एनपीयू के अंगीभूत कॉलेजों से BCA BBA हटाने के प्रस्ताव पर छात्र संगठनों का तीखा विरोध, आजसू ने दी आंदोलन की चेतावनी

एनपीयू के अंगीभूत कॉलेजों से BCA BBA हटाने के प्रस्ताव पर छात्र संगठनों का तीखा विरोध, आजसू ने दी आंदोलन की चेतावनी

author News देखो Team
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#पलामू #छात्र_विरोध : अंगीभूत कॉलेजों से व्यावसायिक पाठ्यक्रम शिफ्ट करने के प्रस्ताव को बताया छात्रहित के खिलाफ।

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालयों से BCA और BBA पाठ्यक्रम हटाकर विश्वविद्यालय परिसर में शिफ्ट करने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। आजसू छात्र संघ ने इस निर्णय को छात्र-विरोधी बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। छात्र नेताओं का कहना है कि इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

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  • नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के प्रस्ताव का विरोध तेज।
  • GLA कॉलेज, जनता शिवरात्रि कॉलेज, YSNM महिला कॉलेज प्रभावित।
  • BCA और BBA पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में शिफ्ट करने की योजना।
  • आजसू छात्र संघ ने बताया छात्र-विरोधी फैसला।
  • आंदोलन की चेतावनी, जिम्मेदारी प्रशासन की बताई।

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों में वर्षों से चल रहे BCA और BBA जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय परिसर में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर छात्र राजनीति गरमा गई है। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद छात्रों और छात्र संगठनों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।

आजसू छात्र संघ ने इस निर्णय के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए इसे सीधे तौर पर छात्रहित के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि अंगीभूत कॉलेजों में सीमित संसाधनों के बावजूद इन पाठ्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है, ऐसे में इन्हें हटाने का कोई औचित्य नहीं है।

किन कॉलेजों से हटाने की है योजना

प्रस्ताव के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा GLA कॉलेज, जनता शिवरात्रि कॉलेज और YSNM महिला कॉलेज जैसे अंगीभूत महाविद्यालयों में संचालित BCA एवं BBA पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय परिसर में शिफ्ट करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इस खबर के सामने आते ही छात्रों में असमंजस और आक्रोश का माहौल बन गया है।

छात्रों का कहना है कि इन कॉलेजों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। विश्वविद्यालय परिसर में शिफ्टिंग से उन्हें आवागमन, रहने और अन्य खर्चों का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।

आजसू छात्र संघ का कड़ा बयान

आजसू छात्र संघ के विश्वविद्यालय प्रभारी राणा हिमांशु सिंह ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“अंगीभूत कॉलेजों में वर्षों से सुचारू रूप से चल रहे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को हटाना पूरी तरह छात्र-विरोधी निर्णय है। इससे हजारों छात्रों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि इन पाठ्यक्रमों के हटने से न केवल छात्रों को नुकसान होगा, बल्कि संबंधित कॉलेजों की शैक्षणिक पहचान और गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था पर असर

छात्र संघ का आरोप है कि BCA और BBA जैसे कोर्स अंगीभूत कॉलेजों की शैक्षणिक रीढ़ हैं। इनके हटने से कॉलेजों में नामांकन घटेगा, शिक्षकों की भूमिका प्रभावित होगी और शैक्षणिक माहौल कमजोर पड़ेगा। साथ ही महिला कॉलेज से BBA या BCA हटाने से छात्राओं की उच्च शिक्षा तक पहुंच और भी सीमित हो जाएगी।

आंदोलन की चेतावनी

राणा हिमांशु सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा:

“यदि कुलपति महोदय इस फैसले को लागू करते हैं तो आजसू छात्र संघ चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।”

उन्होंने मांग की कि छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रस्ताव को अविलंब वापस लिया जाए और सभी पाठ्यक्रम पूर्ववत संबंधित अंगीभूत कॉलेजों में ही संचालित किए जाएं।

छात्रों में बढ़ता असंतोष

इस मुद्दे को लेकर छात्रों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन बिना जमीनी हकीकत समझे ऐसे फैसले ले रहा है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि किसी भी स्तर पर छात्र प्रतिनिधियों से परामर्श नहीं किया गया।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में फैसले छात्रों की सहमति से जरूरी

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय का यह प्रस्ताव बताता है कि उच्च शिक्षा में लिए जाने वाले फैसलों का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में बिना व्यापक विमर्श के किसी भी पाठ्यक्रम को शिफ्ट करना सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते संवाद नहीं हुआ तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

छात्रहित सर्वोपरि, शिक्षा से समझौता नहीं

शिक्षा केवल डिग्री नहीं, भविष्य की नींव होती है।
छात्रों की आवाज़ को अनदेखा करना समाधान नहीं है।
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