
#मेदिनीनगर #अंतरराष्ट्रीय_खेल : भारत नेपाल और भूटान के कराटेकारों की सहभागिता से सजी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा।
मेदिनीनगर के संत मरियम विद्यालय कजरी में तृतीय इन्डो–नेपाल कन्टिनेंटल इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत नेपाल और भूटान के कराटे खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। आयोजन इंटरनेशनल टाइगर्स फुल कॉन्टैक्ट कराटे फेडरेशन एवं इंटरनेशनल शोतो कान पुशामाकू कराटे फेडरेशन के तत्वावधान में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता का उद्देश्य खेल के माध्यम से अनुशासन आत्मसंयम और अंतरराष्ट्रीय भाईचारे को मजबूत करना रहा।
- संत मरियम विद्यालय कजरी में तृतीय इन्डो–नेपाल कन्टिनेंटल कराटे चैंपियनशिप का आयोजन।
- भारत, नेपाल और भूटान के कराटे खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता।
- मुख्य अतिथि अविनाश देव ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।
- फाइट जजमेंट में मास्टर सुशांत बनर्जी और रेफरी प्रमुख शमशेर रजा रहे।
- भारत टीम ने विजेता और नेपाल टीम ने उपविजेता का खिताब जीता।
मेदिनीनगर में आयोजित तृतीय इन्डो–नेपाल कन्टिनेंटल इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप ने खेल प्रेमियों और मार्शल आर्ट से जुड़े युवाओं के बीच खास उत्साह पैदा किया। संत मरियम विद्यालय कजरी का परिसर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपस्थिति से खेल के रंग में रंगा नजर आया। प्रतियोगिता में भारत के लगभग 12 राज्यों के कराटेकारों के साथ नेपाल और भूटान से आए खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
आयोजन और उद्घाटन समारोह
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन इंटरनेशनल टाइगर्स फुल कॉन्टैक्ट कराटे फेडरेशन एवं इंटरनेशनल शोतो कान पुशामाकू कराटे फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि संत मरियम विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन के दौरान कराटेकारों पर पुष्पवर्षा की गई, जिससे खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना हो गया।
इस अवसर पर आयोजन अध्यक्ष क्यॉंशी डॉ. संतोष कुमार को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने भारत और नेपाल के बाल कराटेकारों के बीच प्रतीकात्मक फाइट कराकर प्रतियोगिता की औपचारिक शुरुआत कराई, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा।
मुख्य अतिथि का संदेश
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अविनाश देव ने कहा कि झारखंड विशेषकर पलामू क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि जरूरत है तो केवल निरंतर प्रशिक्षण, सही मार्गदर्शन और मंच उपलब्ध कराने की। उन्होंने कराटे को अनुशासन, आत्मसंयम और मानसिक संतुलन का खेल बताते हुए कहा:
अविनाश देव ने कहा: “कराटे केवल लड़ाई की कला नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में स्वयं पर नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने का प्रशिक्षण है। यही मूल्य जीवन में सफलता का आधार बनते हैं।”
उन्होंने आयोजन समिति से आग्रह किया कि भविष्य में इस प्रतियोगिता को और व्यापक बनाया जाए तथा अधिक देशों के कराटेकारों को आमंत्रित किया जाए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि संत मरियम विद्यालय इस दिशा में हरसंभव सहयोग करेगा।
निर्णायक और रेफरी की भूमिका
चैंपियनशिप के दौरान फाइट जजमेंट में कलकत्ता से आए मास्टर सुशांत बनर्जी ने मुख्य जज की भूमिका निभाई। वहीं रेफरी की मुख्य जिम्मेदारी नेपाल के कराटे प्रशिक्षक शमशेर रजा ने संभाली। उनके नेतृत्व में रेफरी पैनल ने निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सटीक निर्णय दिए।
रेफरी दल में शिहान अनिस्तर यादव, शिहान संजय कुमार पासवान, शिहान भोला मिंज, शिहान जुबेर अहमद, शिहान विकास सिंधु, शिहान ईशांत महंत, सेंसाई नटवर पांडेय, सेंसाई शमशेर अंसारी, सेंसाई गौतम शर्मा, सेंसाई दीपक कुमार, आयुष कुमार और गौरव सहित अनेक अनुभवी प्रशिक्षक शामिल रहे। सभी ने मिलकर प्रतियोगिता को सुचारू और उच्चस्तरीय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रोमांचक मुकाबले और परिणाम
पूरे टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों ने जबरदस्त तकनीक, अनुशासन और खेल भावना का प्रदर्शन किया। अलग-अलग भार वर्ग और आयु वर्ग में खेले गए मुकाबलों में दर्शकों को रोमांचक फाइट देखने को मिली।
अंततः शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत टीम ने विजेता का खिताब अपने नाम किया, जबकि नेपाल टीम उपविजेता रही। भूटान के खिलाड़ियों ने भी सराहनीय खेल दिखाते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का महत्व
इस चैंपियनशिप में भारत के लगभग 12 राज्यों से आए कराटेकारों के साथ नेपाल और भूटान की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया। इससे न केवल खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिला, बल्कि सांस्कृतिक और खेल संबंधों को भी मजबूती मिली।
आयोजन से जुड़े प्रशिक्षकों और अधिकारियों ने बताया कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से स्थानीय खिलाड़ियों को नई तकनीक सीखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और बड़े मंच पर खुद को साबित करने का अवसर मिलता है।





न्यूज़ देखो: खेल कूटनीति और प्रतिभा का संगम
इन्डो–नेपाल कन्टिनेंटल कराटे चैंपियनशिप ने यह साबित किया कि खेल सीमाओं से ऊपर होता है। इस आयोजन ने पलामू को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर पहचान दिलाई है। अब जरूरत है कि सरकार और खेल संगठनों द्वारा ऐसे आयोजनों को नियमित प्रोत्साहन मिले। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
खेल से बनेगा अनुशासन और आत्मबल
कराटे जैसे खेल युवाओं को आत्मरक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास सिखाते हैं। जरूरी है कि अभिभावक और समाज ऐसे आयोजनों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। अपनी राय साझा करें, इस खबर को फैलाएं और खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के इस प्रयास का हिस्सा बनें।





