशक्ति और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर दिया।
  • मेधावी छात्रों की माताओं को सम्मानित किया गया।
  • 100% उपस्थिति वाले छात्रों के परिवारों को भी मिला सम्मान।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्सवमय माहौल बना।

सिमडेगा के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सोमवार को मातृ सम्मेलन सह वार्षिक परीक्षाफल वितरण कार्यक्रम अत्यंत भव्य और भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव मनाया, बल्कि मातृशक्ति के सम्मान और संस्कारयुक्त शिक्षा के महत्व को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का आयोजन वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावक, विद्यार्थी और गणमान्य लोग शामिल हुए।

दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा (राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य एवं पूर्व मेयर, रांची) सहित अन्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती, भारत माता एवं ॐ के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया गया।

इस दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।

माताओं की भूमिका पर विशेष जोर

अपने प्रेरणादायी संबोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने कहा—

“माताएं बच्चों के चरित्र निर्माण की आधारशिला होती हैं और संस्कारयुक्त शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।”

उन्होंने बच्चों के जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने सामूहिक गीत, नृत्य और आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी का मन मोह लिया। आचार्याओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने वातावरण को और अधिक मधुर बना दिया।

मेधावी छात्रों और माताओं का सम्मान

समारोह में वार्षिक परीक्षाफल घोषित किया गया और प्रत्येक कक्षा के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की माताओं को सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही 100% उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों—रितिका कुमारी, रविन उरांव, नैतिक कुमार, सृष्टि कुमारी, तमन्ना नाग, पुनिका कुमारी, खुशबू कुमारी, आकाश प्रसाद, आसयानी टोप्पो, नंदनी कुमारी, कोमल रानी बेसरा, प्रतीक नाग—की माताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

प्रोत्साहन राशि और सहयोग

विद्यालय के संरक्षक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने सभी कक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति

कार्यक्रम में अनिल प्रसाद, कृष्ण चंद्र दोराईबुरु, अशोक बड़ाईक, सत्यजीत कुमार, संतोष दास, विद्या बड़ाईक, चंदेश्वर मुण्डा, संजीत कुमार, सुदर्शन सिंह, मुरारी प्रसाद, आशा देवी, बसंत नारायण मांझी, अनिरुद्ध कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अनुशासन और संस्कार का अद्भुत उदाहरण

कार्यक्रम का प्रत्येक क्षण अनुशासन, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक प्रस्तुत कर रहा था। अंत में प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

प्रेरणादायी आयोजन

यह आयोजन केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि मातृशक्ति के सम्मान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में संस्कार का महत्व

सलडेगा का यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कार और चरित्र निर्माण का आधार भी है। माताओं को सम्मानित करना इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मातृशक्ति का सम्मान, उज्ज्वल भविष्य का निर्माण

हर बच्चे की सफलता के पीछे मां का योगदान सबसे बड़ा होता है।
संस्कार और शिक्षा का संतुलन ही जीवन को सही दिशा देता है।
आइए, हम सभी माताओं के योगदान को सम्मान दें और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
यही एक मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव है।

अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस प्रेरणादायक संदेश को आगे बढ़ाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

सिमडेगा

🔔

Notification Preferences

error: