
#छतरपुर #पलामू #बाल_विवाह : कार्यशाला में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा एवं समाज कल्याण विभाग के निर्देश पर छतरपुर प्रखंड परिसर में 7 जनवरी 2026 को अनुमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई। इस कार्यक्रम में बाल विवाह उन्मूलन और डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम पर विशेष चर्चा की गई। कार्यशाला में विभिन्न प्रखंडों के अधिकारियों और धर्मगुरुओं ने भाग लिया। इस पहल को ग्रामीण समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया।
- कार्यशाला का उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान ने किया।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम छतरपुर प्रखंड परिसर में संपन्न हुआ।
- बाल विवाह उन्मूलन हेतु केंद्र सरकार का 100 दिवसीय अभियान संचालित।
- सूचना देने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 महिला हेल्पलाइन 181 पुलिस हेल्पलाइन 112 नंबर जारी।
- डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
- अंत में सभी ने बाल विवाह मुक्त झारखंड की शपथ ली।
पलामू जिले के छतरपुर अनुमंडल मुख्यालय में आयोजित यह कार्यशाला सामाजिक सुधार की दिशा में एक सार्थक और प्रभावी कदम साबित हुई। राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन में छतरपुर, पिपरा, नौडीहा बाजार, हरिहरगंज सहित आसपास के सभी प्रखंडों से आए अधिकारियों, मुखिया संघ के प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कर्मियों, पंचायत सचिवों तथा स्थानीय धर्मगुरुओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यशाला के दौरान बाल विवाह, नशा उन्मूलन, महिलाओं के अधिकार और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को शपथ ग्रहण के साथ समापन तक पहुँचाया गया।
कार्यशाला का भव्य उद्घाटन
छतरपुर प्रखंड परिसर में आयोजित प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान, मुखिया संघ अध्यक्ष, बीडीओ छतरपुर, बीडीओ पिपरा, बीडीओ नौडीहा बाजार, बीडीओ हरिहरगंज तथा राज्य समन्वयक अमित कुमार एवं विभिन्न धर्मगुरुओं द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक बना। उद्घाटन सत्र को गरिमामय माहौल में संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का संचालन शालिनी श्रीवास्तव ने किया।
बाल विवाह उन्मूलन पर विशेष चर्चा
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान ने अपने संबोधन में बताया कि बाल विवाह उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार बालिका की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और बालक की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम आयु में विवाह कराना एक गंभीर अपराध है और ऐसा करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने सभी उपस्थित प्रतिनिधियों, मुखिया और धर्मगुरुओं से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस कानून का पालन सुनिश्चित कराएँ।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने कहा: “बाल विवाह केवल कानूनी अपराध ही नहीं बल्कि एक बड़ी सामाजिक बुराई है, जिसे समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर आगे आना होगा।”
हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों द्वारा बाल विवाह की सूचना देने के लिए कई महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। बताया गया कि कहीं भी इस प्रकार की घटना सामने आने पर तुरंत—
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
- महिला हेल्पलाइन 181
- पुलिस हेल्पलाइन 112
- पुलिस सहायता 112
पर संपर्क कर सूचना दी जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि समय पर सूचना मिलने से प्रशासन त्वरित कार्रवाई कर बच्चों का भविष्य बचा सकता है। यह अपील पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।
डायन प्रथा पर कानूनी प्रावधान
बीडीओ हरिहरगंज ने शिविर में उपस्थित लोगों को डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करना, अपमानित करना या हिंसा करना पूरी तरह दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों को जेल और जुर्माने दोनों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया है।
बीडीओ हरिहरगंज ने कहा: “ग्रामीण क्षेत्रों में फैली इस कुरीति को शिक्षा और कानून के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है।”
बाल विवाह और सामाजिक सशक्तिकरण पर जोर
बीडीओ छतरपुर आशीष कुमार साहू ने महिलाओं के प्रति किसी भी प्रकार की हिंसा एवं अमानवीय कृत्यों को समाज के लिए घातक बताया।
उन्होंने कहा: “बाल विवाह गंभीर सामाजिक बुराई एवं कानूनन अपराध है। दोषियों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना एवं दो वर्ष तक का कारावास का प्रावधान है।”
मिशन शक्ति और महिला कल्याण योजनाएँ
यूनिसेफ के रिसोर्स पर्सन द्वारा कार्यशाला में मिशन शक्ति के तहत संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इसमें मुख्य रूप से—
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
- सखी वन स्टॉप सेंटर
- महिला हेल्पलाइन 181
- शक्ति सदन
- पालना योजना
जैसी सेवाओं पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि इन योजनाओं के अंतर्गत पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को चिकित्सीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुलिस सहायता, विधिक सहायता तथा सामाजिक पुनर्वास की सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। इन योजनाओं को ग्रामीण समाज के लिए बहुत उपयोगी बताया गया।
किशोरी समृद्धि और कन्यादान योजना
बीडीओ नौडीहा बाजार ने सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना की जानकारी देते हुए बताया कि झारखंड सरकार द्वारा कक्षा 8 से 12 तक की किशोरियों को पढ़ाई जारी रखने हेतु प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत योग्य बालिकाओं को एकमुश्त ₹40,000 की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही कन्यादान योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में ₹30,000 की आर्थिक मदद दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना और उनके भविष्य को सुरक्षित करना है।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना
बीडीओ पिपरा द्वारा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को इस योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त कर सकें। यह जानकारी महिलाओं के बीच खास तौर पर साझा की गई।
नुक्कड़ नाटक द्वारा जागरूकता
कार्यशाला में मासूम आर्ट ग्रुप द्वारा नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर बाल विवाह के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कम उम्र में विवाह से बच्चों की शिक्षा छूट जाती है, स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और उनका समग्र विकास रुक जाता है। इस प्रस्तुति ने ग्रामीणों और कर्मियों को भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख दिया।
शपथ ग्रहण के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह मुक्त झारखंड बनाने की शपथ दिलाई गई। धर्मगुरुओं, समाजसेवियों और अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस सामाजिक बुराई के खिलाफ़ मजबूती से कार्य करेंगे। दुआ और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।
समाज की भूमिका पर जोर
कार्यशाला में उपस्थित धर्मगुरुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि बाल विवाह और नशा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास काफी नहीं हैं। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, शिक्षा का प्रसार और युवाओं का सशक्तिकरण सबसे आवश्यक हथियार हैं। उन्होंने कहा कि यदि गांव-गांव में लोग सतर्क और सजग हो जाएं तो ऐसी बुराइयों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है।

न्यूज़ देखो: सामाजिक सुधार का मजबूत मंच
यह खबर दर्शाती है कि पलामू जिले में प्रशासनिक स्तर पर सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अनुमंडल स्तरीय यह कार्यशाला बाल विवाह उन्मूलन और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक प्रभावी संवाद मंच बना। अधिकारियों द्वारा हेल्पलाइन नंबरों और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना सराहनीय कदम है। क्या इस मुहिम को और व्यापक स्तर पर पंचायतों में भी चलाया जाएगा, यह देखने योग्य होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग अवाम ही बनाएगी बाल विवाह मुक्त झारखंड
छतरपुर में आयोजित यह कार्यशाला पूरे अनुमंडल के लिए प्रेरणादायक पहल रही। समाज के हर वर्ग को बाल विवाह जैसी बुराई के खिलाफ़ एकजुट होकर आगे आना होगा। अपने गांव, मोहल्ले और पंचायत में इस संदेश को फैलाएं कि निर्धारित आयु से पहले विवाह कराना अपराध है। बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित भविष्य देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
नशा और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें। इस खबर पर अपनी महत्वपूर्ण राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें और इसे अधिक से अधिक साझा करें। आपकी एक छोटी पहल किसी बच्चे का जीवन बदल सकती है।





