तीन पीढ़ियों से सड़क से वंचित कोलया दमार गांव के ग्रामीणों ने उठाई आवाज, आमसभा में उठी मूलभूत सुविधाओं की मांग

तीन पीढ़ियों से सड़क से वंचित कोलया दमार गांव के ग्रामीणों ने उठाई आवाज, आमसभा में उठी मूलभूत सुविधाओं की मांग

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #ग्रामीण_समस्या : कोलया दमार गांव में सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने आमसभा में आवाज उठाई।

सिमडेगा प्रखंड के बड़ाबरपानी पंचायत अंतर्गत कोलया दमार गांव में आमसभा आयोजित कर ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग उठाई। तीन पीढ़ियों से सड़क सुविधा से वंचित लगभग 55 परिवारों ने अपनी समस्याएं रखीं। बैठक में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने मूलभूत सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई। यह मुद्दा ग्रामीण जीवन और विकास से सीधे जुड़ा हुआ है।

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  • कोलया दमार गांव में तीन पीढ़ियों से सड़क निर्माण नहीं होने का मामला सामने आया।
  • लगभग 55 परिवार आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित।
  • संदीप बाघवार की अध्यक्षता में आमसभा का आयोजन।
  • सुनील सुरीन और प्रदीप टोप्पो ने ग्रामीण समस्याओं को उठाया।
  • पेसा कानून के तहत ग्राम सभा गठन की मांग पर जोर।
  • कई ग्रामीणों की मौजूदगी में विकास कार्यों को लेकर चर्चा।

सिमडेगा प्रखंड के बड़ाबरपानी पंचायत अंतर्गत स्थित कोलया दमार गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। गांव में आयोजित आमसभा में तीन पीढ़ियों से सड़क निर्माण नहीं होने की समस्या प्रमुख रूप से सामने आई। बैठक की अध्यक्षता संदीप बाघवार ने की, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

सड़क नहीं, तो विकास कैसे?

बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे गांव का संपर्क लगभग कट जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सुरीन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा:

सुनील सुरीन ने कहा: “तीन पीढ़ी बीत जाने के बाद भी गांव में सड़क का निर्माण नहीं होना बेहद चिंता का विषय है। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।”

उनका यह बयान ग्रामीणों की पीड़ा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

55 परिवार अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

गांव में लगभग 55 परिवार निवास करते हैं, जो आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। यह स्थिति विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।

आदिवासी नेता प्रदीप टोप्पो ने भी इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

प्रदीप टोप्पो ने कहा: “लगभग 55 परिवारों की आबादी होने के बावजूद गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जिस समाज में शिक्षा और एकजुटता होती है, वही समाज आगे बढ़ता है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।”

उन्होंने ग्रामीणों को शिक्षा और एकजुटता के महत्व के प्रति जागरूक किया।

पेसा कानून के तहत ग्राम सभा गठन की मांग

बैठक के दौरान पेसा कानून के तहत ग्राम सभा का गठन करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रदीप टोप्पो ने कहा कि ग्राम सभा के गठन से ग्रामीणों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता मिलेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

प्रदीप टोप्पो ने कहा: “जल्द से जल्द पेसा कानून के तहत ग्राम सभा का गठन किया जाना चाहिए और अधिक से अधिक ग्रामीणों को इससे जुड़ना चाहिए।”

यह मांग स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ग्रामीणों की सहभागिता और एकजुटता

इस आमसभा में कई ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और अपनी समस्याओं को खुलकर रखा। बैठक में मनोज बाघवार, अमृत बाघवार, शशी इन्दवार, तेलेशफोर केरकेट्टा, डेविड इन्दवार, सिप्रीयन तिर्की, नीलेश डुंगडुंग, मेरी होरो, निराज बाघवार, कुंवारी सोरेंग सहित कई लोग उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने एक स्वर में सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि अब उन्हें जल्द समाधान चाहिए।

विकास की राह देखता कोलया दमार

कोलया दमार गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। सड़क नहीं होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि विकास की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है।

न्यूज़ देखो: क्या अब भी इंतजार करेगा कोलया दमार?

कोलया दमार गांव की स्थिति यह दिखाती है कि विकास की योजनाएं अभी भी जमीनी स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। तीन पीढ़ियों से सड़क का इंतजार करना किसी भी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन को इस दिशा में त्वरित कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। अब सवाल यह है कि क्या इस बार ग्रामीणों की आवाज सुनी जाएगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब समय है आवाज उठाने का और बदलाव लाने का

जब तक हम अपनी समस्याओं के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक बदलाव मुश्किल है।
ग्रामीण एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े हो रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।
आप भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को पहचानें और समाधान के लिए आगे आएं।

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Written by

सिमडेगा

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