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बरवाडीह में जननायक शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया

#बरवाडीह #शहादत_दिवस : सैकड़ों लोगों ने माल्यार्पण कर संघर्ष और सामाजिक न्याय का संकल्प दोहराया।

बरवाडीह में भाकपा (माले) के जननायक शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस 16 जनवरी 2026 को संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। पचमुखी मंदिर परिसर से संकल्प मार्च निकालकर अंबेडकर चौक तक सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में सैकड़ों महिला–पुरुष शामिल हुए और सामाजिक न्याय, लोकतंत्र व श्रमिक अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया। यह आयोजन राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

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  • 16 जनवरी 2026 को बरवाडीह में शहादत दिवस का आयोजन।
  • पचमुखी मंदिर परिसर में माल्यार्पण और पुष्पांजलि।
  • संकल्प मार्च मेन बाजार होते हुए अंबेडकर चौक तक।
  • मनरेगा, पेसा और वनाधिकार कानून को लेकर मुखर नारेबाजी।
  • भाकपा माले और आदिवासी संघर्ष मोर्चा की व्यापक भागीदारी।

बरवाडीह प्रखंड में शुक्रवार को जननायक शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस पूरी राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष की भावना के साथ मनाया गया। भाकपा (माले) द्वारा इस अवसर को संकल्प दिवस के रूप में मनाते हुए बड़ी संख्या में आमजन, मजदूर, किसान, महिला और युवा शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत पचमुखी मंदिर परिसर में हुई, जहां कॉमरेड महेन्द्र सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस दौरान वातावरण “कॉमरेड महेन्द्र सिंह को लाल सलाम” के नारों से गूंज उठा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद को नमन किया और संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई।

संयुक्त रूप से हुआ माल्यार्पण

श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अगुवाई भाकपा (माले) जिला सचिव कॉमरेड बिरजू राम, वरिष्ठ कॉमरेड लुरुक सिंह एवं कुलेश्वर सिंह ने संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर की। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में उपस्थित महिला–पुरुषों ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान शहीद के जीवन और संघर्ष पर संक्षिप्त चर्चा भी की गई।

संकल्प मार्च में गूंजे संघर्ष के नारे

माल्यार्पण कार्यक्रम के पश्चात एक संकल्प मार्च निकाला गया। मार्च पचमुखी मंदिर से शुरू होकर बरवाडीह मेन बाजार, बस स्टैंड, विवेकानंद चौक होते हुए अंबेडकर चौक तक पहुंचा। पूरे मार्ग में जनसमूह ने हाथों में झंडे-बैनर लेकर सरकार विरोधी और जनपक्षधर नारे लगाए।

मार्च के दौरान
मनरेगा की हत्या क्यों—मोदी सरकार जवाब दो”,
पेसा और वनाधिकार कानून सख्ती से लागू करो”,
जल–जंगल–जमीन की लड़ाई तेज करो”,
चार श्रम कोड रद्द करो”,
संविधान और लोकतंत्र विरोधी भाजपा सरकार मुर्दाबाद”,
भाकपा माले जिंदाबाद
जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

अंबेडकर चौक पर संकल्प सभा का आयोजन

संकल्प मार्च के समापन के बाद अंबेडकर चौक पर एक विशाल संकल्प सभा आयोजित की गई। सभा की अध्यक्षता भाकपा (माले) प्रखंड सचिव राजेंद्र सिंह ने की। सभा में वक्ताओं ने कॉमरेड महेन्द्र सिंह के राजनीतिक योगदान और जनसंघर्षों को याद करते हुए वर्तमान परिस्थितियों पर तीखा प्रहार किया।

कॉमरेड महेन्द्र सिंह विचार और संघर्ष का नाम: बिरजू राम

सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव कॉमरेड बिरजू राम ने कहा:

“कॉमरेड महेन्द्र सिंह केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे विचार और संघर्ष की जीवित मिसाल थे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार संविधान और लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। दलितों, आदिवासियों और मजदूरों पर दमन बढ़ा है तथा जल, जंगल और जमीन को कॉरपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को कमजोर किया गया है और चार श्रम कोड लागू कर मजदूरों के अधिकार छीने गए हैं।

पेसा और वनाधिकार कानून लागू करने की मांग

कॉमरेड बिरजू राम ने पेसा कानून और वनाधिकार कानून को सख्ती से लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इन कानूनों का सही क्रियान्वयन ही आदिवासी समाज को सशक्त बना सकता है। उन्होंने गांव-गांव संगठन को मजबूत करने और संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।

कई नेताओं ने रखे विचार

संकल्प सभा को भाकपा (माले) नेता कमलेश सिंह, घनश्याम राम, मंजू देवी, सुदामा राम, कृष्णा सिंह, लुरुक सिंह, दसरथ सिंह, किशुन सिंह, रमेश कुमार, सुनीता मेहरा सहित भाकपा माले एवं आदिवासी संघर्ष मोर्चा के अनेक नेताओं ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शहीद महेन्द्र सिंह के सपनों का झारखंड तभी बनेगा जब गरीब, मजदूर और आदिवासी एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।

नारों के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

सभा के अंत में उपस्थित जनसमूह ने “इंकलाब जिंदाबाद” और “कॉमरेड महेन्द्र सिंह को लाल सलाम” के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया। लोगों ने संकल्प लिया कि वे अन्याय, शोषण और भ्रष्टाचार के खिलाफ संगठित संघर्ष जारी रखेंगे।

न्यूज़ देखो: संघर्ष की विरासत और वर्तमान राजनीति

कॉमरेड महेन्द्र सिंह का शहादत दिवस केवल स्मृति का आयोजन नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक हालात पर एक स्पष्ट संदेश है। यह कार्यक्रम बताता है कि जमीनी सवालों—रोजगार, अधिकार और लोकतंत्र—पर संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में यह आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संघर्ष से ही बदलेगा भविष्य

शहीदों को याद करना तभी सार्थक है, जब उनके सपनों को आगे बढ़ाया जाए।
लोकतंत्र, श्रमिक अधिकार और सामाजिक न्याय की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।
आप भी इस जनसंघर्ष पर अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जागरूकता फैलाने में भूमिका निभाएं।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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