पांकी में छात्रा की मौत से मचा हड़कंप, लापरवाही के आरोपों के बीच जांच की मांग तेज

पांकी में छात्रा की मौत से मचा हड़कंप, लापरवाही के आरोपों के बीच जांच की मांग तेज

author News देखो Team
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#पांकी #छात्रामौतमामला : छह वर्षीय बच्ची की मौत पर परिजनों में आक्रोश — जांच की मांग तेज हुई।

पलामू के पांकी में छह वर्षीय छात्रा अशरती कुमारी की मौत के बाद क्षेत्र में सियासी और सामाजिक हलचल बढ़ गई है। भाजपा नेत्री मंजुलता दुबे ने परिजनों से मिलकर घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज में लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। मामले में स्कूल और अस्पताल प्रबंधन के अलग-अलग बयान से जांच की जरूरत और बढ़ गई है।

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  • अशरती कुमारी (6 वर्ष) की इलाज के दौरान मौत से क्षेत्र में आक्रोश।
  • मंजुलता दुबे ने परिजनों से मिलकर न्याय की मांग की।
  • चांदो आवासीय विद्यालय, बसडीहा में रहकर कर रही थी पढ़ाई।
  • स्कूल और अस्पताल प्रबंधन के अलग-अलग बयान, जांच के घेरे में मामला।
  • परिजनों और स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया।
  • आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल।

पलामू जिले के पांकी प्रखंड में एक छह वर्षीय छात्रा की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। रतनपुर पंचायत के इरगू टोला तेतरखाड़ निवासी अशरती कुमारी, जो बसडीहा स्थित चांदो आवासीय विद्यालय में रहकर पढ़ाई कर रही थी, उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में गहरा शोक और आक्रोश है, जबकि स्थानीय लोग भी मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं।

परिजनों से मिलीं मंजुलता दुबे, उठाए गंभीर सवाल

भाजपा नेत्री सह श्री राम सेवा समिति की सचिव फाइटर मंजुलता दुबे ने मृत बच्ची के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान उन्होंने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए प्रशासन और संबंधित जिम्मेदारों पर सवाल खड़े किए।

मंजुलता दुबे ने कहा: “हर बच्चे का जीवन अनमोल होता है, ऐसी लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

इलाज में लापरवाही के आरोप

जानकारी के अनुसार, बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे पांकी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना को लेकर अब इलाज में लापरवाही के आरोप सामने आ रहे हैं।

स्कूल के शिक्षक का कहना है कि अस्पताल में उस समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे और केवल स्टाफ द्वारा इलाज किया जा रहा था, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

अस्पताल और स्कूल के बीच बयानबाजी

दूसरी ओर अस्पताल के डॉक्टर वीरेंद्र ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्ची को अस्पताल में छोड़कर शिक्षक चले गए थे। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल की ओर से इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई।

डॉक्टर वीरेंद्र ने कहा: “बच्ची को अस्पताल में लाकर छोड़ दिया गया था, लेकिन उसके साथ कोई अभिभावक या शिक्षक मौजूद नहीं थे।”

दोनों पक्षों के अलग-अलग बयान सामने आने के बाद मामला और उलझ गया है, जिससे निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, न्याय की मांग

घटना के बाद बच्ची के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद पांकी क्षेत्र में संचालित आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि इन विद्यालयों में बच्चों को पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

मंजुलता दुबे ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी है।

न्यूज़ देखो: सवालों के घेरे में व्यवस्था

पांकी की यह घटना केवल एक दुखद हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। एक मासूम बच्ची की मौत ने स्कूल और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरी है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच करे और दोषियों को सजा दे। क्या इस घटना के बाद आवासीय विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मासूमों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी

बच्चे हमारे समाज का भविष्य होते हैं, उनकी सुरक्षा और देखभाल सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण दे पा रहे हैं।

आइए, हम सभी मिलकर बच्चों की सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था के लिए आवाज उठाएं। प्रशासन से जवाब मांगें और जिम्मेदार लोगों को कटघरे में लाएं।

अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए एकजुट हों।

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