
#हुसैनाबाद #अंधविश्वास_मामला : विद्यालय के पास तांत्रिक अनुष्ठान—बलि और मोटी रकम वसूली पर विवाद।
पलामू के हुसैनाबाद क्षेत्र में अंधविश्वास से जुड़े एक मामले ने चिंता बढ़ा दी है, जहां कथित तांत्रिक अनुष्ठान में पशु बलि और धन वसूली के आरोप लगे हैं। घटना विद्यालय परिसर के पास होने से शैक्षणिक माहौल प्रभावित होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की है। मामला सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है।
- नागेशर भगत पर तांत्रिक अनुष्ठान और बलि का आरोप।
- मुर्गा, बकरा और सुअर की सरेआम बलि दिए जाने की बात।
- श्रद्धालुओं से ₹15,000 से ₹40,000 तक वसूली का आरोप।
- विद्यालय परिसर के पास आयोजन, शिक्षा प्रभावित।
- ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड के काजरात क्षेत्र से अंधविश्वास और तांत्रिक गतिविधियों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां कथित तौर पर एक तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर पशु बलि और धन वसूली की घटनाओं ने स्थानीय लोगों को चिंतित कर दिया है।
यह पूरा घटनाक्रम एक विद्यालय परिसर के समीप होने से मामला और संवेदनशील बन गया है, जहां बच्चों के शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है।
तांत्रिक अनुष्ठान में बलि का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, नागेशर भगत नामक व्यक्ति द्वारा पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार और गुरुवार को तांत्रिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस दौरान ढोल-सिंघा और पचरा गायन के साथ धार्मिक माहौल बनाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है: “दर्जनों श्रद्धालु मुर्गा, बकरा और सुअर लेकर पहुंचे और उनकी सरेआम बलि दी गई।”
मोटी रकम वसूली का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि इस अनुष्ठान में शामिल प्रत्येक व्यक्ति से ₹15,000 से ₹40,000 तक की राशि वसूली गई। यह राशि पूजा और झाड़-फूंक के नाम पर ली गई।
एक ग्रामीण ने कहा: “गरीब लोगों को डर दिखाकर उनसे पैसे वसूले जा रहे हैं।”
विद्यालय के पास गतिविधियों से परेशानी
यह पूरा आयोजन विद्यालय परिसर के समीप किया जा रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। रोजाना झाल-मजीरा बजाकर पचरा गाने और झाड़-फूंक की गतिविधियों से शैक्षणिक वातावरण बाधित हो रहा है।
ग्रामीणों ने चिंता जताई कि इसका बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अंधविश्वास का पुराना इतिहास
हुसैनाबाद क्षेत्र में पहले भी अंधविश्वास से जुड़ी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
- दंगवार गांव में तांत्रिक की पिटाई के बाद मौत
- शिवा बिगहा गांव में अंधविश्वास के कारण एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या
इन घटनाओं ने पहले ही क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना दिया था।
प्रशासन पर उठे सवाल
इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद खुलेआम इस तरह की गतिविधियां होने से स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा: “यदि विद्यालय के पास ही ऐसे कृत्य होंगे, तो शिक्षा का क्या महत्व रह जाएगा?”
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
सामाजिक चिंता का विषय
यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि समाज में फैलते अंधविश्वास और उसके दुष्प्रभाव का उदाहरण है। इससे सामाजिक और शैक्षणिक दोनों स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
न्यूज़ देखो: अंधविश्वास पर लगाम जरूरी
हुसैनाबाद का यह मामला दिखाता है कि अंधविश्वास आज भी समाज में गहराई तक फैला हुआ है। जब यह शिक्षा और बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने लगे, तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। अब प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें, अंधविश्वास से दूर रहें
अंधविश्वास समाज को पीछे ले जाता है।
जरूरी है कि हम शिक्षा और विज्ञान को अपनाएं।
गलत प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
आइए, हम एक जागरूक और वैज्ञानिक सोच वाला समाज बनाएं।
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