#बानो #शिवमंदिरस्थापनादिवस : अस्ठ प्रहरी यज्ञ और भंडारा भक्ति से सम्पन्न हुआ।
बानो शिव मंदिर का 69वां स्थापना दिवस धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अस्ठ प्रहरी यज्ञ, कलश यात्रा, नगर भ्रमण और भंडारा का आयोजन किया गया। विभिन्न गांवों की कीर्तन मंडलियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बनाया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे क्षेत्र में धार्मिक एकता का संदेश गया।
- 69वां स्थापना दिवस पर अस्ठ प्रहरी यज्ञ का आयोजन।
- शनिवार को निकली कलश यात्रा, रविवार प्रातः यज्ञ आरंभ।
- आचार्य प्रदीप पण्डा, मनोहर दिवेदी, सन्तोष दिवेदी ने कराया पूजन।
- जजमान के रूप में कृष्णा सोनी सह पत्नी रहे उपस्थित।
- उकौली, पांगुर, कनरोवां, पाड़ो, जराकेल, सोडा गांवों की कीर्तन मंडलियों की भागीदारी।
- सोमवार को नगर भ्रमण और भंडारा, मुख्य मार्गों से होकर पुनः मंदिर परिसर पहुंचा जुलूस।
बानो स्थित शिव मंदिर में 69वां स्थापना दिवस श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत अस्ठ प्रहरी यज्ञ, कलश यात्रा, नगर भ्रमण और भंडारा का आयोजन किया गया। शनिवार को निकली कलश यात्रा से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके बाद विधिवत कलश स्थापना की गई। रविवार प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ प्रारंभ हुआ। पूरे आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों की कीर्तन मंडलियों और श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी रही।
कलश यात्रा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
स्थापना दिवस को लेकर शनिवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धालु महिलाओं और पुरुषों ने सिर पर कलश लेकर पूरे उत्साह के साथ मंदिर परिसर की परिक्रमा की। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों के बीच कलश स्थापना की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बन गया।
कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने शिव मंदिर की परंपरा और धार्मिक गरिमा को बनाए रखने का संकल्प लिया। मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गई थी और दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
अस्ठ प्रहरी यज्ञ में गूंजे वैदिक मंत्र
रविवार की प्रातः विधिवत यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ पूजन में आचार्य प्रदीप पण्डा, मनोहर दिवेदी और सन्तोष दिवेदी ने वैदिक रीति-रिवाज से पूजा संपन्न कराई। पूरे दिन मंत्रोच्चार और हवन की आहुति से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जजमान के रूप में कृष्णा सोनी सह पत्नी यज्ञ वेदी पर विराजमान रहे। यज्ञ में क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई। आचार्यों ने श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपराओं के महत्व के बारे में भी बताया।
आचार्य प्रदीप पण्डा ने कहा: “मंदिर स्थापना दिवस पर आयोजित यज्ञ समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।”
विभिन्न गांवों की कीर्तन मंडलियों की सहभागिता
कार्यक्रम में प्रखण्ड के उकौली, पांगुर, कनरोवां, पाड़ो, जराकेल और सोडा सहित अन्य गांवों की कीर्तन मंडलियों ने भाग लिया। कीर्तन मंडलियों ने भक्ति गीतों और भजनों से वातावरण को भावविभोर कर दिया।
सोमवार को आयोजित नगर भ्रमण में भी इन गांवों से आए कीर्तन मंडली के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया।
नगर भ्रमण और भंडारा का आयोजन
सोमवार को मंदिर परिसर से नगर भ्रमण निकाला गया। यह जुलूस स्टेशन रोड, बिरसा मुंडा चौक से होते हुए मुख्य मार्गों से गुजरकर पुनः मंदिर परिसर पहुंचा। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे।
नगर भ्रमण के बाद भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति की ओर से सभी आगंतुकों के लिए समुचित व्यवस्था की गई थी।
आयोजन में शामिल प्रमुख लोग
इस अवसर पर राजेश सिंह, रामकिशोर सिंह, रामचन्द्र बड़ाईक, भुनेश्वर सिंह, विश्वनाथ बड़ाईक, उदय साहू, आनन्द चौरसिया, अमित सोनी, रूपेश सिंह, बिनोद कश्यप, नीलू चौरसिया, सुगन्ध जायसवाल, विकास सिंघल, राहुल अग्रवाल, बिलु अग्रवाल, भूषण साहू, बिनोद ठाकुर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इन सभी की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने आयोजन समिति की सराहना की और भविष्य में भी इसी प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा जताई।
न्यूज़ देखो: परंपरा और आस्था का सशक्त संगम
बानो शिव मंदिर का 69वां स्थापना दिवस यह दर्शाता है कि क्षेत्र में धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को एकजुट करने का माध्यम हैं। सामूहिक यज्ञ, नगर भ्रमण और भंडारा जैसे आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों और आयोजन समिति की सक्रिय भागीदारी प्रशंसनीय है। ऐसे आयोजन भविष्य में भी निरंतर होते रहें, यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था से जुड़ाव ही समाज की सच्ची शक्ति
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता के सूत्र होते हैं। जब गांव-गांव से लोग एक मंच पर आते हैं, तो आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी संस्कृति और विरासत को जीवित रखते हैं। स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों को समर्थन देना हम सभी की जिम्मेदारी है।