
#केरसई #शिक्षा_संवाद : पीटीएम में नामांकन, ड्रॉपआउट और रोजगार विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में 23 से 28 मार्च तक चतुर्थ अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित की गई। इस दौरान शिक्षा और रोजगार के संतुलन पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में अभिभावकों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास और विद्यालय-समुदाय समन्वय को मजबूत करना था।
- केरसई प्रखंड के विद्यालयों में पीटीएम का आयोजन।
- 23 से 28 मार्च तक चला सप्ताहभर अभियान।
- “रोजगार और शिक्षा का संतुलन” रहा मुख्य विषय।
- अभिभावक, शिक्षक और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी।
- ड्रॉपआउट, नामांकन और निपुण भारत मिशन पर जोर।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में शिक्षा के स्तर को सुधारने और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से ‘चतुर्थ अभिभावक-शिक्षक बैठक’ (PTM) का आयोजन किया गया। यह अभियान 23 मार्च से 28 मार्च तक चला, जिसमें विभिन्न विद्यालयों में उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
इस आयोजन ने अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद को मजबूत किया और शिक्षा के प्रति जागरूकता को नई दिशा दी।
सामुदायिक सहभागिता बनी मुख्य आधार
बैठक में पिरामल फाउंडेशन की प्रतिनिधि इशिका गुप्ता, बागडेगा की मुखिया, विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्य, प्रधानाध्यापक, छात्र-छात्राएं और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
आयोजकों ने कहा: “विद्यालय और समुदाय का समन्वय ही बच्चों के विकास का आधार है।”
शिक्षा और रोजगार का संतुलन
इस बार बैठक का मुख्य विषय “रोजगार और शिक्षा का संतुलन” रखा गया। इस पर विस्तार से चर्चा करते हुए बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने की रणनीतियों पर विचार किया गया।
नामांकन और ड्रॉपआउट पर फोकस
बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि—
- सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन हो
- ड्रॉपआउट दर शून्य हो
- बच्चों को नियमित विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया जाए
बाल संसद और स्व-अध्ययन पर चर्चा
बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए बाल संसद की भूमिका पर चर्चा की गई। साथ ही स्व-अध्ययन की आदत को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार किया गया।
सरकारी योजनाओं की जानकारी
बैठक में अभिभावकों को विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिनमें—
- मध्याह्न भोजन (MDM)
- यूनिफॉर्म
- छात्रवृत्ति
शामिल हैं।
निपुण भारत मिशन पर जोर
बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) पर विशेष जोर दिया गया।
सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा
कार्यक्रम में शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिनमें—
- बाल विवाह रोकथाम
- POCSO अधिनियम के प्रति जागरूकता
- विद्यालय स्वच्छता
- खेलकूद गतिविधियां
शामिल हैं।
एक शिक्षक ने कहा: “शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है, तभी बच्चों का समग्र विकास संभव है।”
अभिभावकों और शिक्षकों का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया।
आयोजन की सराहना
जनप्रतिनिधियों और फाउंडेशन के सदस्यों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में सहायक हैं।
न्यूज़ देखो: शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी की अहम भूमिका
केरसई में आयोजित यह पीटीएम दिखाता है कि जब अभिभावक, शिक्षक और समाज मिलकर काम करते हैं, तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है। लेकिन इस पहल को लगातार जारी रखना ही इसकी असली सफलता होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों के भविष्य के लिए मिलकर करें प्रयास
बच्चों की शिक्षा केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
जरूरी है कि अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों को सही दिशा दें।
छोटी-छोटी कोशिशें ही बड़े बदलाव लाती हैं।
आइए, हम सभी मिलकर शिक्षा को मजबूत बनाएं।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस सकारात्मक पहल को आगे बढ़ाएं।






